जेवर एयरपोर्ट से पहली कमर्शियल फ्लाइट कब शुरू हुई? नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट का रियल एस्टेट बाजार पर क्या असर पड़ेगा? जेवर एयरपोर्ट के आसपास प्रॉपर्टी की कीमतें कितनी बढ़ी हैं? क्या जेवर एयरपोर्ट के कारण यमुना एक्सप्रेसवे क्षेत्र में निवेश बढ़ेगा? जेवर एयरपोर्ट के आसपास कौन-कौन से नए बिजनेस हब विकसित हो सकते हैं?

Jevar Airport Impact on Delhi NCR: रविवार को जेवर स्थित नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट से पहली कमर्शियल फ्लाइट ने उड़ान भरी। यह केवल एविएशन सेक्टर के लिए ही नहीं, बल्कि दिल्ली-एनसीआर के रियल एस्टेट बाजार के लिए भी एक महत्वपूर्ण उपलब्धि मानी जा रही है। कई वर्षों से इस एयरपोर्ट को यमुना एक्सप्रेसवे क्षेत्र के विकास का प्रमुख आधार माना जा रहा था। अब जब एयरपोर्ट का संचालन शुरू हो गया है, तो डेवलपर्स, निवेशक और घर खरीदने वाले यह देखने पर ध्यान दे रहे हैं कि क्या यह इलाका देश के अन्य एयरपोर्ट आधारित आर्थिक केंद्रों की तरह तेजी से विकसित हो पाएगा। रियल एस्टेट सेक्टर के विशेषज्ञों का मानना है कि एयरपोर्ट का प्रभाव केवल यात्रियों की आवाजाही तक सीमित नहीं रहेगा। इसके आसपास रोजगार, उद्योग, लॉजिस्टिक्स, कमर्शियल हब और आवासीय परियोजनाओं के विकास की बड़ी संभावनाएं दिखाई दे रही हैं।

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एयरोट्रोपोलिस मॉडल से बदल सकती है जेवर की तस्वीर

हीरो रियल्टी के सीईओ रोहित किशोर का कहना है कि जेवर को केवल एक एयरपोर्ट प्रोजेक्ट के रूप में नहीं, बल्कि "एयरोट्रोपोलिस" के रूप में देखा जाना चाहिए। एयरोट्रोपोलिस एक ऐसा शहरी इकोसिस्टम होता है, जिसका विकास किसी बड़े एयरपोर्ट के आसपास होता है। उनके अनुसार, जेवर की सबसे बड़ी ताकत यहां उपलब्ध बड़े और आपस में जुड़े भूमि क्षेत्र हैं। एनसीआर के अन्य हिस्सों में इतनी बड़ी और लगातार जमीन मिलना मुश्किल है। यही वजह है कि यहां बड़े पैमाने पर औद्योगिक, वाणिज्यिक और आवासीय परियोजनाओं के विकास की संभावना है।

प्रॉपर्टी कीमतों में पहले ही दिखने लगा असर

एयरपोर्ट के संचालन का असर स्थानीय प्रॉपर्टी बाजार में पहले से दिखाई देने लगा है। भूटानी इंफ्रा के सीईओ आशीष भूटानी के मुताबिक, एयरपोर्ट के आसपास स्थित कई माइक्रो-मार्केट में कमर्शियल ऑपरेशन शुरू होने से पहले ही पिछले कुछ वर्षों में 40 से 80 प्रतिशत तक कीमतों में बढ़ोतरी देखी गई है। उन्होंने कहा कि अब विकास का अगला चरण वास्तविक कारोबारी गतिविधियों, रोजगार सृजन और इंफ्रास्ट्रक्चर विस्तार से संचालित होगा। भूटानी के अनुसार, यमुना एक्सप्रेसवे और जेवर एयरपोर्ट क्षेत्र के आसपास आवासीय प्रॉपर्टी की कीमतें फिलहाल 8,000 से 12,000 रुपये प्रति वर्ग फुट के बीच हैं। आने वाले समय में हाउसिंग, ऑफिस, रिटेल, हॉस्पिटैलिटी और लॉजिस्टिक्स सेक्टर में बढ़ती मांग के कारण इनमें और वृद्धि हो सकती है।

रोजगार और कारोबार बढ़ने से बढ़ेगी रियल एस्टेट डिमांड

विशेषज्ञों का मानना है कि एयरपोर्ट किसी भी क्षेत्र में आर्थिक गतिविधियों को बढ़ावा देते हैं। एयरपोर्ट के आसपास उद्योग और व्यवसाय आते हैं, जिससे रोजगार के अवसर पैदा होते हैं। रोजगार बढ़ने के साथ ही घरों, ऑफिस, होटल, वेयरहाउस और रिटेल स्पेस की मांग भी बढ़ती है। दुनिया के कई बड़े एयरपोर्ट के आसपास ऐसा विकास देखा गया है। रियल एस्टेट सेक्टर को उम्मीद है कि अगले कुछ वर्षों में जेवर भी इसी मॉडल पर आगे बढ़ सकता है।

हाउसिंग डिमांड को मिल सकती है नई रफ्तार

बेहतर कनेक्टिविटी हमेशा से आवासीय बाजार के लिए एक बड़ा आकर्षण रही है। एयरपोर्ट शुरू होने के बाद यमुना एक्सप्रेसवे और ग्रेटर नोएडा क्षेत्र घर खरीदने वालों और निवेशकों के लिए और अधिक आकर्षक बन सकते हैं। इसके अलावा, एयरपोर्ट को बेहतर सड़क, रेल और मेट्रो नेटवर्क से जोड़ने की योजनाएं भी इस क्षेत्र की संभावनाओं को मजबूत कर रही हैं। इंडस्ट्री के अनुमानों के अनुसार, एयरपोर्ट आधारित विकास कॉरिडोर में अगले दो वर्षों के दौरान अपार्टमेंट की कीमतों में करीब 22 प्रतिशत तक वृद्धि हो सकती है। वहीं प्लॉटेड डेवलपमेंट की कीमतों में लगभग 28 प्रतिशत तक बढ़ोतरी देखने को मिल सकती है। घर खरीदारों के लिए आकर्षण केवल निवेश तक सीमित नहीं है। जैसे-जैसे कंपनियां और उद्योग इस क्षेत्र में आएंगे, लोगों के लिए अपने कार्यस्थल के करीब रहना भी एक महत्वपूर्ण कारण बन सकता है।

ऑफिस स्पेस और कमर्शियल रियल एस्टेट को होगा फायदा

नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट का असर कमर्शियल रियल एस्टेट सेक्टर पर भी महत्वपूर्ण हो सकता है। विशेषज्ञों का मानना है कि टेक्नोलॉजी कंपनियां, बहुराष्ट्रीय कंपनियां, लॉजिस्टिक्स ऑपरेटर और एविएशन से जुड़े व्यवसाय एयरपोर्ट के आसपास अपनी मौजूदगी बढ़ाने में रुचि दिखा सकते हैं। इस क्षेत्र में ऑफिस और बिजनेस स्पेस पहले से ही 8,000 से 15,000 रुपये प्रति वर्ग फुट की कीमत पर लॉन्च किए जा रहे हैं। वहीं प्रीमियम रिटेल प्रॉपर्टी की कीमतें इससे भी अधिक हैं। नोएडा का महामाया-एडवांट कॉरिडोर भी एयरपोर्ट के शुरू होने से लाभान्वित हो सकता है। भले ही यह एयरपोर्ट क्षेत्र से कुछ दूरी पर स्थित है, लेकिन बेहतर कनेक्टिविटी, विकसित कमर्शियल इकोसिस्टम और मजबूत सामाजिक बुनियादी ढांचा इसे एनसीआर में विस्तार करने वाली कंपनियों के लिए आकर्षक बना सकता है।

फरीदाबाद और आसपास के क्षेत्रों को भी मिल सकता है लाभ

रियल एस्टेट विशेषज्ञों का मानना है कि एयरपोर्ट का प्रभाव केवल नोएडा और ग्रेटर नोएडा तक सीमित नहीं रहेगा। BPTP के सीईओ और प्रेसिडेंट मानिक मलिक के अनुसार, फरीदाबाद को भी कई बड़े कनेक्टिविटी प्रोजेक्ट्स का लाभ मिल सकता है। इनमें FNG एक्सप्रेसवे, ग्रीनफील्ड एक्सप्रेसवे, दिल्ली-मुंबई इंडस्ट्रियल कॉरिडोर (DMIC) और प्रस्तावित नमो भारत कॉरिडोर जैसे प्रोजेक्ट शामिल हैं। इन प्रोजेक्ट के पूरा होने के बाद जेवर एयरपोर्ट और आसपास के क्षेत्रों की कनेक्टिविटी और मजबूत होगी, जिससे पूरे एनसीआर में आर्थिक गतिविधियों और रियल एस्टेट विकास को नया प्रोत्साहन मिल सकता है।