राज्यसभा चुनाव से पहले 'ऑपरेशन लोटस' के डर से ओडिशा कांग्रेस के 8 विधायकों को कर्नाटक के एक रिजॉर्ट में शिफ्ट किया गया है। इसका उद्देश्य चौथी सीट के लिए होने वाली वोटिंग में क्रॉस-वोटिंग को रोकना है।

रामनगर: राज्यसभा चुनाव से पहले 'ऑपरेशन लोटस' का डर कांग्रेस को सता रहा है। इसी के चलते ओडिशा के 8 कांग्रेस विधायकों को कर्नाटक के रामनगर में बिदादी के पास वंडरला रिजॉर्ट में शिफ्ट कर दिया गया है। ये सभी विधायक ओडिशा प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष भक्त चरण दास की अगुवाई में गुरुवार रात भुवनेश्वर से बेंगलुरु पहुंचे। रात करीब 11 बजे केम्पेगौड़ा इंटरनेशनल एयरपोर्ट पर डी.के. शिवकुमार के करीबियों ने उनका स्वागत किया।

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एयरपोर्ट से विधायकों को पुलिस सुरक्षा और एस्कॉर्ट के साथ सीधे वंडरला रिजॉर्ट लाया गया। बताया जा रहा है कि ये सभी पहली बार विधायक बने हैं। रिजॉर्ट पहुंचने के बाद सभी विधायक अपने-अपने कमरों में ही रहे और आराम किया। शाम को डिप्टी CM डी.के. शिवकुमार ने विधायक एच.सी. बालकृष्ण और सी.पी. योगेश्वर के साथ रिजॉर्ट पहुंचकर इन विधायकों से मुलाकात की और हालात पर चर्चा की। जानकारी के मुताबिक, ये सभी वोटिंग के वक्त ही भुवनेश्वर वापस लौटेंगे।

चौथी सीट जीतने की लड़ाई

16 मार्च को 10 राज्यों की 37 राज्यसभा सीटों पर चुनाव होना है। ओडिशा में विधायक 4 राज्यसभा सदस्यों को चुनेंगे। इनमें से चौथी सीट पर किसी भी पार्टी के पास जीत के लिए साफ बहुमत नहीं है। इसी वजह से ओडिशा की सियासत में क्रॉस-वोटिंग का खतरा मंडरा रहा है। चर्चा है कि सत्ताधारी BJP 'ऑपरेशन लोटस' के जरिए क्रॉस-वोटिंग कराने की कोशिश कर सकती है।

BJP नेताओं द्वारा क्रॉस-वोटिंग कराए जाने के डर से कांग्रेस ने अपने विधायकों को कर्नाटक शिफ्ट कर दिया है, जहां उसकी अपनी सरकार है। कांग्रेस के 14 में से 8 विधायक बिदादी के पास वंडरला रिजॉर्ट में रुके हुए हैं। इनकी पूरी जिम्मेदारी पार्टी के 'ट्रबलशूटर' कहे जाने वाले डिप्टी CM डी.के. शिवकुमार को सौंपी गई है।

राज्यसभा की चौथी सीट के लिए BJD और कांग्रेस ने हाथ मिलाया है और जाने-माने किडनी स्पेशलिस्ट दत्तेश्वर होता को मैदान में उतारा है। वहीं, मशहूर होटल कारोबारी और पूर्व केंद्रीय मंत्री दिलीप रे BJP के समर्थन से निर्दलीय उम्मीदवार के तौर पर चुनाव लड़ रहे हैं। BJD और कांग्रेस, दोनों को ही डर है कि BJP उनके विधायकों को तोड़ सकती है।

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इसीलिए, ओडिशा कांग्रेस अध्यक्ष भक्त चरण दास अपने पार्टी के 14 में से 8 विधायकों को रिजॉर्ट ले आए हैं। कांग्रेस की रणनीति और मकसद यही है कि विरोधी पार्टियां उनके विधायकों को लुभा न सकें। राज्यसभा चुनाव में एक उम्मीदवार को जिताने के लिए 30 वोटों की जरूरत है। इस हिसाब से BJP आसानी से दो सीटें जीत सकती है। वहीं, निर्दलीय उम्मीदवार को जीतने के लिए 11 और वोटों की जरूरत है। इसी वजह से कांग्रेस को डर है कि BJP उनके विधायकों पर डोरे डाल सकती है। इसी के चलते विधायकों को क्रॉस-वोटिंग से बचाने के लिए रिजॉर्ट में शिफ्ट किया गया है।

आज रात कुछ और विधायकों के आने की संभावना है। कर्नाटक के स्थानीय कांग्रेस नेताओं ने विधायकों को लाने के लिए एयरपोर्ट पर गाड़ियों का इंतजाम कर लिया है। विधायकों के ठहरने की वजह से रिजॉर्ट के चारों ओर कड़ी पुलिस सुरक्षा तैनात की गई है।

'ऑपरेशन लोटस' का कोई डर नहीं: बालकृष्ण

रामनगर: इस मामले पर विधायक एच.सी. बालकृष्ण ने अपनी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा, "चुनाव के समय हम भी तो रिजॉर्ट में जाते हैं। वैसे ही ओडिशा के विधायक यहां आए हैं। इसमें ऑपरेशन लोटस का कोई डर नहीं है। पार्टी है तो छोटे-मोटे मतभेद होना स्वाभाविक है। हम उसे ठीक कर लेंगे।" वंडरला रिजॉर्ट में पत्रकारों से बात करते हुए उन्होंने कहा, "हमारी पार्टी के विधायक मेरे क्षेत्र में आए हैं। उनका स्वागत और सम्मान करना मेरा कर्तव्य है। इसीलिए मैं यहां आया हूं।"