खुलासा: जंग रोकने 50 बार गिड़गिड़ाया पाकिस्तान, ऑपरेशन सिंदूर से बंध गई थी घिग्घी
22 अप्रैल, 2025 को कश्मीर की बैसरन घाटी में हुए पहलगाम आतंकी हमले के जवाब में भारत ने पाकिस्तान के खिलाफ ऑपरेशन सिंदूर लॉन्च किया था, जिससे पड़ोसी कांप उठा था। इस बात का खुलासा अमेरिका की एक रिपोर्ट से हुआ है।

अमेरिका के फॉरेन एजेंट्स रजिस्ट्रेशन एक्ट (FARA) के तहत फाइल किए गए डॉक्यूमेंट्स से पता चला है कि पाकिस्तानी राजनयिकों ने ईमेल, फोनकॉल और वन-टू-वन बैठकों के जरिये 4 दिन तक चले ऑपरेशन सिंदूर के बाद तक सीजफायर के लिए बैठकें कीं।
FARA के तहत फाइल किए गए दस्तावेजों से पता चला है कि पाकिस्तान किसी भी तरह से अमेरिका से गुहार लगाकर युद्ध रुकवाना चाहता था। इसके लिए उसने कई अधिकारियों और बिचौलियों, यहां तक कि अमेरिकी मीडिया से भी 50 से ज्यादा बार संपर्क किया था।
पाकिस्तान ने ट्रंप प्रशासन तक तेजी से पहुंच बनाने और डिप्लोमैटिक फैसलों को प्रभावित करने के लिए 6 अलग-अलग लॉबिंग फर्मों पर करीब 45 करोड़ रुपए खर्च किए थे। ये डॉक्यूमेंट्स स्क्वॉयर पैटन बोग्स (US) ने अपने विदेशी क्लाइंट इस्लामिक रिपब्लिक ऑफ पाकिस्तान की सरकार की ओर से बांटे थे।
ऑपरेशन सिंदूर कश्मीर के पहलगाम में 26 टूरिस्टों पर पाकिस्तान समर्थित बर्बर आतंकवादी हमले का भारत का जवाब था। 6 और 7 मई की रात को भारतीय सशस्त्र बलों ने पाकिस्तान में 9 जगहों पर आतंकी कैंपों पर हमला किया।
ऑपरेशन सिंदूर में भारत ने कई हाई-टेक और स्वदेशी सिस्टम का इस्तेमाल किया, जिसमें सटीक गाइडेड मिसाइलें, लंबी दूरी के स्टैंड-ऑफ हथियार, AI-सक्षम इंटेलिजेंस और टारगेटिंग सिस्टम, सैटेलाइट और ड्रोन से रियल-टाइम मॉनिटरिंग, और भारतीय हवाई क्षेत्र की सुरक्षा के लिए एक इंटीग्रेटेड एयर-डिफेंस और काउंटर-ड्रोन नेटवर्क शामिल हैं।
इन टेक्नोलॉजी की मदद से भारतीय सेना ने सीमा पार किए बिना पाकिस्तान के आतंकी ठिकानों पर सटीक हमले किए। भारत ने पाकिस्तान और पीओके में कई आतंकी इंफ्रास्ट्रक्चर साइटों को नेस्तनाबूत कर दिया। इस जवाबी कार्रवाई में जैश-ए-मोहम्मद और लश्कर-ए-तैयबा जैसे आतंकी संगठनों के बहावलपुर, मुरीदके, मुजफ्फराबाद और कोटली के ट्रेनिंग कैंप, लॉन्च पैड, कमांड सेंटर और लॉजिस्टिक्स हब तबाह हो गए।

