पाकिस्तान के रक्षा मंत्री का दावा है कि लड़ाकू विमानों की विदेशी मांग के कारण 6 महीने में IMF कर्ज की जरूरत नहीं होगी। लीबिया और अजरबैजान ने JF-17 खरीदे हैं, जबकि पाकिस्तान पहले ही 24 बार IMF से कर्ज ले चुका है।

इस्लामाबाद: 'हमारे लड़ाकू विमानों की विदेशों से भारी मांग आ रही है। इसलिए, 6 महीने बाद हमें IMF के कर्ज की जरूरत नहीं पड़ेगी'। यह बात हमारे पड़ोसी देश पाकिस्तान ने कही है, जो हमेशा कटोरा लेकर IMF के दरवाजे पर खड़ा रहता है और पैसों के लिए अपने सैनिकों तक को बेच देता है।

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ख्वाजा आसिफ का दिन में देखा गया सपना

जियो टीवी को दिए एक इंटरव्यू में पाकिस्तान के रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ ने यह दिन में सपना देखा है। उन्होंने कहा, 'ऑपरेशन सिंदूर के दौरान कई देशों ने हमारे हथियारों की ताकत देखी है। उसके बाद से जेएफ-17 लड़ाकू विमानों की भारी मांग आई है'। लेकिन गौर करने वाली बात यह है कि पाकिस्तान ने भारत के खिलाफ चीन में बने हथियारों का इस्तेमाल किया था। साथ ही, जेएफ-17 के आधे से ज्यादा हिस्से चीन में ही बनते हैं।

लीबिया और अजरबैजान ने पाकिस्तान से जेएफ-17, एफ-10 खरीदे हैं

इसके बावजूद, लीबिया और अजरबैजान जैसे देशों ने पाकिस्तान से जेएफ-17 और एफ-10 खरीदे हैं। इस बारे में बांग्लादेश से भी बातचीत चल रही है। साथ ही, खबर है कि पाकिस्तान सऊदी अरब के कर्ज के बदले में लड़ाकू विमान बेचने पर भी विचार कर रहा है। हाल ही में, पाकिस्तान ने IMF से कर्ज लेने के लिए अपनी एयरलाइन कंपनी को ही प्राइवेट हाथों में बेच दिया था। पाकिस्तान इस संस्था से पहले ही 24 बार कर्ज ले चुका है।