अरे! SC-ST-OBC बच्चियों पर ये क्या बोल गए कांग्रेस MLA फूल सिंह? मच गया हंगामा-Watch Video
Phool Singh Baraiya Statement: भांडेर से कांग्रेस विधायक फूल सिंह बरैया के विवादित बयान ने मध्य प्रदेश में तहलका मचा दिया। उन्होंने एससी-एसटी-ओबीसी बच्चियों को लेकर आपत्तिजनक टिप्पणी की, विपक्ष और समाज कार्यकर्ताओं ने तीखी प्रतिक्रिया दी।

चार-पांच लोग मिलकर रेप करते हैं, तीर्थ का फल मिलता है?
Phool Singh Baraiya News: मध्य प्रदेश की राजनीति एक बार फिर उस बयान को लेकर गरमा गई है, जिसने समाज, नैतिकता और संवैधानिक सोच-तीनों को झकझोर दिया है। दलित समाज के नेता और कांग्रेस विधायक फूल सिंह बरैया का एक इंटरव्यू सोशल मीडिया और राजनीतिक गलियारों में आग की तरह फैल गया है। क्या रेप जैसे जघन्य अपराध को किसी भी तर्क, धर्म या ग्रंथ से जोड़ना सही है? और अगर ऐसा किया जाए, तो उसका असर समाज पर कितना खतरनाक हो सकता है?
क्या सच में किसी ग्रंथ में रेप को पुण्य बताया गया है?
भांडेर से कांग्रेस विधायक फूल सिंह बरैया ने दावा किया कि कुछ “अन्य धर्मों के ग्रंथों” में लिखा है कि यदि अनुसूचित जाति की महिला के साथ सहवास किया जाए, तो उसे काशी तीर्थ के बराबर पुण्य मिलता है। उन्होंने इसके लिए ‘रुद्रयामल तंत्र’ नामक पुस्तक का हवाला दिया। लेकिन जब उनसे पूछा गया कि यह बात किस श्लोक या अध्याय में लिखी है, तो वे कोई स्पष्ट प्रमाण नहीं दे सके। यहीं से विवाद ने तूल पकड़ लिया।
क्या रेप की सोच सामूहिक होती है?
बरैया ने यह भी कहा कि रेप कोई अकेला व्यक्ति नहीं करता, बल्कि चार-पांच लोग मिलकर करते हैं, और उनके दिमाग में यह सोच रहती है कि उन्हें पुण्य मिलेगा। इस बयान ने एक और गंभीर सवाल खड़ा कर दिया-क्या अपराध की जिम्मेदारी को “सोच” के नाम पर फैलाया जा सकता है? कानून साफ कहता है: रेप एक व्यक्ति का अपराध होता है, और उसकी जवाबदेही भी व्यक्तिगत होती है।
ये मध्य प्रदेश के कांग्रेस विधायक फूल सिंह बरैया हैं। इनका दिमाग बौरा गया है। कह रहे हैं कि खूबसूरत लड़की दिख जाए तो दिमाग विचलित हो सकता है, रेप हो सकता है।
बरैया कहते हैं- उनके (किसी अन्य धर्म के ग्रंथों में) ग्रंथों में लिखा है कि यदि अनुसूचित जाति समाज की महिलाओं के साथ… pic.twitter.com/hfeKbCSrR4— Bhadohi Wallah (@Mithileshdhar) January 17, 2026
एससी-एसटी-ओबीसी समाज की बच्चियां ही क्यों?
विधायक के बयान में यह भी कहा गया कि आरोपियों के मन में यह धारणा रहती है कि एससी-एसटी-ओबीसी समाज की बच्चियां आसान शिकार हैं, इसलिए चार महीने और दस महीने की बच्चियों तक के साथ अपराध हो रहे हैं। यह बयान सहानुभूति से ज़्यादा एक खतरनाक नैरेटिव बनाता है, जो अपराध को सामाजिक सोच से जोड़कर अपराधी को हल्का और समाज को दोषी ठहराता है।
क्या फूल सिंह बरैया का यह पहला विवाद है?
नहीं। फूल सिंह बरैया इससे पहले भी कई बार विवादों में रहे हैं:
- 14 जनवरी 2026: बोले-संयुक्त चुनाव प्रणाली में SC-ST विधायक “कुत्ते जैसी हालत” में हैं।
- 5 अक्टूबर 2024: अधिकारियों को धमकी-“हाथ तोड़ देंगे, आंख फोड़ देंगे”।
- 2 अक्टूबर 2020: कहा-झांसी की रानी लक्ष्मीबाई शहीद नहीं हुईं, आत्महत्या की।
इन बयानों ने पहले भी उनकी सोच पर सवाल खड़े किए हैं।
कांग्रेस का आधिकारिक स्टैंड क्या है?
मध्य प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी ने साफ शब्दों में कहा- “रेप कोई बहस नहीं, अपराध है। और अपराध पर तर्क गढ़ना भी हिंसा है। हम दुष्कर्मियों से लड़ लेंगे, लेकिन ऐसे तर्क समाज को खोखला कर देंगे।” यह बयान पार्टी लाइन को स्पष्ट करता है कि रेप को किसी भी जाति, धर्म या ग्रंथ से जोड़ना अस्वीकार्य है।
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