Prateek Yadav Aparna Yadav Love Story: समाजवादी पार्टी के संस्थापक मुलायम सिंह यादव के बेटे प्रतीक यादव और उनकी पत्नी अपर्णा यादव का रिश्ता उत्तर प्रदेश में हमेशा सुर्खियों में रहा। जहां प्रतीक राजनीति से दूर रहे, वहीं अपर्णा एक राजनेता बनीं और समाजवादी पार्टी छोड़कर बीजेपी में शामिल हो गईं, जिससे खूब चर्चा हुई।

उत्तर प्रदेश की राजनीति में यादव परिवार हमेशा चर्चा का केंद्र रहा है। लेकिन इस राजनीतिक परिवार से जुड़ी एक कहानी ऐसी भी रही, जिसमें सत्ता, प्यार, ग्लैमर और विवाद सब कुछ शामिल था। यह कहानी थी Prateek Yadav और Aparna Yadav की। समाजवादी पार्टी के संस्थापक Mulayam Singh Yadav के छोटे बेटे प्रतीक यादव ने जहां हमेशा राजनीति से दूरी बनाए रखी, वहीं अपर्णा यादव धीरे-धीरे उत्तर प्रदेश की राजनीति का एक चर्चित चेहरा बन गईं। दोनों का रिश्ता लंबे समय तक राजनीतिक और सामाजिक हलकों में चर्चा का विषय बना रहा।

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10वीं क्लास में हुआ प्यार, पार्टी में हुई थी पहली मुलाकात

अपर्णा यादव ने एक पुराने इंटरव्यू में बताया था कि उनकी और प्रतीक यादव की पहली मुलाकात एक कॉमन फ्रेंड के जरिए एक पार्टी में हुई थी। उस समय दोनों काफी कम उम्र के थे। उन्होंने बताया था कि जब वह 10वीं क्लास में थीं, तभी उन्हें प्रतीक से प्यार हो गया था। शुरुआत में दोनों के बीच ईमेल और बातचीत के जरिए संपर्क बढ़ा। दिलचस्प बात यह रही कि लंबे समय तक अपर्णा को यह तक नहीं पता था कि प्रतीक यादव देश के सबसे प्रभावशाली राजनीतिक परिवारों में से एक से ताल्लुक रखते हैं।

धीरे-धीरे दोनों का रिश्ता गहरा होता गया और करीब आठ साल तक रिलेशनशिप में रहने के बाद दोनों ने शादी करने का फैसला लिया।

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2011 में हुई थी भव्य शादी

4 दिसंबर 2011 को सैफई में प्रतीक यादव और अपर्णा यादव की शादी बेहद भव्य अंदाज में हुई थी। यह शादी केवल पारिवारिक समारोह नहीं, बल्कि उत्तर प्रदेश की राजनीति और समाज का बड़ा आयोजन बन गई थी। इस हाई-प्रोफाइल शादी में राजनीति, उद्योग और फिल्म जगत की कई चर्चित हस्तियां शामिल हुई थीं। शादी के बाद यह जोड़ा अक्सर लखनऊ के सामाजिक और राजनीतिक कार्यक्रमों में नजर आने लगा। बाद में दोनों दो बेटियों के माता-पिता बने और लंबे समय तक उनकी छवि एक हाई-प्रोफाइल कपल के तौर पर बनी रही।

राजनीति से दूर रहे प्रतीक, अपर्णा ने चुना राजनीतिक रास्ता

जहां प्रतीक यादव ने बिजनेस, फिटनेस और रियल एस्टेट सेक्टर में अपना करियर बनाया, वहीं अपर्णा यादव ने सक्रिय राजनीति का रास्ता चुना। उन्होंने समाजवादी पार्टी के टिकट पर चुनाव भी लड़ा। हालांकि बाद में उनका भारतीय जनता पार्टी में शामिल होना उत्तर प्रदेश की राजनीति में बड़ी खबर बन गया। यादव परिवार से करीबी रिश्तों के बावजूद बीजेपी जॉइन करने के फैसले ने राजनीतिक गलियारों में काफी हलचल पैदा की थी। विश्लेषकों ने इसे केवल राजनीतिक बदलाव नहीं, बल्कि उत्तर प्रदेश की बदलती राजनीतिक रणनीतियों का संकेत भी माना था।

सोशल मीडिया पोस्ट से बढ़ी थीं चर्चाएं

इस साल की शुरुआत में प्रतीक यादव और अपर्णा यादव का रिश्ता एक बार फिर सुर्खियों में आ गया था। वजह बनी प्रतीक यादव के सोशल मीडिया पोस्ट्स, जिनमें उन्होंने अपनी निजी जिंदगी और मानसिक तनाव को लेकर भावुक बातें लिखी थीं। एक पोस्ट में उन्होंने अपनी शादी में चल रही परेशानियों का जिक्र करते हुए तलाक की बात तक लिख दी थी। पोस्ट वायरल होने के बाद सोशल मीडिया और राजनीतिक हलकों में कई तरह की चर्चाएं शुरू हो गई थीं। हालांकि बाद में परिवार के कुछ सदस्यों की ओर से दावा किया गया कि उनका सोशल मीडिया अकाउंट हैक हो गया था। इसके बाद सार्वजनिक रूप से तलाक या रिश्ते को लेकर कोई आधिकारिक पुष्टि सामने नहीं आई।

सत्ता, शोहरत और निजी जिंदगी के बीच चर्चा में रहा रिश्ता

प्रतीक और अपर्णा यादव का रिश्ता हमेशा केवल निजी जिंदगी तक सीमित नहीं रहा। राजनीति, परिवार, सार्वजनिक जीवन और सोशल मीडिया के दौर में उनकी कहानी लगातार चर्चा में बनी रही। एक तरफ प्रतीक यादव राजनीति से दूरी बनाकर बिजनेस और फिटनेस की दुनिया में अपनी पहचान बना रहे थे, तो दूसरी ओर अपर्णा यादव सार्वजनिक जीवन और राजनीति में सक्रिय भूमिका निभा रही थीं। यही वजह रही कि दोनों का रिश्ता उत्तर प्रदेश की सबसे चर्चित राजनीतिक कहानियों में शामिल हो गया।

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