लखनऊ में समाजवादी परिवार से आई एक चौंकाने वाली खबर ने सियासी गलियारों में हलचल मचा दी। मुलायम सिंह यादव के बेटे और अखिलेश यादव के सौतेले भाई प्रतीक यादव की 38 साल की उम्र में संदिग्ध हालात में मौत हो गई। फेफड़ों में ब्लड क्लॉट, अधूरा इलाज और अचानक बिगड़ी तबीयत ने कई सवाल खड़े कर दिए हैं। पोस्टमार्टम रिपोर्ट का इंतजार अब इससे पर्दा उठा सकता है।
लखनऊ: उत्तर प्रदेश की सियासत के 'गढ़' कहे जाने वाले मुलायम सिंह यादव के परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा है। समाजवादी पार्टी के संरक्षक दिवंगत मुलायम सिंह यादव के छोटे बेटे और पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव के भाई प्रतीक यादव अब हमारे बीच नहीं रहे। लखनऊ के सिविल अस्पताल में उन्हें 'ब्रॉट डेड' घोषित किया गया, जिससे समर्थकों और परिवार में शोक की लहर दौड़ गई है।

अस्पताल से अचानक घर जाना और फिर...खामोशी का सन्नाटा
प्रतीक यादव की मौत की कहानी किसी रहस्यमयी घटनाक्रम से कम नहीं है। सूत्रों के मुताबिक, उन्हें 30 अप्रैल को फेफड़ों की गंभीर समस्या के चलते अस्पताल में भर्ती कराया गया था। तीन दिन बाद जब उनकी सेहत में थोड़ा सुधार हुआ, तो वे बिना आधिकारिक डिस्चार्ज लिए ही घर लौट आए। बुधवार की सुबह जब उन्होंने कोई प्रतिक्रिया (Response) देना बंद कर दिया, तो परिवार के हाथ-पांव फूल गए। उन्हें तुरंत अस्पताल ले जाया गया, लेकिन तब तक बहुत देर हो चुकी थी।
फेफड़ों में खून का थक्का: क्या यही बनी मौत की वजह?
प्रतीक यादव लंबे समय से फेफड़ों से जुड़ी समस्याओं का इलाज करा रहे थे। शुरुआती जानकारी के अनुसार, उनके फेफड़ों में 'ब्लड क्लॉट' (खून का थक्का) जमने की समस्या थी, जो मेडिकल जगत में बेहद गंभीर मानी जाती है। हालांकि, मौत की असली वजह अभी भी एक पहेली बनी हुई है। प्रशासन ने पोस्टमार्टम की प्रक्रिया शुरू कर दी है, जिसकी रिपोर्ट आने के बाद ही इस असामयिक मौत के असली कारणों से पर्दा उठ पाएगा।
103 किलो से 'बॉडी बिल्डर' बनने का वो जादुई सफर
प्रतीक यादव की पहचान केवल एक पूर्व मुख्यमंत्री के बेटे के तौर पर नहीं थी, बल्कि वे अपनी फिटनेस के लिए अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मशहूर थे। बचपन में निमोनिया के इलाज के दौरान स्टेरॉयड लेने के कारण उनका वजन 103 किलो पार कर गया था। लेकिन, पिता मुलायम सिंह यादव की प्रेरणा से उन्होंने खुद को बदला और वजन घटाकर 67 किलो कर लिया। साल 2012 में उन्हें एक अंतरराष्ट्रीय बॉडीबिल्डिंग वेबसाइट ने "ट्रांसफॉर्मेशन ऑफ द मंथ" के खिताब से भी नवाजा था।
राजनीति से दूरी, लेकिन परिवार में था रसूख
अखिलेश यादव के सौतेले भाई होने के बावजूद प्रतीक ने खुद को सक्रिय राजनीति से हमेशा दूर रखा। साल 2014 में उन्हें आजमगढ़ से चुनाव लड़ाने की मांग उठी थी, लेकिन उन्होंने व्यावसायिक जीवन और जिम को प्राथमिकता दी। उनकी पत्नी अपर्णा बिष्ट यादव वर्तमान में भाजपा का हिस्सा हैं और उत्तर प्रदेश राज्य महिला आयोग की उपाध्यक्ष के रूप में सक्रिय हैं। प्रतीक यादव के निधन पर प्रदेश के कई बड़े नेताओं ने शोक संवेदनाएं व्यक्त की हैं। एक ऐसा शख्स जो अपनी सेहत को लेकर इतना सतर्क था, उसका इस तरह चले जाना हर किसी को सोचने पर मजबूर कर रहा है।
अब सबकी नजर पोस्टमार्टम रिपोर्ट पर
प्रतीक यादव की अचानक मौत ने सोशल मीडिया से लेकर राजनीतिक गलियारों तक हलचल बढ़ा दी है। परिवार शोक में डूबा हुआ है, जबकि समर्थक और करीबी लगातार अस्पताल पहुंच रहे हैं।


