ट्रंप ने रूसी डीजल से प्रतिबंध हटाए और यूक्रेन की स्टारलिंक सेवा रोक दी। इससे यूक्रेन का एयर डिफेंस ठप हो गया। वहीं, पुतिन ने युद्ध रोकने के लिए यूक्रेन के बिना ट्रंप और शी जिनपिंग के साथ 3 देशों की बैठक का प्रस्ताव रखा है।
लिंडसे ग्राहम नियम का हवाला देते हुए और राष्ट्रीय हित को ध्यान में रखकर, ट्रंप ने ईंधन की बढ़ती कीमतों को रोकने के लिए रूसी डीजल पर लगे प्रतिबंधों में ढील दी है। अब अमेरिका सीधे रूस से तेल आयात कर सकता है। हालांकि, ट्रंप ने मॉस्को पर कुछ नए प्रतिबंध भी लगाए हैं। इसी बीच, ट्रंप ने यूक्रेन को मिलने वाली स्टारलिंक सर्विस भी रद्द कर दी है। इससे यूक्रेन युद्ध के मैदान में लगभग अकेला पड़ गया है। स्टारलिंक सर्विस बंद होने से यूक्रेन का एयर डिफेंस सिस्टम ठप हो गया है और अब उसे रूसी ड्रोन हमलों का सामना करने में भारी परेशानी हो रही है। इन सबके बीच, रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने यूक्रेन युद्ध को खत्म करने के लिए एक नया प्रस्ताव पेश किया है।
त्रिपक्षीय शिखर सम्मेलन
रिपोर्ट्स के मुताबिक, यूक्रेन युद्ध का समाधान निकालने के लिए रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग के साथ एक त्रिपक्षीय बैठक का प्रस्ताव रखा है। 'द वॉल स्ट्रीट जर्नल' की रिपोर्ट बताती है कि पुतिन की इस चाल का असली मकसद मॉस्को के पक्ष में एक शांति समझौता करना है। यह बैठक अगले महीने (18 और 19 नवंबर) चीन के शेनझेन में होने वाले एशिया-प्रशांत आर्थिक सहयोग (APEC) शिखर सम्मेलन के दौरान करने की योजना है। हालांकि, ट्रंप ने अभी तक इसके लिए अपनी अंतिम सहमति नहीं दी है। वहीं, क्रेमलिन के प्रवक्ता दिमित्री पेसकोव ने साफ किया है कि अभी तक बैठक की तारीख या एजेंडे पर कोई पक्की सहमति नहीं बनी है। बताया जा रहा है कि 9 अक्टूबर को ट्रंप के साथ हुई फोन कॉल में पुतिन ने यह प्रस्ताव रखा था। इस बातचीत में अमेरिका द्वारा रूसी डीजल खरीदने और ग्लोबल मार्केट में इसकी बिक्री को आसान बनाने पर भी चर्चा हुई थी।
यूक्रेन के बिना चर्चा, उठ रहे सवाल
रूस के खिलाफ कुछ प्रतिबंधों को रोकने के ट्रंप के फैसले की काफी आलोचना हो रही है। यूक्रेन के राष्ट्रपति वलोडिमिर जेलेंस्की और यूरोपीय नेताओं को दरकिनार कर यूक्रेन के भविष्य पर चर्चा करने से चिंताएं बढ़ गई हैं। सबसे बड़ी आलोचना यही है कि यूक्रेन की सीधी भागीदारी के बिना होने वाला कोई भी समझौता देश के हितों को नुकसान पहुंचाएगा। दूसरी तरफ, इस बैठक में चीन को शामिल करना बीजिंग के लिए खुद को एक वैश्विक कूटनीतिक ताकत के रूप में पेश करने का बड़ा मौका माना जा रहा है। शी जिनपिंग के सामने एक बड़ी चुनौती है—रूस के साथ अपने रिश्ते बनाए रखना और साथ ही यूरोप के साथ अपने आर्थिक संबंधों को भी बचाना। फिलहाल, इस बात को लेकर अनिश्चितता बनी हुई है कि क्या यह त्रिपक्षीय बैठक वाकई होगी और क्या इससे युद्ध खत्म करने के लिए कोई ठोस रास्ता निकल पाएगा।






