राम मंदिर दान गबन मामले में पुलिस टिन्नू यादव और अनुकल्प मिश्रा की भूमिका की जांच कर रही है। CCTV, ड्यूटी रोस्टर और वित्तीय रिकॉर्ड खंगाले जा रहे हैं।

Ram Mandir Donation Scam: राम मंदिर में दान के कथित गबन की जांच कर रही पुलिस अब इस मामले के दो आरोपियों रमाशंकर उर्फ टिन्नू यादव और अनुकल्प मिश्रा की भूमिका पर खासतौर पर ध्यान दे रही है। जांच एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि क्या दोनों ने इस कथित गबन की योजना बनाने और उसे अंजाम देने में अहम भूमिका निभाई थी। हालांकि, पुलिस ने अभी तक आधिकारिक तौर पर किसी भी आरोपी को इस मामले का मास्टरमाइंड नहीं बताया है। लेकिन जांच से जुड़े अधिकारियों का कहना है कि अब तक की जांच में दोनों की भूमिका काफी महत्वपूर्ण दिखाई दे रही है।

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टिन्नू यादव और अनुकल्प मिश्रा की भूमिका पर जांच तेज

पुलिस के अनुसार, टिन्नू यादव और अनुकल्प मिश्रा श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट से जुड़े वरिष्ठ अधिकारियों के करीबी माने जाते थे। इसी वजह से उन्हें मंदिर के दान प्रबंधन और कैश गिनती की व्यवस्था तक अच्छी पहुंच हासिल थी। जांचकर्ता यह पता लगा रहे हैं कि क्या दोनों ने इस पहुंच का इस्तेमाल दान की गिनती और उसे सुरक्षित रखने की प्रक्रिया में मौजूद कमियों का फायदा उठाने के लिए किया।

दान पेटी की चाबियों को लेकर भी हो रही जांच

जांच में टिन्नू यादव की भूमिका को लेकर भी कई पहलुओं की पड़ताल की जा रही है। पुलिस सूत्रों के मुताबिक, उसके पास मंदिर के दान बॉक्स की चाबियां होने की जिम्मेदारी थी। अधिकारियों का यह भी दावा है कि टिन्नू यादव ने हाल ही में अपने भतीजे मनीष यादव को दान गिनने वाली टीम में शामिल करवाया था। एक जांच अधिकारी के अनुसार, गिनती की प्रक्रिया में करीबी रिश्तेदारों को शामिल करने से ऐसा नेटवर्क तैयार हो सकता था, जिसके जरिए कथित तौर पर गबन की गई रकम को दूसरी जगह पहुंचाना और आपस में बांटना आसान हो जाता। साथ ही, इससे पकड़े जाने का जोखिम भी कम हो सकता था। पुलिस इन दावों की जांच कर रही है।

अनुकल्प मिश्रा की भूमिका भी जांच के घेरे में

पुलिस की जांच अनुकल्प मिश्रा पर भी केंद्रित है। वह आउटसोर्स की गई कैश गिनती टीम का हिस्सा था। जांचकर्ताओं के मुताबिक, आरोप है कि उसने अपने जीजा लवकुश मिश्रा को भी दान गिनने वाली टीम में तैनात कराने में प्रभाव का इस्तेमाल किया था। पुलिस इस दावे की भी जांच कर रही है।

कैसे बढ़ता गया कथित गबन का दायरा?

पुलिस का मानना है कि दान गिनने की प्रक्रिया में शामिल होने के बाद कुछ अन्य आरोपी भी धीरे-धीरे इस कथित गबन का हिस्सा बन गए। जांचकर्ताओं के अनुसार, नए कर्मचारियों ने समय के साथ नकदी को दूसरी जगह भेजने के तरीके सीखे और गिनती, छंटाई तथा सीलिंग की प्रक्रिया के दौरान कथित तौर पर मौका मिलने पर इसमें शामिल होते गए। हालांकि, इन सभी आरोपों की पुष्टि अभी जांच के बाद ही होगी।

CCTV और वित्तीय रिकॉर्ड खंगाल रही पुलिस

पूरे मामले की सच्चाई सामने लाने के लिए पुलिस कई तरह के तकनीकी और दस्तावेजी साक्ष्यों की जांच कर रही है। जांच एजेंसियां CCTV फुटेज, ड्यूटी रोस्टर, वित्तीय रिकॉर्ड और अन्य संबंधित दस्तावेजों की विस्तार से जांच कर रही हैं, ताकि यह पता लगाया जा सके कि कथित गबन की योजना कैसे बनाई गई, इसमें किन-किन लोगों की क्या भूमिका थी और दान की रकम का प्रवाह किस तरह हुआ। फिलहाल, मामले की जांच जारी है और पुलिस सभी पहलुओं की गहराई से पड़ताल कर रही है।