अमेरिका द्वारा जब्त किए रूसी जहाज 'मरीनेरा' में 3 भारतीय समेत कुल 28 लोग
अमेरिकी कोस्टगार्ड ने वेनेजुएला से आ रहे रूस के झंडे वाले टैंकर 'मरीनेरा' को बुधवार को जब्त किया। रिपोर्ट्स के मुताबिक,'मैरीनेरा' में कुल 28 लोगों का क्रू था। इनमें 17 यूक्रेनी नागरिक, 6 जॉर्जियाई नागरिक, 3 भारतीय नागरिक और 2 रूसी नागरिक शामिल हैं।

न्यूज एजेंसी एपी ने अमेरिकी सेना के हवाले से बताया कि बुधवार 7 जनवरी को अमेरिका ने अटलांटिक महासागर में दो हफ्ते से अधिक समय तक पीछा करने के बाद वेनेजुएला से जुड़े एक रूसी झंडे वाले तेल टैंकर को जब्त किया। इस जब्ती के बाद रूस के साथ अमेरिकी तनाव चरम पर पहुंचने की आशंका है।
बता दें कि अमेरिका ने 7 जनवरी को रूसी झंडे वाला पहला तेल टैंकर मरीनेरा को नॉर्थ अटलांटिक में जब्त किया। वहीं, कुछ घंटों बाद ही दूसरे जहाज सोफिया को कैरिबियन सागर में पकड़ा। अपने जहाजों की सुरक्षा के लिए रूस ने सबमरीन और अन्य नौसैनिक जहाज भेजे, लेकिन वे इसे नहीं बचा पाए।
अमेरिका ने जिस रूसी जहाज पर कब्जा किया है, पहले इसका नाम बेला-1 था। अमेरिका ने इसे प्रतिबंधित जहाजों की लिस्ट में डाल दिया था। दिसंबर 2025 में यह वेनेजुएला की ओर जा रहा था, लेकिन अमेरिकी कोस्ट गार्ड तब इसे नहीं पकड़ पाए थे।
अमेरिकी कोस्ट गार्ड के पास इस जहाज को जब्त करने का वारंट था। अमेरिका का आरोप है कि यह जहाज अमेरिकी प्रतिबंधों का खुलेआम उल्लंघन करते हुए ईरानी तेल ढो रहा था। तब यह जहाज गुयाना के झंडे के तहत रजिस्टर्ड था, लेकिन इसके बाद इस जहाज का नाम बदलकर ‘मरीनेरा’ कर दिया गया था।
‘मरीनेरा’ जहाज की लंबाई 333 मीटर और वजन 3.18 लाख टन है। इसका इस्तेमाल लंबी दूरी तक क्रूड ऑयल ट्रांसपोर्ट के लिए किया जाता है। वहीं, सोफिया क्रूड ऑयल टैंकर 336 मीटर लंबा है और इसका वजन 3.19 लाख टन है।
बता दें कि मरीनेरा जहाज वेनेजुएला की ओर जा रहा था, लेकिन अमेरिकन कोस्टगॉर्ड के डर से वो रास्ता बदल अटलांटिक की ओर मुड़ गया। बाद में इस जहाज को पकड़ने में ब्रिटेन ने भी अमेरिका का साथ दिया और अपनी जमीन मुहैया कराई। यानी टैंकर पर कब्जा जमाने के लिए अमेरिकी सेना ने ब्रिटिश हवाई अड्डों का इस्तेमाल किया।

