NEET आंदोलन के बीच अस्पताल का बंद कमरा और सोनम वांगचुक का फूटा गुस्सा! 'डॉक्टर हो या कसाई?' चिल्लाते हुए क्यों मांगी गिरफ्तारी? जानिए परदे के पीछे का सच।
नई दिल्ली: NEET-UG पेपर लीक मामले को लेकर देशव्यापी सुर्खियां बटोरने वाले विख्यात एक्टिविस्ट सोनम वांगचुकका एक बेहद चौंकाने वाला वीडियो सोशल मीडिया पर आग की तरह फैल गया है। दिल्ली के सफ़दरजंग अस्पताल के भीतर रिकॉर्ड किए गए इस वीडियो में 59 वर्षीय वांगचुक बेहद गुस्से और मानसिक तनाव में नजर आ रहे हैं। वह अस्पताल के डॉक्टरों, स्टाफ और सुरक्षा में तैनात दिल्ली पुलिस के अधिकारियों से तीखी बहस कर रहे हैं और खुद को तुरंत रिहा करने या गिरफ्तार करने की मांग कर रहे हैं। आखिर अस्पताल के अंदर ऐसा क्या हुआ कि वांगचुक ने गुस्से में कहा, "मुझे गिरफ़्तार करो... अगर मेरी मौत हुई तो जिम्मेदार आप होंगे।" इस वायरल वीडियो ने अस्पताल प्रशासन और सरकार की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं, जिसके बाद सफदरजंग अस्पताल को आनन-फानन में अपनी सफाई पेश करनी पड़ी है।
'तुम डॉक्टर हो या कसाई?'-जब अस्पताल के कमरे में फूटा वांगचुक का गुस्सा
यह पूरा ड्रामा कथित तौर पर 21 जुलाई, 2026 को अस्पताल के एक वीआईपी वार्ड में घटित हुआ। 18 जुलाई को जंतर-मंतरपर भूख हड़ताल के दौरान तबीयत बिगड़ने के बाद वांगचुक को जबरन सफदरजंग अस्पताल लाया गया था। वायरल वीडियो में वांगचुक खुद को कमरे में बंद किए जाने से बेहद आहत दिख रहे हैं। उन्होंने स्टाफ पर चिल्लाते हुए कहा, "उन्हें कहो कि मुझे गिरफ़्तार करें। मुझे यहाँ क्यों बंधक बनाकर रखा जा रहा है? आप सब मुझे मानसिक रूप से प्रताड़ित कर रहे हैं। अगर इस तनाव की वजह से मेरी मौत हो जाती है, तो इसकी पूरी ज़िम्मेदारी आपकी होगी। प्लीज़ दरवाज़ा खोलो; मैं यहां से जा रहा हूँ। तुम बेशर्म लोग हो।" इतना ही नहीं, गुस्से से लाल वांगचुक ने चिकित्सा बिरादरी पर अपनी आत्मा बेचने का आरोप लगाते हुए कहा, "आप डॉक्टर हैं या कसाई? अपने सीनियर डॉक्टर से पूछिए। मैं यहाँ से शुक्रगुज़ारी के साथ विदा होना चाहता था, लेकिन अफ़सोस कि मुझे यह कहना पड़ रहा है कि यह देश की सबसे घटिया संस्था है।"
वायरल वीडियो में आखिर क्या दिखा?
सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहे वीडियो में सोनम वांगचुक अस्पताल के कमरे से बाहर निकलने की कोशिश करते दिखाई देते हैं। वीडियो में वह बार-बार अस्पताल प्रशासन और पुलिस अधिकारियों से पूछते हैं कि उन्हें आखिर किस आधार पर रोका जा रहा है। नाराजगी जताते हुए उन्होंने कहा कि यदि उन्हें बाहर नहीं जाने देना है तो औपचारिक रूप से गिरफ्तार कर लिया जाए। वीडियो में वांगचुक यह कहते भी सुनाई देते हैं कि उन्हें अस्पताल में कैदी जैसा महसूस हो रहा है और उन पर अनावश्यक दबाव बनाया जा रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि लगातार तनाव में रखने से उनकी सेहत पर गंभीर असर पड़ सकता है।
'क्या आपको बदतमीजी का आदेश मिला है?'-पत्नी गीतांजलि ने पुलिस को घेरा
इस हाई-वोल्टेज ड्रामे के दौरान सोनम वांगचुक की पत्नी गीतांजलि आंग्मो भी वहां मौजूद थीं, जो अस्पताल के बाहर वांगचुक के 'कॉकरोच जनता पार्टी' (CJP) अभियान को लीड कर रही थीं। वीडियो में गीतांजलि भी वहां तैनात भारी पुलिस बल और उनके अड़ियल रवैये पर भड़कती नजर आ रही हैं। उन्होंने एक पुलिस अधिकारी को टोकते हुए कहा, "आप हमारे साथ बदतमीज़ी कर रहे हैं... क्या आपको ऊपर से इतना अहंकारी और क्रूर व्यवहार करने का विशेष आदेश मिला है?" इसके ठीक बाद वीडियो में देखा जा सकता है कि वांगचुक सुरक्षा घेरे को दरकिनार कर जबरन कमरे से बाहर निकलने की कोशिश करते हैं।
सफदरजंग अस्पताल की दलील: 'नो-वीडियोग्राफी ज़ोन' में रची गई साजिश?
वीडियो के वायरल होते ही चौतरफा घिरेसफदरजंग अस्पताल प्रशासन ने शनिवार को आधिकारिक बयान जारी कर सफाई दी है। अस्पताल का कहना है कि यह वीडियो उनके परिसर के भीतर एक प्रतिबंधित 'नो-वीडियोग्राफी ज़ोन' में वांगचुक के ही सहयोगियों द्वारा गुप्त रूप से रिकॉर्ड किया गया था। अस्पताल के मुताबिक, 21 जुलाई को दिल्ली हाई कोर्ट ने वांगचुक को उनकी पसंद के अस्पताल (मेदांता) में शिफ्ट करने का आदेश दिया था। अस्पताल ने दलील दी, "जिस समय यह वीडियो रिकॉर्ड हुआ, उस समय तक प्रशासन के पास कोर्ट का लिखित आदेश नहीं पहुंचा था। वांगचुक केवल मीडिया की खबरों के आधार पर तुरंत बाहर जाने की ज़िद कर रहे थे। जैसे ही शाम 6:40 बजे कोर्ट का आधिकारिक ऑर्डर मिला, हमने तुरंत उन्हें मेदांता गुरुग्राम के डॉक्टरों की टीम को सौंप दिया।"
26 दिन का अनशन और आधी रात का वो गुप्त समझौता
गौरतलब है कि नीट-यूजी पेपर लीक के खिलाफ 26 दिनों से भूख हड़ताल पर बैठे सोनम वांगचुक ने आरोप लगाया था कि सफदरजंग अस्पताल में उनके साथ किसी कैदी जैसा व्यवहार किया जा रहा था। हालांकि, गुरुवार देर रात मेदांता अस्पताल में सरकार से मिले लिखित आश्वासनों के बाद उन्होंने अपना अनशन समाप्त कर दिया। सरकार ने आश्वासन दिया है कि परीक्षा सुधारों पर संसद में खुली चर्चा होगी, पीड़ित छात्रों के परिवारों को मुआवजा दिया जाएगा और शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारियों के खिलाफ दर्ज एफआईआर वापस ली जाएंगी। लेकिन सफदरजंग अस्पताल के इस वीडियो ने यह साफ कर दिया है कि इस समझौते के पीछे कितनी बड़ी तनातनी चल रही थी।


