यमन की मिसाइलों से सऊदी अरब में हड़कंप मच गया। अरामको से जुड़ी तेल सुविधा निशाने पर, जिजान में धमाके और बिजली गुल। क्या लाल सागर से शुरू होगा मध्य पूर्व का नया युद्ध?
रियाद/सना:मिडिल ईस्ट (Middle East) एक बार फिर से बारूद के ढेर पर बैठ गया है। यमन की ओर से सऊदी अरब पर एक के बाद एक कई भीषण मिसाइल और घातक ड्रोन हमले किए गए हैं। इन हमलों से न सिर्फ सऊदी अरब का जिजान औद्योगिक शहर दहल उठा, बल्कि दुनिया की सबसे बड़ी तेल कंपनी अरामको की एक अहम तेल सुविधा को भी सीधे तौर पर निशाना बनाया गया है। इस हमले के बाद पूरे क्षेत्र में हड़कंप मच गया है और वैश्विक स्तर पर कच्चे तेल की सप्लाई को लेकर चिंता की लकीरें खिंच गई हैं। दोनों मुल्कों के बीच पिछले कुछ समय से चली आ रही अनौपचारिक शांति अब पूरी तरह से टूट चुकी है।
क्या दुनिया की सबसे बड़ी तेल कंपनी फिर बनी निशाना?
हमलों के बाद सबसे बड़ी चिंता इस बात को लेकर सामने आई कि दुनिया की सबसे बड़ी तेल कंपनी Saudi Aramco से जुड़ी एक तेल सुविधा को निशाना बनाया गया। हालांकि नुकसान की आधिकारिक पुष्टि अभी नहीं हुई है, लेकिन क्षेत्रीय सूत्रों का दावा है कि मिसाइल और ड्रोन हमलों का उद्देश्य ऊर्जा ढांचे को प्रभावित करना था। अरामको वैश्विक तेल आपूर्ति की सबसे महत्वपूर्ण कंपनियों में गिनी जाती है। ऐसे में यदि उसकी उत्पादन या निर्यात क्षमता प्रभावित होती है तो इसका असर अंतरराष्ट्रीय कच्चे तेल की कीमतों और वैश्विक बाजार पर भी पड़ सकता है।

धमाकों से दहला जिजान: आधी रात को आसमान से बरसा बारूद
सऊदी अरब के जिजान शहर के आसमान में अचानक रात के अंधेरे को चीरती हुई मिसाइलें और आत्मघाती ड्रोन दिखाई दिए। इससे पहले कि सऊदी अरब का एयर डिफेंस सिस्टम पूरी तरह सक्रिय हो पाता, जिजान औद्योगिक शहर की एक बेहद महत्वपूर्ण रणनीतिक सुविधा पर जोरदार धमाके हुए। अरब सूत्रों से मिल रही खबरों के मुताबिक, यमन के हूती लड़ाकों ने बेहद सटीक निशाना साधते हुए तेल क्षेत्र की दिग्गज कंपनी अरामको से जुड़ी एक प्रमुख तेल सुविधा को निशाना बनाया। धमाके इतने जोरदार थे कि आसपास के कई इलाकों की धरती कांप उठी और आसमान में आग की लपटें देखी गईं।
अंधेरे में डूबा शहर: यानबू प्रांत में जारी हुआ 'इमरजेंसी अलर्ट'
इस भीषण हमले का असर केवल औद्योगिक नुकसान तक ही सीमित नहीं रहा। मिसाइल और ड्रोन स्ट्राइक के तुरंत बाद सऊदी अरब के कई रिहायशी और कमर्शियल इलाकों में बिजली गुल हो गई। पूरा इलाका अचानक अंधेरे के आगोश में समा गया। यमनी जवाबी हमलों ने न केवल जिजान बल्कि यानबू और दमाद जैसे प्रमुख इलाकों को भी बुरी तरह प्रभावित किया है। बिगड़ते हालातों को देखते हुए सऊदी सिविल डिफेंस ने तुरंत एक्शन लिया और यानबू प्रांत के लिए नेशनल अर्ली वार्निंग प्लेटफॉर्म पर आपातकालीन अलर्ट (Emergency Alert) जारी कर दिया है। नागरिकों से सुरक्षित स्थानों पर रहने की अपील की जा रही है।
टूटी दो साल पुरानी शांति: होदेइदा पर सऊदी के हमले का 'खूनी प्रतिशोध'
यह अचानक भड़का हमला कोई इत्तेफाक नहीं है, बल्कि पिछले कुछ दिनों से सुलग रही आग का नतीजा है। दरअसल, शुक्रवार देर रात सऊदी अरब ने यमन के हूती नियंत्रित शहर होदेइदा पर ताबड़तोड़ हवाई हमले किए थे। इन हमलों में होदेइदा के दूरसंचार प्राधिकरण की सुविधाओं और कमरान द्वीप को निशाना बनाया गया था। इसके बाद हूती के विदेश मंत्रालय ने खुलेआम चेतावनी दी थी कि सऊदी अरब को इस हिमाकत की भारी कीमत चुकानी होगी। दो साल यानी 2022 से चली आ रही अनौपचारिक शांति को तोड़ते हुए हूतियों ने इस खूनी प्रतिशोध को अंजाम दे दिया है।

लाल सागर में नाकेबंदी: वैश्विक व्यापार पर मंडराया बड़ा खतरा
तनाव की शुरुआत तब हुई जब बुधवार को हूती समूह ने लाल सागर (Red Sea) में जा रहे सऊदी अरब के तेल टैंकरों पर ड्रोन और मिसाइलों से हमला कर दिया, जिससे कम से कम एक विशाल जहाज बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो गया। हूती का दावा है कि यह कार्रवाई उन्होंने 20 जुलाई को घोषित की गई नाकेबंदी के तहत की है, जो सना हवाई अड्डे पर हुए हमले का करारा जवाब थी। अब लाल सागर जैसे महत्वपूर्ण अंतरराष्ट्रीय जलमार्ग पर युद्ध के बादल मंडराने से वैश्विक व्यापार और शिपिंग रूट को लेकर पूरी दुनिया की चिंताएं चरम पर पहुंच गई हैं। अमेरिका और ईरान के बीच चल रहे छद्म युद्ध (Proxy War) ने इस आग में घी डालने का काम किया है।
हूती की चेतावनी के बाद आया जवाबी हमला?
यह हमला ऐसे समय हुआ है जब कुछ ही समय पहले सऊदी अरब ने यमन के हूती नियंत्रित होदेइदा क्षेत्र में सैन्य कार्रवाई की थी। हूती से जुड़े मीडिया ने दावा किया था कि उन हमलों में दूरसंचार सुविधाओं और कमरान द्वीप के कुछ इलाकों को निशाना बनाया गया, जिसमें एक महिला घायल हुई थी। हमले के बाद हूती नेतृत्व ने चेतावनी दी थी कि सऊदी अरब को इसकी "भारी कीमत" चुकानी पड़ेगी। अब ताजा मिसाइल और ड्रोन हमलों को उसी चेतावनी के जवाब के रूप में देखा जा रहा है।


