Sonia Gandhi Interview: कांग्रेस नेता सोनिया गांधी ने बीजेपी पर भारत की लोकतांत्रिक संस्थाओं को नुकसान पहुंचाने का आरोप लगाया है। उन्होंने अपनी किताब 'बिलोंगिंग: ए जर्नी ऑफ लव' का भी जिक्र किया और 1975 की इमरजेंसी के दिनों को भी याद किया।
Indian Democracy: कांग्रेस संसदीय दल (CPP) की चेयरपर्सन सोनिया गांधी ने केंद्र की सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी (BJP) पर निशाना साधते हुए देश की लोकतांत्रिक व्यवस्था को लेकर गंभीर सवाल उठाए हैं। 'द हिंदू' को दिए एक इंटरव्यू में उन्होंने आरोप लगाया कि पिछले 12 सालों में देश के लोकतांत्रिक ताने-बाने और संवैधानिक संस्थाओं को काफी नुकसान पहुंचा है। सोनिया गांधी ने उम्मीद जताई कि देश की जनता लोकतंत्र को फिर से मजबूत करने और बेहतर शासन की वापसी का रास्ता चुनेगी।
उन्होंने कहा कि लोग अब देश की व्यवस्था को हुए नुकसान को समझने लगे हैं और उनमें बेचैनी बढ़ रही है। सोनिया के मुताबिक, मौजूदा सरकार के जाने के बाद भी लोकतांत्रिक संस्थाओं और व्यवस्था को दोबारा मजबूत करने में समय लगेगा। इसके लिए राजनीतिक दलों को काफी मेहनत करनी होगी।
'लोकतांत्रिक संस्थाओं को पहुंचा भारी नुकसान'
सोनिया गांधी ने इंटरव्यू में कहा कि पिछले 12 वर्षों में देश के लोकतंत्र, सामाजिक ताने-बाने और संस्थाओं को गहरी चोट पहुंची है। उन्होंने कहा कि लोग अब इस नुकसान को पहचानने लगे हैं। उन्हें उम्मीद है कि भारतीय मतदाता लोकतंत्र को मजबूत करने और सही शासन की वापसी का स्वागत करेंगे।
सोनिया गांधी ने यह भी कहा कि सरकार बदलने के बाद व्यवस्था को पहले जैसा बनाने की प्रक्रिया आसान नहीं होगी। इसके लिए लंबे समय तक प्रयास करने पड़ेंगे।
इमरजेंसी पर क्या बोलीं सोनिया गांधी?
साल 1975 में तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी की ओर से लगाई गई इमरजेंसी पर भी सोनिया गांधी ने अपनी बात रखी। उन्होंने कहा कि इमरजेंसी के 21 महीनों के दौरान लोकतांत्रिक अधिकारों में कटौती हुई थी। हालांकि, उन्होंने यह भी कहा कि इंदिरा गांधी ने बाद में हालात को समझते हुए मार्च 1977 में लोकसभा चुनाव कराने का फैसला लिया था।
सोनिया ने उस दौर के हालात का जिक्र करते हुए कहा कि देश में हिंसक प्रदर्शन हो रहे थे, सरकारी दफ्तरों और सार्वजनिक परिवहन को आग के हवाले किया जा रहा था। हर तरफ अशांति का माहौल था। उन्होंने कहा कि उस समय इंदिरा गांधी बिगड़ते हालात से निपटने के लिए संघर्ष कर रही थीं।
उन्होंने यह भी कहा कि इमरजेंसी के दौरान लोकतांत्रिक अधिकार सीमित किए गए थे, लेकिन यह सब संवैधानिक प्रक्रिया के तहत हुआ था। सोनिया के मुताबिक, इंदिरा गांधी ने बाद में सार्वजनिक रूप से उस दौर की ज्यादतियों पर खेद भी जताया था।
नई किताब में राजीव गांधी के साथ प्रेम कहानी का जिक्र
सोनिया गांधी ने अपने इंटरव्यू में अपनी नई किताब 'बिलोंगिंग: ए जर्नी ऑफ लव' (Belonging: A Journey of Love) के बारे में भी बात की। यह किताब उनके निजी जीवन, भारत आने के अनुभव और पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी के साथ उनके रिश्ते के इर्द-गिर्द बुनी गई है।
सोनिया गांधी ने बताया कि यह सिर्फ दो लोगों की प्रेम कहानी नहीं है, बल्कि इसमें उस सफर का भी जिक्र है, जिसके दौरान उन्होंने राजीव गांधी के परिवार और भारत को अपना माना। उन्होंने बताया कि किस तरह यही जुड़ाव आगे चलकर उन्हें सार्वजनिक जीवन और राजनीति में लेकर आया।
उन्होंने कहा कि लंबे समय तक उन्हें अपने निजी जीवन के बारे में लिखने की इच्छा नहीं थी, लेकिन बाद में उन्हें लगा कि यह कहानी साझा करना जरूरी है। जब उन्होंने देखा कि राजीव गांधी के बलिदानों का उद्देश्य खतरे में है और कांग्रेस पार्टी कमजोर हो रही है, तो उन्हें लगा कि उन्हें आगे आकर कुछ करना चाहिए।
इस किताब में सोनिया गांधी के इटली में बिताए बचपन, भारत आने, व्यक्तिगत जीवन के उतार-चढ़ाव और भारत के साथ उनके भावनात्मक जुड़ाव को भी जगह दी गई है।












