जोहान्सबर्ग ‘जंपर्स’ बस्ती में गोलीबारी, 12 की मौत, 9 घायल। सफेद टोयोटा क्वांटम से आए हमलावर, दो रास्तों से घुसकर हमला। 10+ संदिग्ध फरार, पुलिस जांच जारी, वजह अब तक अज्ञात। क्या यह गैंगवार था या सुनियोजित नरसंहार? इतने हमलावर कैसे भाग निकले?
जोहान्सबर्ग: दक्षिण अफ्रीका की आर्थिक राजधानी जोहान्सबर्ग एक बार फिर सामूहिक नरसंहार की खौफनाक वारदात से दहल उठी है। मंगलवार की शाम जब लोग अपने घरों में आराम कर रहे थे, तभी अचानक गोलियों की तड़तड़ाहट और चीख-पुकार ने पूरी फिजा को मातम में बदल दिया। जोहान्सबर्ग के पूर्वी इलाके में स्थित क्लीवलैंड की एक अनौपचारिक बस्ती (स्लम एरिया) में अज्ञात भारी हथियारों से लैस बंदूकधारियों ने अंधाधुंध फायरिंग कर कम से कम 12 लोगों को मौत के घाट उतार दिया, जबकि 9 अन्य लोग इस हमले में गंभीर रूप से घायल हो गए हैं। बुधवार सुबह पुलिस द्वारा जारी किए गए आधिकारिक बयान के बाद पूरे देश में सनसनी फैल गई है।

सफेद टोयोटा क्वांटम का वो रहस्यमयी दस्ता... दो रास्तों से चक्रव्यूह की तरह घेरा!
इस रूह कंपा देने वाले हत्याकांड का तरीका किसी सोची-समझी सैन्य कार्रवाई या गैंगवार की तरह था, जिसने पुलिस के भी होश उड़ा दिए हैं। चश्मदीदों और पुलिसिया तफ्तीश के मुताबिक, हमलावर एक सफेद रंग की टोयोटा क्वांटम (Toyota Quantum) गाड़ी में सवार होकर आए थे। उन्होंने 'जंपर्स' (Jumpers) नामक इस अनौपचारिक बस्ती को निशाना बनाने के लिए एक बेहद खतरनाक योजना बनाई थी।

दहशतगर्द एक साथ दो अलग-अलग रास्तों से बस्ती के भीतर दाखिल हुए, ताकि कोई भी शख्स जान बचाकर भाग न सके। इसके बाद उन्होंने बस्ती के अलग-अलग कोनों और संकरी गलियों में जो कोई भी सामने आया, उस पर गोलियों की बौछार कर दी। कई जगहों पर एक साथ हुई इस ताबड़तोड़ फायरिंग के बाद हमलावर उसी सफेद गाड़ी में सवार होकर हवा की रफ्तार से गायब हो गए।
'जंपर्स' बस्ती में बिछ गईं लाशें: चीख-पुकार के बीच क्यों खामोश है प्रशासन?
हमले के तुरंत बाद जंपर्स अनौपचारिक बस्ती का नजारा किसी युद्ध क्षेत्र जैसा तब्दील हो चुका था। चारों तरफ खून से लथपथ शव बिखरे पड़े थे और अपनों को खो चुके लोगों की चीखें गूंज रही थीं। आनन-फानन में स्थानीय लोगों और आपातकालीन सेवाओं की मदद से घायलों को नजदीकी अस्पतालों में भर्ती कराया गया, जहां 9 लोगों की हालत बेहद नाजुक बनी हुई है। डॉक्टरों के मुताबिक, मरने वालों का आंकड़ा अभी और बढ़ सकता है। लेकिन इस पूरे हत्याकांड के पीछे सबसे बड़ा सस्पेंस यह है कि इतनी बड़ी वारदात को अंजाम देने के पीछे हमलावरों का मकसद क्या था? पुलिस और खुफिया एजेंसियां अब तक हमले की असली वजह का पता लगाने में पूरी तरह नाकाम साबित हुई हैं, जिसने स्थानीय निवासियों के भीतर असुरक्षा और गुस्से को और ज्यादा भड़का दिया है।

10 से ज्यादा संदिग्धों की तलाश: जोहान्सबर्ग पुलिस का 'मेगा हंट' ऑपरेशन शुरू
इस सामूहिक हत्याकांड के बाद दक्षिण अफ़्रीकी सुरक्षा घेरे में हड़कंप मच गया है। पुलिस ने तत्काल कार्रवाई करते हुए पूरे इलाके को छावनी में तब्दील कर दिया है। पुलिस मुख्यालय द्वारा जारी बयान के मुताबिक, इस खूनी खेल को अंजाम देने वाले 10 से अधिक संदिग्ध शूटरों की पहचान करने और उन्हें दबोचने के लिए एक बड़े पैमाने पर 'मैनहंट' (खोजी अभियान) शुरू किया गया है। फॉरेंसिक टीमें और बैलिस्टिक एक्सपर्ट्स घटना स्थल से सबूत जुटाने में लगे हैं, लेकिन हमलावरों का सुराग न मिलना पुलिस प्रशासन की मुस्तैदी पर गहरे सवाल खड़े कर रहा है।
रोजाना 60 हत्याएं! क्या 'मर्डर कैपिटल' बनता जा रहा है दक्षिण अफ्रीका?
यह दिल दहला देने वाली घटना कोई पहली बार नहीं हुई है। यह नरसंहार दक्षिण अफ्रीका के उस कड़वे और खौफनाक सच को उजागर करता है, जिससे पूरी दुनिया वाकिफ है। दक्षिण अफ्रीका में हत्या की दर (Homicide Rate) दुनिया में सबसे ऊंचे और खतरनाक स्तर पर बनी हुई है। आधिकारिक आंकड़ों के मुताबिक, इस देश में हर दिन औसतन 60 लोगों की हत्या कर दी जाती है। अवैध हथियारों की भरमार, अनौपचारिक बस्तियों में बुनियादी सुरक्षा का अभाव और ड्रग्स व गैंगवार के बढ़ते सिंडिकेट ने जोहान्सबर्ग को बारूद के ढेर पर लाकर खड़ा कर दिया है। जंपर्स बस्ती का यह खूनी खेल क्या किसी आपसी रंजिश का नतीजा था या किसी बड़े गैंग का खौफ पैदा करने का जरिया? यह सस्पेंस अब भी बरकरार है और लोग खौफ के साये में जीने को मजबूर हैं।


