Donald Trump South Korea: डोनाल्ड ट्रंप के दबाव के बाद दक्षिण कोरिया होर्मुज जलडमरूमध्य में तैनाती पर विचार कर रहा है. मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक इस साल के अंत तक P-8 विमान, EOD दल और लॉजिस्टिक्स जहाज भेजे जा सकते हैं. अंतिम फैसला लंबित है और NSC, कैबिनेट व संसद की मंजूरी जरूरी होगी.

South Korea Hormuz Strait Deployment: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के लगातार दबाव और सार्वजनिक नाराजगी के बीच दक्षिण कोरिया ने होर्मुज जलडमरूमध्य में सैन्य संसाधनों की संभावित तैनाती पर विचार तेज कर दिया है। रिपोर्टों के मुताबिक, सियोल पहले जहां ईरान युद्ध खत्म होने के बाद ही किसी सैन्य सहायता पर विचार करने की बात कह रहा था, वहीं अब साल के अंत तक क्षेत्र में नौसैनिक संसाधन भेजने की संभावना पर चर्चा हो रही है।

हालांकि, सरकार की ओर से अभी तक तैनाती को लेकर कोई अंतिम फैसला नहीं लिया गया है। प्रस्ताव फिलहाल शुरुआती विचार-विमर्श के स्तर पर बताया जा रहा है। किसी भी सैन्य तैनाती से पहले दक्षिण कोरिया में निर्धारित मंजूरी प्रक्रिया पूरी करनी होगी।

Trump के दबाव के बीच क्यों बदला रुख?

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप कई मौकों पर दक्षिण कोरिया को लेकर अपनी नाराजगी जाहिर कर चुके हैं। उनका आरोप रहा है कि सियोल ने ईरान के खिलाफ अमेरिका के अभियान में पर्याप्त सहयोग नहीं किया।

अगस्त में ट्रंप ने दक्षिण कोरिया के साथ संयुक्त सैन्य अभ्यास कम करने की बात कही थी। इसके बाद अमेरिकी सेना ने एक सैन्य अभ्यास समाप्त कर दिया। ट्रंप की टिप्पणियों में ईरान युद्ध के दौरान दक्षिण कोरिया की गैर-भागीदारी को भी इस तनाव से जोड़कर देखा गया।

इसके अलावा, उत्तर कोरिया के नेता किम जोंग उन को लेकर ट्रंप की अचानक सकारात्मक टिप्पणी ने भी सियोल में रणनीतिक चिंताओं को बढ़ाया है। ऐसे माहौल में दक्षिण कोरिया के लिए अमेरिका के साथ अपने सुरक्षा संबंधों को संतुलित रखना एक अहम चुनौती बन गया है।

Hormuz में क्या भेज सकता है South Korea?

रिपोर्टों के अनुसार, दक्षिण कोरिया संभावित तैनाती के तहत P-8 निगरानी विमान भेजने पर विचार कर रहा है। यह विमान समुद्री क्षेत्र में जहाजों और पनडुब्बियों की गतिविधियों पर निगरानी रखने में सक्षम है।

इसके साथ दक्षिण कोरियाई नौसेना की एक विशेष टीम के EOD (Explosive Ordnance Disposal) दल को भी भेजे जाने की संभावना बताई जा रही है। यह टीम विस्फोटक और खतरनाक आयुध से निपटने के लिए प्रशिक्षित होती है।

एक लॉजिस्टिक्स जहाज की तैनाती का विकल्प भी विचाराधीन बताया जा रहा है। इसका इस्तेमाल तैनात विमान और सैन्य दल को जरूरी आपूर्ति तथा अन्य लॉजिस्टिक सहायता उपलब्ध कराने के लिए किया जा सकता है। इस तरह संभावित मिशन केवल निगरानी तक सीमित नहीं रह सकता, बल्कि क्षेत्र में सक्रिय अन्य देशों के अभियानों के साथ समन्वय का हिस्सा भी बन सकता है।

तैनाती के लिए संसद की मंजूरी जरूरी

अगर दक्षिण कोरियाई सरकार सैन्य तैनाती को मंजूरी देती है, तो इसके लिए औपचारिक प्रक्रिया से गुजरना होगा। प्रस्ताव को पहले National Security Council (NSC) के स्तर पर मंजूरी मिलनी होगी। इसके बाद कैबिनेट की स्वीकृति और फिर संसद की सहमति आवश्यक होगी। दक्षिण कोरियाई मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, इस मुद्दे से जुड़ा प्रस्ताव इसी महीने संसद में लाया जा सकता है। हालांकि, अभी इसे अंतिम निर्णय नहीं माना जा रहा है।

खास बात यह है कि दक्षिण कोरिया का शुरुआती रुख ईरान युद्ध समाप्त होने के बाद ही सैन्य मदद पर विचार करने का था। अब Hormuz में संभावित तैनाती पर चर्चा इस नीति में बदलाव का संकेत मानी जा रही है।

राष्ट्रपति कार्यालय ने क्या कहा?

दक्षिण कोरिया के राष्ट्रपति कार्यालय ने सैन्य तैनाती को लेकर चल रही अटकलों पर सावधानी बरती है। कार्यालय की ओर से संकेत दिया गया है कि सरकार ने अभी किसी अंतिम तैनाती का फैसला नहीं किया है। इससे साफ है कि मामला फिलहाल सुरक्षा, कूटनीति और घरेलू राजनीति—तीनों पहलुओं पर विचार के चरण में है। सरकार को एक तरफ अमेरिका के साथ अपने रणनीतिक संबंधों को संतुलित करना है, तो दूसरी तरफ ईरान और व्यापक मध्य पूर्व संकट में सीधे सैन्य रूप से शामिल होने के जोखिमों पर भी विचार करना होगा।

आगे क्या होगा?

आने वाले दिनों में इस मुद्दे पर सरकार, सुरक्षा परिषद, कैबिनेट और संसद के स्तर पर चर्चा महत्वपूर्ण होगी। यदि तैनाती को मंजूरी मिलती है, तो Hormuz क्षेत्र में दक्षिण कोरिया की भूमिका मुख्य रूप से निगरानी, सुरक्षा और लॉजिस्टिक सहायता पर केंद्रित हो सकती है। फिलहाल अंतिम फैसला बाकी है। इसलिए दक्षिण कोरिया की संभावित सैन्य तैनाती को लेकर सामने आ रही रिपोर्टों को प्रस्ताव और विचार-विमर्श के स्तर पर ही देखा जाना चाहिए।