स्पेसएक्स के फाल्कन 9 रॉकेट का 4 टन का टुकड़ा चांद से टकराएगा। इससे धरती को कोई खतरा नहीं है, लेकिन चांद पर करीब 18 मीटर चौड़ा एक नया गड्ढा बनेगा। वैज्ञानिकों के लिए यह घटना रिसर्च का एक बेहतरीन मौका है।
वॉशिंगटन: पिछले एक साल से अंतरिक्ष में तैर रहा स्पेसएक्स (SpaceX) के एक रॉकेट का 4 टन का टुकड़ा बुधवार को तेज रफ्तार से चांद की सतह से टकराएगा। इस टक्कर से धरती को तो कोई खतरा नहीं है, लेकिन चांद पर एक नया गड्ढा (Crater) जरूर बन जाएगा। वैज्ञानिकों के लिए यह घटना रिसर्च का एक बेहतरीन मौका है। स्कूल बस के आकार की इस चीज़ की पहचान स्पेसएक्स के 'फाल्कन 9' (Falcon 9) रॉकेट के दूसरे स्टेज के तौर पर हुई है। रिपोर्ट के मुताबिक, यह रॉकेट जनवरी 2025 में 'फायरफ्लाई एयरोस्पेस' (Firefly Aerospace) का लूनार लैंडर चांद पर ले गया था।
यूरोपीय समय के मुताबिक सुबह 6:35 बजे (भारतीय समय के अनुसार दोपहर 12:05 बजे) यह रॉकेट का हिस्सा करीब 5,400 मील प्रति घंटे (8,690 किलोमीटर प्रति घंटे) की रफ्तार से चांद से टकराएगा। इस टक्कर से चांद की धूल हवा में उड़ेगी, जो सूरज की रोशनी में चमक सकती है, लेकिन इसे धरती से नंगी आंखों से देखना मुश्किल होगा।
18 मीटर चौड़ा गड्ढा बनेगा
नासा (NASA) के मुताबिक, इस टक्कर से चांद पर करीब 60 फीट (18 मीटर) चौड़ा और 12 फीट (4 मीटर) गहरा गड्ढा बन सकता है। इससे पत्थर और धूल के कण बाहर निकलेंगे। उम्मीद है कि यह टुकड़ा चांद के पश्चिमी किनारे पर मौजूद 'आइंस्टीन क्रेटर' (Einstein crater) के पास टकराएगा। धरती से इस इलाके को देख पाना थोड़ा मुश्किल है।
हालांकि, नासा ने इस घटना से पहले और बाद की तस्वीरें लेने की योजना बनाई है। नासा का कहना है कि इससे मिले डेटा से "इंसानों द्वारा की गई टक्करों को बेहतर ढंग से समझने और अंतरिक्ष खोज के अगले कदमों में मदद मिलेगी।" नासा के वैज्ञानिक जिमी रसेल ने कहा, "इस घटना से धरती को कोई खतरा नहीं है। नासा के वैज्ञानिक चांद का डेटा इकट्ठा करने और अंतरिक्ष में मौजूद चीजों को ट्रैक करने की तकनीक को बेहतर बनाने की योजना बना रहे हैं।"
चांद की तरफ कैसे मुड़ा रास्ता?
आमतौर पर रॉकेट के ऐसे हिस्से (Stages) अपना मिशन पूरा करने के बाद धरती के वायुमंडल में लौटकर जल जाते हैं या समुद्र में गिर जाते हैं। लेकिन, जनवरी के इस मून मिशन में ज्यादा ईंधन और थ्रस्ट की जरूरत थी, इसलिए रॉकेट का यह दूसरा हिस्सा अंतरिक्ष में ही रह गया। यह हजारों दूसरे अंतरिक्ष कबाड़ (Space Junk) के बीच बिना किसी तय रास्ते के तैर रहा था। अंतरिक्ष वैज्ञानिकों ने इस साल की शुरुआत में पता लगाया कि सूरज की रेडिएशन और गुरुत्वाकर्षण के खिंचाव के कारण यह बेकाबू टुकड़ा चांद की ओर बढ़ रहा है।
स्पेसएक्स के नासा साइंस और ड्रैगन प्रोग्राम की डायरेक्टर जुलियाना शीमैन ने बताया कि सूरज की गतिविधियां और गुरुत्वाकर्षण बल मिलकर इसे चांद की ओर जाने वाले रास्ते पर धकेल रहे हैं। एस्ट्रोनॉमी सॉफ्टवेयर के एक्सपर्ट बिल ग्रे ने कहा कि हालांकि इससे कोई खतरा नहीं है, लेकिन यह इस बात का सबूत है कि अंतरिक्ष में उपकरणों को कितनी गैर-जिम्मेदारी से छोड़ दिया जाता है।
चांद पर पहले भी हुई हैं टक्करें
चांद पर अंतरिक्ष का कचरा गिरना कोई नई बात नहीं है, लेकिन यह दुर्लभ है। मार्च 2022 में चीन के एक रॉकेट का टुकड़ा चांद से टकराया था। 2009 में, नासा ने खुद जानबूझकर एक रॉकेट स्टेज को चांद से टकराया था ताकि वहां की धूल के सैंपल का अध्ययन किया जा सके। पिछले कुछ सालों में सुरक्षित लैंडिंग की कोशिश में क्रैश हुए स्पेसक्राफ्ट में रूस का 'लूना-25' (2023), भारत का 'चंद्रयान-2' (2019) और इजरायल का 'बेरेशीट' (2019) शामिल हैं।
भविष्य में इस तरह की अनचाही टक्करों को रोकने के लिए नासा और स्पेसएक्स मिलकर चर्चा कर रहे हैं। इस बीच, एक पब्लिक कंपनी बनने के बाद स्पेसएक्स ने अपनी पहली तिमाही रिपोर्ट जारी की है, जिसमें उसने वॉल स्ट्रीट के अनुमान से कम घाटा और ज्यादा रेवेन्यू दर्ज किया है। हालांकि, निवेशकों के भरोसे में कमी के कारण कंपनी के शेयरों में गिरावट देखी गई।
