आंध्र प्रदेश के श्री सिटी में बॉयलर विस्फोट में 5 कर्मचारियों की मौत के बाद Tablets (India) Limited ने सफाई दी। कंपनी ने कहा कि हादसे वाली फैक्ट्री उसकी नहीं और TIL Healthcare अलग कंपनी है।
आंध्र प्रदेश के श्री सिटी में फार्मास्युटिकल फैक्ट्री में हुए जानलेवा बॉयलर विस्फोट के बाद कंपनी के नाम को लेकर पैदा हुआ भ्रम अब साफ हो गया है। Tablets (India) Limited ने स्पष्ट किया है कि जिस यूनिट में 3 अक्टूबर को धमाका हुआ, वह उसकी फैक्ट्री नहीं है। कंपनी ने कहा कि उसका श्री सिटी में कोई मैन्युफैक्चरिंग प्लांट नहीं है।
हादसे में 5 कर्मचारियों की मौत
श्री सिटी के स्पेशल इकोनॉमिक जोन में TIL Healthcare Private Limited की फैक्ट्री में 3 अक्टूबर को बॉयलर विस्फोट हुआ था। हादसे में पांच कर्मचारियों की मौत की खबर है, जबकि 10 से अधिक लोग घायल बताए गए हैं। गंभीर रूप से घायलों में कुछ की इलाज के दौरान मौत हुई, जिसके बाद मृतकों की संख्या बढ़ी।
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‘Tablets India’ नाम से क्यों हुआ कन्फ्यूजन?
शुरुआती रिपोर्टों में श्री सिटी की फैक्ट्री को कहीं-कहीं ‘Tablets India’ या ‘Tablets India Limited Healthcare’ यूनिट के तौर पर संदर्भित किया गया। नामों में समानता के कारण यह भ्रम पैदा हुआ कि हादसे वाली फैक्ट्री Tablets (India) Limited की है। कंपनी ने अब इस दावे को स्पष्ट रूप से खारिज किया है।
दोनों कंपनियां अलग-अलग, कोई साझा प्रबंधन नहीं
Tablets (India) Limited ने कहा है कि TIL Healthcare Private Limited और Tablets (India) Limited अलग और स्वतंत्र कंपनियां हैं। कंपनी के मुताबिक, दोनों के बीच न तो साझा स्वामित्व है और न ही साझा प्रबंधन। Tablets (India) ने यह भी स्पष्ट किया कि श्री सिटी में उसकी कोई फैक्ट्री या मैन्युफैक्चरिंग सुविधा मौजूद नहीं है। कंपनी ने हादसे में जान गंवाने वाले कर्मचारियों के परिवारों के प्रति संवेदना भी जताई और मीडिया से दोनों कंपनियों के बीच अंतर स्पष्ट रखने की अपील की।
बॉयलर ब्लास्ट की जांच जारी
हादसे के बाद आंध्र प्रदेश सरकार ने मामले की उच्चस्तरीय जांच के आदेश दिए हैं। सुरक्षा मानकों में संभावित चूक और विस्फोट की वजह का पता लगाया जा रहा है। रिपोर्टों के मुताबिक, एक बॉयलर इंस्पेक्टर को भी निलंबित किया गया है। प्रारंभिक रिपोर्ट में पानी की कमी को बॉयलर फेल होने की संभावित वजह बताया गया है, हालांकि अंतिम कारण जांच पूरी होने के बाद ही स्पष्ट होगा। फिलहाल प्रशासन तकनीकी खराबी, मानवीय गलती और अन्य संभावित कारणों की जांच कर रहा है।
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