उत्तरी ध्रुव के पास नॉर्वे के स्वालबार्ड द्वीप पर जन्म और मृत्यु पर रोक है। यह नियम अस्पताल की कमी और ठंड में शव न गलने के कारण है। 1920 की संधि से 50+ देशों के लोग यहाँ बिना वीजा के रह सकते हैं।

अनोखा गांवः यह एक बहुत ही अजीब और अनोखा गांव है। इसका नाम स्वालबार्ड है। उत्तरी ध्रुव से लगभग 1,300 किलोमीटर दूर, स्वालबार्ड (Svalbard) नॉर्वे का एक द्वीप समूह है। यहां जाने के लिए आपको वीजा की जरूरत नहीं है। लेकिन इस गांव के बारे में सुनकर कोई भी हैरान रह जाएगा, क्योंकि यहां बच्चे को जन्म देना और मरना, दोनों ही कानूनन मना है। स्वालबार्ड का मौसम बहुत कठोर है। यहां पल-पल में मौसम बदलता है। इसके अलावा, यहां कभी भी ध्रुवीय भालू दिखाई दे सकते हैं। हाल ही में इस द्वीप पर घूमने गईं ट्रैवल इन्फ्लुएंसर राधिका नोम्लर्स ने सोशल मीडिया पर इस जगह की हैरान करने वाली बातें शेयर की हैं।

उनके मुताबिक, दुनिया के सबसे उत्तरी छोर पर बसे इस गांव में जन्म लेना और मरना दोनों मना है। ऐसा इसलिए क्योंकि यहां कोई अस्पताल नहीं है, इसलिए डिलीवरी कराने की कोई सुविधा नहीं है। वहीं, अगर किसी की मौत हो जाए, तो कड़ाके की ठंड की वजह से शव गलती ही नहीं हैं। इसी वजह से यहां किसी को दफनाने की भी व्यवस्था नहीं है।

स्वालबार्ड में सर्दियों के दौरान 24 घंटे अंधेरा और गर्मियों में 24 घंटे रोशनी रहती है। कुछ महीने तो सूरज बिल्कुल नहीं दिखता, तो कुछ महीने सूरज डूबता ही नहीं है। इस इलाके में एक 'डूम्सडे वॉल्ट' भी बनाया गया है, ताकि प्राकृतिक आपदा, युद्ध या जलवायु परिवर्तन जैसी मुश्किलों में इंसानियत को बचाया जा सके। इसका इस्तेमाल मानव जाति की कृषि विविधता को सुरक्षित रखने के लिए भी किया जा रहा है। यहां अनाज के बीजों को बहुत सुरक्षित रखा गया है।

इस द्वीप की एक और खास बात यह है कि यहां 50 से ज्यादा देशों के लोग बिना वीजा के रहते हैं। इसकी वजह 1920 की स्वालबार्ड संधि है। इस संधि के मुताबिक, किसी भी देश का नागरिक यहां रह सकता है और काम कर सकता है। भारत भी उन देशों में से एक है जिसने इस संधि पर हस्ताक्षर किए हैं।

न कोई सेना, न वीजा की जरूरत

स्वालबार्ड में किसी भी तरह की कोई आधिकारिक अप्रवासन प्रक्रिया नहीं है। अगर कोई अपना गुजारा कर सकता है और उसे काम मिल जाता है, तो वह यहां बस सकता है। फिलहाल यहां करीब 2,500 से 3,000 लोग रहते हैं, लेकिन इंसानों से ज्यादा यहां ध्रुवीय भालू हैं। यहां के नाजुक आर्कटिक पक्षियों की प्रजातियों को बचाने के लिए बिल्लियों पर पूरी तरह से पाबंदी है।

यहां कोई सेना नहीं है और अपराध के मामले भी बहुत कम होते हैं। लोगों का दरवाजों पर ताला न लगाना और साइकिलें बाहर छोड़ देना यहां आम बात है। लेकिन, शहर से बाहर जाते समय ध्रुवीय भालुओं के खतरे की वजह से राइफल रखना जरूरी है।

स्वालबार्ड में मौत और जन्म पर पाबंदी की मुख्य वजह यहां हर वक्त होने वाली बर्फबारी है। इसके कारण शव ठीक से गल नहीं पाते, जिससे स्वास्थ्य समस्याएं पैदा हो सकती हैं। इसी को देखते हुए अब यहां दफनाने की व्यवस्था बंद कर दी गई है। गंभीर रूप से बीमार या बुजुर्ग लोगों को यह द्वीप छोड़ना ही पड़ता है।

यहां कोई वृद्धाश्रम नहीं है। साथ ही, बेहतर मेडिकल सुविधाओं की कमी के कारण गर्भवती महिलाओं को डिलीवरी के लिए समय से पहले नॉर्वे की मुख्य भूमि पर जाना पड़ता है। इसी वजह से स्वालबार्ड को सिर्फ युवाओं, काम करने वालों और मुश्किल हालात का सामना करने का साहस रखने वालों के लिए बनी जगह कहा जाता है। दुनिया के कोने में बसा यह गांव अपने अजीब नियमों से ध्यान खींचता है, लेकिन इसकी यही खासियत स्वालबार्ड को एक खास जगह बनाती है।