सुप्रीम कोर्ट ने पटना HC के जज सुधीर वर्मा और एक रिटायर्ड जज के खिलाफ जांच की याचिका खारिज कर दी। कोर्ट ने इसे 'सस्ती लोकप्रियता' का जरिया बताया और याचिकाकर्ता को भविष्य में ऐसी याचिकाओं पर भारी जुर्माने की चेतावनी दी।
नई दिल्लीः सुप्रीम कोर्ट ने पटना हाईकोर्ट के जज जस्टिस सुधीर कुमार वर्मा और एक रिटायर्ड जज जस्टिस हेमंत गुप्ता के खिलाफ आपराधिक जांच की मांग करने वाली याचिका को सिरे से खारिज कर दिया है। कोर्ट ने इस याचिका को 'सस्ती लोकप्रियता' हासिल करने का एक जरिया बताया। जस्टिस विक्रम नाथ और जस्टिस सतीश चंद्र शर्मा की बेंच ने याचिकाकर्ता को कड़ी चेतावनी देते हुए कहा कि अगर भविष्य में ऐसी याचिकाएं दायर की गईं तो उन पर 'भारी जुर्माना' लगाया जाएगा। यह याचिका वकील मनोहर लाल शर्मा (ML Sharma) ने दायर की थी, जिसमें उन्होंने कोर्ट की निगरानी में एक जांच की मांग की थी। याचिका में दावा किया गया था कि यह एक 'गंभीर भ्रष्टाचार का मुद्दा' है। शर्मा ने अपनी याचिका में कई सनसनीखेज आरोप लगाए थे।
क्या थे याचिका में आरोप?
याचिका के मुताबिक, 16 अगस्त, 2023 को जस्टिस सुधीर कुमार वर्मा के पटना स्थित सरकारी आवास से 2।5 करोड़ रुपये की नकदी कथित तौर पर बरामद हुई थी। याचिकाकर्ता ने इस मामले को रिटायर्ड जज जस्टिस हेमंत गुप्ता से भी जोड़ने की कोशिश की थी। इसी आधार पर वकील शर्मा ने कोर्ट से FIR दर्ज करने का निर्देश देने की गुहार लगाई थी। हालांकि, सुप्रीम कोर्ट की बेंच इन दलीलों से बिल्कुल भी प्रभावित नहीं हुई। कोर्ट ने याचिका को 'गलत धारणाओं पर आधारित' (misconceived) करार दिया और इस पर आगे कोई भी सुनवाई करने से साफ इनकार कर दिया। ज़ाहिर है, कोर्ट का मूड इस बार काफी सख्त था।
पहले भी खारिज हो चुकी है ऐसी याचिका
अदालत ने सुनवाई के दौरान यह भी गौर किया कि याचिकाकर्ता एमएल शर्मा पहले भी इसी तरह की एक याचिका दायर कर चुके थे। उस याचिका को भी अदालत ने खारिज कर दिया था। बार-बार एक ही जैसे मामले को लेकर कोर्ट का दरवाजा खटखटाने पर बेंच ने अपनी नाराजगी जाहिर की। कोर्ट के इस रुख से साफ है कि वह जजों के खिलाफ बिना ठोस सबूतों के लगाए गए आरोपों वाली याचिकाओं को गंभीरता से नहीं ले रहा है। अदालत ने याचिकाकर्ता को चेतावनी देकर यह संदेश भी दिया है कि न्यायिक प्रक्रिया का दुरुपयोग बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
