NEET परीक्षा विवाद पर छात्र आंदोलन को सुप्रीम कोर्ट के वकीलों का समर्थन मिला है। एकजुटता दिखाते हुए, वकीलों ने कोर्ट परिसर में संविधान की प्रस्तावना पढ़ी और संवैधानिक मूल्यों जैसे न्याय और समानता की रक्षा पर जोर दिया।
NEET परीक्षा विवाद को लेकर केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग पर राजधानी दिल्ली में चल रहे छात्र आंदोलन को अब सुप्रीम कोर्ट के वकीलों का भी समर्थन मिल गया है। सुप्रीम कोर्ट के वकीलों के एक समूह ने छात्रों के साथ एकजुटता दिखाते हुए कोर्ट परिसर में भारतीय संविधान की प्रस्तावना पढ़ी। प्रदर्शन में शामिल वकीलों ने कहा कि यह कदम संविधान में दिए गए बुनियादी मूल्यों के प्रति उनकी प्रतिबद्धता दिखाने के लिए है।
वकीलों ने पढ़ी संविधान की प्रस्तावना
यह कार्यक्रम सुप्रीम कोर्ट के वकीलों की अगुवाई में आयोजित किया गया। सबने एक साथ मिलकर संविधान की प्रस्तावना पढ़ी और इस बात पर जोर दिया कि लोकतंत्र, न्याय, स्वतंत्रता, समानता और बंधुत्व जैसे संवैधानिक मूल्यों की रक्षा करना हर नागरिक की जिम्मेदारी है। वकीलों ने साफ किया कि यह सांकेतिक प्रदर्शन देश के अलग-अलग हिस्सों में चल रहे छात्र आंदोलनों के समर्थन में आयोजित किया गया है।
वरिष्ठ वकील इंदिरा जयसिंह और डॉ. एस. मुरलीधर ने संविधान की प्रस्तावना पढ़ने में नेतृत्व किया। इस कार्यक्रम में सुप्रीम कोर्ट बार एसोसिएशन के अध्यक्ष और वरिष्ठ वकील विकास सिंह, वरिष्ठ वकील आनंद ग्रोवर, अंजना प्रकाश, संजय घोष, शादान फरासत, अरुंधति काटजू, महालक्ष्मी पवानी, नंदिता राव, पी.वी. सुरेंद्रनाथ, मनाली सिंघल, संगीता भारती, पी.वी. दिनेश, जयंत ठाकुर और वकील वृंदा ग्रोवर समेत बार के कई सदस्य शामिल हुए।
संवैधानिक अधिकारों की रक्षा होनी चाहिए
वकीलों ने इस बात पर भी जोर दिया कि शांतिपूर्ण तरीके से अपनी राय रखने और विरोध करने के संवैधानिक अधिकार की रक्षा करना बेहद जरूरी है। उन्होंने कहा कि प्रस्तावना का पाठ संविधान की आत्मा को बनाए रखने के लिए किया गया और यह किसी राजनीतिक पक्ष का हिस्सा नहीं है। सुप्रीम कोर्ट के सामने वकीलों का यह प्रदर्शन पूरी तरह शांतिपूर्ण रहा। इस प्रदर्शन की तस्वीरें सोशल मीडिया पर खूब शेयर की गईं।
