सुवेंदु अधिकारी 9 मई 2026 को पश्चिम बंगाल के पहले बीजेपी मुख्यमंत्री के रूप में शपथ लेंगे। कोलकाता में होने वाले इस समारोह में पीएम मोदी और अमित शाह शामिल होंगे। उन्हें बीजेपी विधायक दल का नेता चुना गया है।

Suvendu Adhikari Oath: बीजेपी नेता सुवेंदु अधिकारी शनिवार (9 मई, 2026) को कोलकाता के ऐतिहासिक ब्रिगेड परेड ग्राउंड में पश्चिम बंगाल के पहले बीजेपी मुख्यमंत्री के तौर पर शपथ लेने जा रहे हैं। इस भव्य कार्यक्रम के लिए पूरे मैदान को तैयार किया जा रहा है और सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए हैं। शुक्रवार को कोलकाता में बीजेपी विधायक दल की एक अहम बैठक हुई, जिसमें सुवेंदु अधिकारी को विधायक दल का नेता चुना गया। इस बैठक में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह भी मौजूद थे। अमित शाह को पश्चिम बंगाल के लिए बीजेपी का केंद्रीय पर्यवेक्षक बनाया गया है, जबकि ओडिशा के मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी को सह-पर्यवेक्षक की जिम्मेदारी दी गई है।

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शनिवार को होने वाले इस भव्य शपथ ग्रहण समारोह में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह और केंद्र सरकार के कई बड़े मंत्री शामिल होंगे। बीजेपी इस कार्यक्रम को ऐतिहासिक बनाने की तैयारी में जुटी है। वहीं, पश्चिम बंगाल का सियासी माहौल भी काफी गरमाया हुआ है। 7 मई को पश्चिम बंगाल के राज्यपाल आर. एन. रवि ने विधानसभा को आधिकारिक तौर पर भंग कर दिया था। इधर, मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने इस्तीफा देने से इनकार कर दिया है। हालांकि, संवैधानिक नियमों के मुताबिक, नई सरकार बनने तक वह केयरटेकर पद पर बनी रह सकती हैं, लेकिन उनके पास सरकार से जुड़ा कोई भी बड़ा फैसला लेने का अधिकार नहीं होगा।

क्या ममता बनर्जी कार्यक्रम में शामिल होंगी?

सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या ममता बनर्जी, सुवेंदु अधिकारी के शपथ ग्रहण समारोह में शामिल होंगी? इस बारे में अभी तक कोई आधिकारिक जानकारी सामने नहीं आई है। ऐसा कोई संवैधानिक नियम नहीं है जो किसी निवर्तमान मुख्यमंत्री को नए मुख्यमंत्री के शपथ ग्रहण समारोह में शामिल होने के लिए मजबूर करे। यह पूरी तरह से राजनीतिक परंपरा, आपसी संबंधों और शिष्टाचार पर निर्भर करता है। कई बार, लोकतांत्रिक परंपरा के तहत, पूर्व मुख्यमंत्री नए मुख्यमंत्री के शपथ ग्रहण में शामिल होकर उन्हें बधाई देते हैं। इसे सत्ता हस्तांतरण की एक सहज प्रक्रिया माना जाता है। हालांकि, ऐसे भी कई मौके आए हैं जब राजनीतिक मतभेदों, रिश्तों में खटास, स्वास्थ्य कारणों या अन्य वजहों से पूर्व मुख्यमंत्री शपथ ग्रहण समारोह में शामिल नहीं हुए। ऐसे मामलों में उनकी गैर-मौजूदगी को नियमों का उल्लंघन नहीं माना जाता।