एली लिली ने भारत में कैंसर रोधी दवा Tanstrive लॉन्च की है। RET जीन म्यूटेशन वाले मरीजों के लिए यह नई टार्गेटेड थेरेपी मानी जा रही है। जानिए इसकी कीमत, काम करने का तरीका और इससे जुड़ी अहम जानकारी।

भारत में कैंसर के इलाज के क्षेत्र में एक नया विकल्प जुड़ गया है। अमेरिकी फार्मा कंपनी एली लिली एंड कंपनी ने अपनी कैंसर रोधी दवा ‘टैनस्ट्राइव’ (Tanstrive) को भारतीय बाजार में लॉन्च कर दिया है। कंपनी का दावा है कि यह दवा उन मरीजों के लिए विशेष रूप से उपयोगी हो सकती है, जिनके कैंसर का संबंध RET जीन में होने वाले बदलाव से है। कैंसर के बढ़ते मामलों के बीच इस दवा की एंट्री को महत्वपूर्ण माना जा रहा है, क्योंकि यह पारंपरिक उपचार पद्धतियों से अलग जीन-आधारित और लक्षित इलाज पर केंद्रित है।

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कैसे काम करती है Tanstrive?

विशेषज्ञों के अनुसार हर कैंसर एक जैसा नहीं होता। कई मरीजों में कैंसर कोशिकाओं की वृद्धि कुछ विशेष जीन म्यूटेशन की वजह से होती है। RET जीन में बदलाव भी ऐसा ही एक कारण माना जाता है, जो कैंसर कोशिकाओं को तेजी से बढ़ने का संकेत देता है। Tanstrive इसी जीन बदलाव को निशाना बनाती है। यह कैंसर कोशिकाओं को मिलने वाले गलत संकेतों को रोकने का प्रयास करती है, जिससे ट्यूमर की वृद्धि धीमी पड़ सकती है। यही वजह है कि इसे ‘टार्गेटेड थेरेपी’ की श्रेणी में रखा जा रहा है।

मरीजों को कैसे दी जाएगी दवा?

कंपनी के अनुसार यह दवा 40 mg, 80 mg, 120 mg और 160 mg की खुराक में उपलब्ध होगी। मरीजों को डॉक्टर की सलाह के अनुसार इसे दिन में दो बार लेना होगा। एली लिली इंडिया के अध्यक्ष विंसलो टकर का कहना है कि कैंसर उपचार अब तेजी से सटीक और जीन-आधारित चिकित्सा की ओर बढ़ रहा है। ऐसे उपचार मरीजों को उनकी बीमारी के अनुरूप बेहतर विकल्प प्रदान कर सकते हैं।

कितनी है कीमत?

इस दवा की सबसे ज्यादा चर्चा इसकी कीमत को लेकर हो रही है। कंपनी ने बताया है कि Tanstrive का एक बॉक्स लगभग 2.15 लाख रुपये का है। इसमें 14 दिनों के इलाज के लिए आवश्यक दवा उपलब्ध होती है। यानी लंबे समय तक इलाज कराने वाले मरीजों के लिए इसकी लागत काफी अधिक हो सकती है। हालांकि डॉक्टरों का मानना है कि किसी भी टार्गेटेड थेरेपी का उपयोग मरीज की मेडिकल स्थिति और जीन जांच की रिपोर्ट के आधार पर ही किया जाता है।

जीन बेस्ड इलाज की ओर बढ़ रहा कैंसर उपचार

पिछले कुछ वर्षों में कैंसर उपचार की दुनिया में बड़ा बदलाव देखने को मिला है। अब डॉक्टर मरीजों की जीन प्रोफाइलिंग कर बीमारी के कारणों को समझने की कोशिश करते हैं और उसी के अनुसार दवाएं चुनते हैं। Tanstrive की लॉन्चिंग इसी बदलाव का हिस्सा मानी जा रही है। हालांकि विशेषज्ञ यह भी कहते हैं कि किसी भी नई दवा का उपयोग केवल योग्य ऑन्कोलॉजिस्ट की सलाह और उचित जांच के बाद ही किया जाना चाहिए।