Supreme Court petition TCS Case: TCS नासिक केस में धर्मांतरण और यौन उत्पीड़न के आरोपों पर सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर हुई है। NCW ने जांच शुरू की है और कंपनी ने जीरो टॉलरेंस नीति की बात कही है। जानिए पूरे मामले की ताज़ा अपडेट।

देश की बड़ी आईटी कंपनी TCS इन दिनों एक गंभीर विवाद को लेकर सुर्खियों में है। महाराष्ट्र के नासिक स्थित कैंपस से जुड़े धर्म परिवर्तन और यौन उत्पीड़न के आरोपों ने अब कानूनी मोड़ ले लिया है। मामला अब सुप्रीम कोर्ट तक पहुंच चुका है और इसकी जांच कई स्तरों पर शुरू हो गई है। इस पूरे मामले को लेकर वकील अश्विनी कुमार उपाध्याय की ओर से उनके वकील अश्विनी दुबे के जरिए सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की गई है। याचिका में मांग की गई है कि केंद्र और राज्य सरकारें ऐसे मामलों पर सख्त कदम उठाएं, खासकर उन स्थितियों में जहां धोखे या दबाव से धर्म परिवर्तन कराने के आरोप सामने आते हैं।

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याचिका का दावा: धर्म की आज़ादी बनाम सीमाएं

याचिका में कहा गया है कि संविधान धर्म को मानने, अपनाने और प्रचार करने की स्वतंत्रता देता है, लेकिन यह अधिकार पूरी तरह असीमित नहीं है। इसमें सार्वजनिक व्यवस्था, नैतिकता और स्वास्थ्य जैसी शर्तें लागू होती हैं। दलील दी गई है कि धर्म के नाम पर कोई भी व्यक्ति किसी भी तरह की गतिविधि नहीं कर सकता। अगर यह स्वतंत्रता बिना रोक-टोक दी जाए तो यह सामाजिक संतुलन और राष्ट्रीय एकता के लिए चुनौती बन सकती है।

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क्यों उठ रहा है “फ्रॉडुलेंट कन्वर्जन” का मुद्दा?

याचिका में खास तौर पर इस बात पर जोर दिया गया है कि अगर धर्म परिवर्तन धोखे, दबाव या गलत जानकारी के जरिए कराया जाता है, तो यह केवल व्यक्तिगत मामला नहीं रहता, बल्कि इसका असर समाज और कानून-व्यवस्था पर भी पड़ता है। यही वजह है कि कोर्ट से ऐसे मामलों में सख्त गाइडलाइन और कार्रवाई की मांग की गई है।

सुप्रीम कोर्ट का पहले का रुख भी चर्चा में

इससे पहले 2023 में सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि धर्म परिवर्तन जैसे मुद्दों को हल्के में नहीं लिया जा सकता और इसे राजनीतिक रंग देना भी सही नहीं है। कोर्ट ने इस विषय पर अटॉर्नी जनरल आर. वेंकटरमणि की भी सहायता मांगी थी ताकि इसके कानूनी पहलुओं को बेहतर तरीके से समझा जा सके।

NCW की एंट्री: 18 अप्रैल को नासिक में जांच

इस मामले में अब National Commission for Women ने भी सक्रिय भूमिका निभाई है। आयोग ने स्वतः संज्ञान लेते हुए एक फैक्ट-फाइंडिंग कमेटी गठित की है, जो 18 अप्रैल को नासिक जाकर जांच करेगी। यह टीम मौके पर जाकर पीड़ितों, पुलिस अधिकारियों, कंपनी के प्रतिनिधियों और अन्य संबंधित लोगों से बातचीत करेगी। साथ ही यह भी देखा जाएगा कि जांच या सुरक्षा व्यवस्था में कहीं कोई कमी तो नहीं रही।

TCS का जवाब: ‘जीरो टॉलरेंस पॉलिसी’ का दावा

Tata Consultancy Services ने इन आरोपों पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा है कि कंपनी कार्यस्थल पर किसी भी तरह के उत्पीड़न और दबाव के खिलाफ सख्त नीति अपनाती है। कंपनी के अनुसार, जैसे ही उन्हें इस मामले की जानकारी मिली, तुरंत आंतरिक स्तर पर कार्रवाई शुरू कर दी गई और पूरे मामले को गंभीरता से लिया गया।

अब नजर आगे की जांच और सुप्रीम कोर्ट पर

फिलहाल यह मामला जांच और कानूनी प्रक्रिया के शुरुआती चरण में है। एक तरफ NCW की टीम अपनी रिपोर्ट तैयार करेगी, वहीं दूसरी ओर सुप्रीम कोर्ट में इस याचिका पर आगे सुनवाई होनी है। अब सबकी नजर इस बात पर टिकी है कि जांच में क्या सामने आता है और कोर्ट इस पूरे मामले पर क्या रुख अपनाता है।

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