TMC सांसद प्रकाश चिक बारिक ने राज्यसभा से इस्तीफा क्यों दिया? उन्होंने इस्तीफे के बाद जनादेश को लेकर क्या कहा? क्या प्रकाश चिक बारिक ने TMC की प्राथमिक सदस्यता भी छोड़ दी है? प्रकाश चिक बारिक ने BJP को लेकर क्या बयान दिया?
Who is Prakash Chik Baraik: तृणमूल कांग्रेस (TMC) के राज्यसभा सांसद प्रकाश चिक बारिक ने गुरुवार को अपने पद से इस्तीफा दे दिया। इस्तीफे के बाद उन्होंने कहा कि यह फैसला उन्होंने पश्चिम बंगाल की जनता के जनादेश को ध्यान में रखते हुए लिया है। बारिक इस सप्ताह इस्तीफा देने वाले तीसरे TMC सांसद हैं, जिससे पार्टी की मुश्किलें और बढ़ गई हैं। उन्होंने यह भी कहा कि आगे वह वही करेंगे जो पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी उनसे कहेंगे। साथ ही उन्होंने साफ किया कि उन पर भारतीय जनता पार्टी (BJP) की ओर से किसी तरह का दबाव नहीं है।

प्रकाश चिक बारिक ने इस्तीफे की क्या वजह बताई?
इस्तीफा देने के बाद मीडिया से बातचीत में बारिक ने कहा कि पश्चिम बंगाल की जनता ने अपना फैसला दे दिया है और लोकतंत्र में जनता के जनादेश का सम्मान होना चाहिए। उन्होंने कहा कि चुनाव परिणामों ने उन्हें यह सोचने पर मजबूर किया कि अब राज्यसभा सदस्य के रूप में बने रहना उचित नहीं है। उनके अनुसार, जब जनता किसी अन्य राजनीतिक दल को समर्थन देती है तो उस फैसले को स्वीकार करना चाहिए। बारिक ने कहा कि इसी सोच के साथ उन्होंने अपने पद और पार्टी, दोनों से इस्तीफा देने का फैसला लिया।
BJP के पक्ष में जनादेश का किया जिक्र
प्रकाश चिक बारिक ने कहा कि पश्चिम बंगाल में जनता का जनादेश भारतीय जनता पार्टी के पक्ष में गया था और लोकतांत्रिक व्यवस्था में लोगों की राय सर्वोपरि होती है। उन्होंने कहा कि उनके अपने क्षेत्र में पार्टी एक भी सीट नहीं जीत सकी। इसके अलावा उत्तर बंगाल में भी पार्टी का प्रदर्शन उम्मीद के मुताबिक नहीं रहा। इन परिस्थितियों को देखते हुए उन्हें लगा कि पद पर बने रहना सही नहीं होगा। उन्होंने कहा कि इसी कारण उन्होंने राज्यसभा सदस्यता और पार्टी दोनों छोड़ने का फैसला किया।
भविष्य की राजनीति को लेकर क्या बोले बारिक?
अपने अगले राजनीतिक कदम के बारे में पूछे जाने पर बारिक ने कोई स्पष्ट जवाब नहीं दिया। उन्होंने कहा कि आने वाले समय में क्या होगा, इसके लिए लोगों को इंतजार करना चाहिए। उनके मुताबिक राजनीति में उनका भविष्य क्या होगा, इसका फैसला समय करेगा। उन्होंने कहा कि अभी वह राजनीति से दूर नहीं जा रहे हैं, लेकिन आगे की दिशा समय के साथ स्पष्ट होगी।
राज्यसभा चेयरमैन को सौंपा इस्तीफा
इस्तीफे से पहले प्रकाश चिक बारिक ने राज्यसभा के सभापति सीपी राधाकृष्णन से मुलाकात की और अपना इस्तीफा सौंपा। अपने इस्तीफा पत्र में उन्होंने लिखा कि वह राज्यसभा की सदस्यता से इस्तीफा दे रहे हैं और इसे तत्काल प्रभाव से स्वीकार किया जाए। इसके अलावा उन्होंने अपने कार्यकाल के दौरान मिले सहयोग के लिए राज्यसभा के सभापति, उपसभापति और सचिवालय के अधिकारियों का आभार भी व्यक्त किया।
आदिवासी नेता के तौर पर निभा रहे थे अहम जिम्मेदारियां
पश्चिम बंगाल के प्रमुख आदिवासी नेताओं में गिने जाने वाले प्रकाश चिक बारिक कई संसदीय समितियों में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे थे। वह उपभोक्ता मामले, खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण संबंधी संसदीय स्थायी समिति के सदस्य थे। इसके अलावा आदिवासी मामलों की सलाहकार समिति में भी उनकी सक्रिय भूमिका थी।
सुष्मिता देव और सुखेंदु शेखर रॉय पहले ही छोड़ चुके हैं TMC
प्रकाश चिक बारिक का इस्तीफा ऐसे समय आया है जब तृणमूल कांग्रेस लगातार बड़े नेताओं के पार्टी छोड़ने से जूझ रही है। बुधवार को पूर्व केंद्रीय मंत्री और राज्यसभा सांसद सुष्मिता देव ने भी पार्टी और राज्यसभा दोनों से इस्तीफा दे दिया था। अपने फैसले पर उन्होंने कहा था कि वह एक साथ दो राजनीतिक नावों पर सवार नहीं रहना चाहतीं। उन्होंने स्पष्ट किया कि उनके राजनीतिक और पारिवारिक संस्कार उन्हें ऐसा करने की अनुमति नहीं देते। जब उनसे BJP में शामिल होने की संभावना के बारे में पूछा गया तो उन्होंने कहा कि उचित समय आने पर वह अपने फैसले की जानकारी देंगी। इसके बाद असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा के साथ उनकी मुलाकात ने राजनीतिक अटकलों को और तेज कर दिया। इससे पहले सोमवार को राज्यसभा सांसद सुखेंदु शेखर रॉय ने भी इस्तीफा देकर पार्टी नेतृत्व के साथ मतभेदों का हवाला देते हुए TMC छोड़ दी थी।
19 लोकसभा सांसदों के समर्थन का दावा
बागी गुट से जुड़े सूत्रों का दावा है कि उन्हें कम से कम 19 लोकसभा सांसदों का समर्थन प्राप्त है। यह संख्या लोकसभा में TMC के कुल सांसदों की संख्या के दो-तिहाई से अधिक बताई जा रही है। कहा जा रहा है कि यह गुट जल्द ही पार्टी के संसदीय विंग पर दावा कर सकता है। यह स्थिति पश्चिम बंगाल विधानसभा में हुए घटनाक्रम जैसी मानी जा रही है, जहां बागी विधायकों के एक बड़े समूह ने पहले ही पार्टी के विधायी विंग पर नियंत्रण हासिल कर लिया था।


