ट्रंप सरकार अमेरिका में पढ़ाई के बाद काम करने वाले विदेशी छात्रों पर $1 लाख की फीस लगा सकती है। यह OPT प्रोग्राम को निशाना बनाएगा, जिससे भारतीय छात्रों पर बड़ा असर पड़ेगा। प्रस्ताव विचाराधीन है।
वॉशिंगटन: अमेरिका की यूनिवर्सिटी से पढ़ाई पूरी करने के बाद वहीं नौकरी करने का सपना देख रहे विदेशी छात्रों को डोनाल्ड ट्रंप सरकार बड़ा झटका दे सकती है। 'द वॉल स्ट्रीट जर्नल' ने गुरुवार को अपनी एक रिपोर्ट में बताया है कि ट्रंप सरकार ऐसे छात्रों पर 1 लाख डॉलर की भारी-भरकम फीस लगाने की तैयारी कर रही है। अगर ऐसा होता है तो यह अमेरिका में पढ़ रहे भारतीय छात्रों के लिए एक बड़ा झटका होगा।
रिपोर्ट के मुताबिक, सरकार का निशाना 'ऑप्शनल प्रैक्टिकल ट्रेनिंग' (OPT) प्रोग्राम है। यह वही प्रोग्राम है जो विदेशी छात्रों को पढ़ाई के बाद अमेरिका में काम करने की इजाजत देता है। बताया जा रहा है कि इससे जुड़ा एक प्रस्ताव होमलैंड सिक्योरिटी डिपार्टमेंट के पास विचार के लिए भेजा गया है। हालांकि, अभी यह साफ नहीं है कि यह फीस किन-किन विदेशी छात्रों पर लागू होगी। इस मामले पर व्हाइट हाउस ने अब तक कोई बयान नहीं दिया है।
यह कदम भारत जैसे देशों के छात्रों के लिए बहुत बड़ी मुसीबत बन सकता है, जो पढ़ाई के बाद अमेरिका में काम करना चाहते हैं। 2024-25 के दौरान अमेरिका के शिक्षण संस्थानों में भारतीय छात्रों की संख्या ने रिकॉर्ड बनाया था। उस साल 3.63 लाख से ज्यादा भारतीय छात्रों ने एडमिशन लिया था, जो चीन से भी ज्यादा थे। एक रिपोर्ट के मुताबिक, पढ़ाई पूरी करने वाले करीब 40% भारतीय छात्र OPT प्रोग्राम का इस्तेमाल करते हैं। ऐसे में यह नया नियम सीधे तौर पर उन्हें प्रभावित करेगा।
क्या है OPT प्रोग्राम?
ऑप्शनल प्रैक्टिकल ट्रेनिंग (OPT) एक ऐसा प्रोग्राम है, जो अमेरिकी यूनिवर्सिटी से ग्रेजुएशन करने वाले विदेशी छात्रों को बिना वर्क वीजा के एक साल तक देश में काम करने की इजाजत देता है। जो छात्र साइंस, टेक्नोलॉजी, इंजीनियरिंग और मैथ्स यानी STEM फील्ड से होते हैं, उन्हें OPT के तहत दो और साल काम करने की छूट मिलती है। पहले भी इस प्रोग्राम को बंद करने की मांग उठ चुकी है। आरोप लगते रहे हैं कि छात्र इस प्रोग्राम का गलत इस्तेमाल करते हैं और वीजा खत्म होने के बाद भी देश में रुक जाते हैं।
H-1B वीजा के बाद अब OPT पर नजर
यह पहली बार नहीं है जब ट्रंप प्रशासन ने विदेशी प्रोफेशनल्स को निशाना बनाया है। इससे पहले, ट्रंप ने अपने कार्यकाल के पहले साल में ही अमेरिका के टेम्परेरी वर्क वीजा यानी H-1B वीजा की फीस को 2,000-5,000 डॉलर से बढ़ाकर सीधे 1 लाख डॉलर कर दिया था। यह फैसला दुनिया भर के उन स्किल्ड प्रोफेशनल्स के लिए एक बड़ा झटका था जो H-1B वीजा का सपना देख रहे थे। हालांकि, फिलहाल फेडरल अदालतों ने इस फीस को लागू करने पर रोक लगा रखी है।
