Trump Russia Diesel Deal: भारत को रूस से तेल खरीदने पर टैरिफ की धमकी देने वाले अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने खुद रूस से डीजल आयात करने के लिए पुतिन से डील कर ली है। मध्यावधि चुनावों से पहले महंगाई घटाने के इस कदम को अमेरिका का दोहरा मापदंड माना जा रहा है।
Trump-Putin Diesel Deal: यदि पाखंड और दोहरे मानदंडों के लिए कोई नोबेल पुरस्कार होता, तो अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप निस्संदेह इसके सबसे बड़े दावेदार होते। एक तरफ भारत पर रूस से तेल खरीदने को लेकर भारी-भरकम टैरिफ थोपने और 100% तक टैक्स लगाने की धमकियां दी गईं, वहीं दूसरी तरफ ट्रंप ने खुद रूस से अमेरिका में डीजल आयात करने के लिए रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के साथ एक बड़ी डील कर ली है। यह वही ट्रंप हैं जो कभी मॉस्को की फंडिंग रोककर रूस-यूक्रेन युद्ध खत्म करने और शांति का दम भरते थे।
Trump-Putin Deal: अमेरिका ने रूस से डीजल क्यों लिया?
- अमेरिका में डीजल की कीमतें रिकॉर्ड स्तर के करीब पहुंच गई हैं।
- मध्य-पूर्व के संघर्ष, होर्मुज जलडमरूमध्य में बाधा और रूसी रिफाइनरियों पर यूक्रेनी हमलों ने वैश्विक ईंधन आपूर्ति पर दबाव बढ़ाया है।
- डीजल महंगा होने से ट्रकिंग, खेती और सप्लाई चेन पर सीधा असर पड़ रहा है।
- ट्रंप प्रशासन चुनाव से पहले ईंधन कीमतों पर दबाव कम करना चाहता है।
- ट्रंप ने कहा कि रूस से आने वाली अतिरिक्त सप्लाई से कीमतें नीचे लाने में मदद मिलेगी।
कब तक और कैसी मिली मंजूरी?
- लिंडसे ग्राहम सैंक्शनिंग रशिया एंड ईरान एक्ट पर हस्ताक्षर के कुछ हफ्तों बाद यू-टर्न: यह घटनाक्रम तब सामने आया है जब ट्रंप ने हाल ही में 'लिंडसे ग्राहम सैंक्शनिंग रशिया एंड ईरान एक्ट' पर हस्ताक्षर किए हैं, जिसके तहत रूस से ऊर्जा खरीदने वाले देशों पर भारी दंड लगाने की शक्ति मिली है। लेकिन अब जब खुद अमेरिका ने रूस से डीजल खरीदने का फैसला किया है, तो यह सवाल उठने लगा है कि क्या अमेरिका अपने ही बनाए कानून के तहत खुद पर प्रतिबंध लगाएगा?
- मध्यावधि चुनावों का दबाव और महंगाई: जानकारों का मानना है कि अमेरिका में आने वाले मध्यावधि चुनावों और आसमान छूती ईंधन कीमतों के कारण ट्रंप को यह कदम उठाना पड़ा है। मध्य पूर्व के तनाव और ईरान द्वारा होर्मुज जलडमरूमध्य बंद किए जाने से अमेरिकी बाजार में डीजल के दाम 70% तक बढ़ चुके हैं, जिससे किसानों और ट्रक ड्राइवरों में भारी गुस्सा है।
- पुतिन के साथ डीजल समझौता: ट्रुथ सोशल पर घोषणा करते हुए ट्रंप ने बताया कि रूस शुरुआती चरण में अमेरिकी और वैश्विक बाजारों के लिए लाखों टन डीजल जारी करेगा। इस समझौते के तहत अप्रैल 2027 तक रूसी डीजल पर लगे प्रतिबंधों को निलंबित किया जा रहा है।
- यूक्रेन की कड़ी आपत्ति: यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोडिमिर ज़ेलेंस्की ने इस समझौते को पुतिन के लिए ट्रंप का "तोहफा" करार देते हुए तीखी आलोचना की है। उनका कहना है कि यह युद्ध को और लंबा खींचने में एक तरह का निवेश है।
- भारत के प्रति दोहरे मापदंड: पिछले साल भारत द्वारा अपनी 90% ऊर्जा जरूरतों को पूरा करने के लिए रूस से तेल आयात करने पर अमेरिका ने तीखा विरोध जताया था और भारतीय सामानों पर दंडात्मक टैरिफ लादे थे। अमेरिकी अधिकारियों ने तब भारत के फैसले को खून की कमाई करार दिया था। अब खुद अमेरिका द्वारा रूस पर निर्भर होने के बाद वैश्विक स्तर पर ट्रंप प्रशासन की जमकर आलोचना हो रही है।


