होर्मुज़ स्ट्रेट संकट गहराया! ट्रंप की धमकी से बढ़ा तनाव, US-Iran Talks पर मंडराया खतरा, लेबनान विवाद और शिपिंग रूट की जंग के बीच क्या टूट जाएगी शांति?

बर्गनस्टॉक रिज़ॉर्ट (स्विट्जरलैंड): स्विट्जरलैंड की हसीन वादियों में बसा बर्गनस्टॉक रिज़ॉर्ट रविवार को एक ऐसे रणनीतिक महायुद्ध का गवाह बना, जिसने पूरी दुनिया की सांसें थाम दी हैं। एक तरफ जहां वाशिंगटन से अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की तीखी धमकियों ने वैश्विक राजनीति में भूचाल ला दिया, वहीं दूसरी तरफ स्विट्जरलैंड की बंद फाइलों के पीछे अमेरिका और ईरान के बीच हाई-स्टेक शांति वार्ता पूरी तरह से डगमगा गई।

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आधी रात की वो गुप्त बैठक... और फिर सब बिखर गया!

इस्लामाबाद मेमोरेंडम ऑफ अंडरस्टैंडिंग (MoU) के तहत शुरू हुई इस चार-पक्षीय बातचीत का पहला दौर उम्मीदों से भरा था। अमेरिकी प्रतिनिधिमंडल की कमान खुद उपराष्ट्रपति जेडी वेंस संभाल रहे थे, जिनके साथ विशेष दूत जेरेड कुशनर और स्टीव विटकोफ भी मौजूद थे। वहीं ईरान की तरफ से विदेश मंत्री अब्बास अरागची और मुख्य वार्ताकार मोहम्मद बाघेरी गालिबाफ मोर्चा संभाले हुए थे। इस महाबैठक में मध्यस्थ के रूप में पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ, फील्ड मार्शल आसिम मुनीर और कतर के प्रधानमंत्री भी मौजूद थे। शुरुआत में उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने सकारात्मक रुख दिखाते हुए कहा कि लेबनान में संघर्ष विराम को लेकर प्रगति हुई है और राष्ट्रपति ट्रंप ईरान के लोगों के साथ एक नई शुरुआत करना चाहते हैं। लेकिन, जैसे ही यह खबर फैली कि ट्रंप ने परदे के पीछे से एक बेहद खतरनाक चेतावनी जारी की है, बातचीत की मेज पर सन्नाटा पसर गया।

"अगर रूट बंद हुआ, तो आपका देश नहीं बचेगा!"-ट्रंप का अल्टीमेटम

लेबनान पर इज़राइली हमलों के विरोध में ईरान द्वारा दुनिया के सबसे अहम तेल मार्ग, 'होर्मुज़ जलडमरूमध्य' (Strait of Hormuz) को बंद करने की धमकी पर ट्रंप बुरी तरह भड़क गए। ट्रंप ने फॉक्स न्यूज़ और सोशल मीडिया के जरिए सीधी चेतावनी देते हुए कहा: "अगर आप इसे बंद करते हैं, तो आपका देश ही नहीं बचेगा। आप लोग अपने देश वापस भी नहीं लौट पाएंगे।" ट्रंप यहीं नहीं रुके; उन्होंने साफ कहा कि अगर बातचीत नाकाम होती है, तो अमेरिकी सेना इस रणनीतिक जलमार्ग पर सीधा कब्ज़ा कर लेगी। उन्होंने अमेरिकी सेना को पश्चिम एशिया का "गार्जियन एंजल" बताते हुए कहा कि सुरक्षा के बदले वे वहां से गुजरने वाले जहाजों के तेल कार्गो पर 20 प्रतिशत तक का भारी 'टोल टैक्स' वसूलेंगे।

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ट्रुथ सोशल पर परमाणु धमकी: "पिछले हफ्ते से भी ज्यादा जोर से मारेंगे!"

तनाव तब और बढ़ गया जब ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'ट्रुथ सोशल' पर हिज़्बुल्लाह को लेकर ईरान को सीधी मिलिट्री स्ट्राइक की धमकी दे डाली। उन्होंने लिखा कि ईरान लेबनान में अपने प्रॉक्सी संगठनों को तुरंत रोके, वरना अमेरिका ईरान पर दोबारा ऐसा हमला करेगा जो पिछले हफ्ते से भी कई गुना ज्यादा विनाशकारी होगा। इस बीच, शुक्रवार को घोषित संघर्ष विराम के बावजूद लेबनान में जमीनी लड़ाई जारी रही, जिसके जवाब में तेहरान ने होर्मुज जलडमरूमध्य से गुजरने वाले जहाजों पर फिर से कड़े प्रतिबंध लगा दिए हैं।

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फोटो-ऑप का बहिष्कार और ईरानी दल का वॉकआउट!

ट्रंप के इन बयानों का असर स्विट्जरलैंड में तुरंत देखने को मिला। भड़के हुए ईरानी अधिकारियों ने अमेरिकी समकक्षों के साथ तय पारंपरिक फोटो-ऑप (तस्वीरें खिंचवाने) में शामिल होने से साफ इनकार कर दिया। ट्रंप की हालिया धमकियों पर अपनी गहरी नाराजगी जताते हुए ईरानी प्रतिनिधिमंडल अचानक कार्यक्रम स्थल से बाहर (वॉकआउट) चला गया। ईरानी वार्ताकार मेहदी घोरबानज़ादेह ने सरकारी प्रसारक IRIB को बताया कि जब तक लेबनान में स्थिति पूरी तरह नहीं सुधरती और अमेरिका फ्रीज की गई ईरानी संपत्ति को जारी नहीं करता, तब तक परमाणु कार्यक्रम या किसी अन्य विषय पर कोई आगे बातचीत नहीं होगी। फिलहाल यह बातचीत पूरी तरह खटाई में पड़ती दिख रही है और दुनिया पर एक बड़े युद्ध का खतरा मंडरा रहा है।

क्या शांति की उम्मीद बची है?

दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण ऊर्जा मार्ग, पश्चिम एशिया की सुरक्षा और अमेरिका-ईरान संबंधों का भविष्य अब इसी वार्ता पर निर्भर करता दिख रहा है। लेकिन सवाल यह है कि क्या यह संवाद शांति का रास्ता खोलेगा, या ट्रंप की धमकियां और ईरान की सख्त शर्तें दुनिया को एक नए भू-राजनीतिक टकराव की ओर धकेल देंगी? आने वाले घंटे इस रहस्य से पर्दा उठा सकते हैं।