क्या 6 सांसदों की बगावत से उद्धव ठाकरे की शिवसेना (UBT) टूटने के कगार पर पहुंच गई है? क्या पार्टी प्रमुख पद छोड़ने की पेशकश किसी बड़े राजनीतिक भूचाल का संकेत है? कांग्रेस में विलय की अटकलों के पीछे आखिर कौन-सा छिपा हुआ खेल चल रहा है? क्या महाराष्ट्र की राजनीति में जल्द ही नया सत्ता समीकरण बनने वाला है?
मुंबई: महाराष्ट्र की सियासत में एक बार फिर ऐसा मोड़ आ गया है जिसने पूरे देश के राजनीतिक गलियारों में हड़कंप मचा दिया है। शिवसेना (UBT) प्रमुख और पूर्व मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे ने पार्टी के 60वें स्थापना दिवस के मौके पर एक ऐसा दांव चल दिया है, जिसने विरोधियों के साथ-साथ उनके अपने कार्यकर्ताओं को भी सन्न कर दिया है। लगातार आंतरिक कलह और बगावत की खबरों से जूझ रहे उद्धव ठाकरे ने भरे मंच से पार्टी प्रमुख का पद छोड़ने की भावुक पेशकश कर दी है।

अंदरूनी साजिश की आहट: क्या फिर होने वाली है 'शिंदे पार्ट-2' की एंट्री?
पार्टी के भीतर सब कुछ ठीक नहीं चल रहा है। राजनीतिक गलियारों में यह अफवाह बेहद तेज है कि शिवसेना (UBT) के कुल 9 लोकसभा सांसदों में से 6 सांसद बागी रुख अख्तियार कर चुके हैं। अंदरूनी सूत्रों की मानें तो ये छह सांसद मौजूदा मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे के गुट में शामिल होने की पूरी तैयारी कर चुके हैं। साल 2022 के उस जख्म को पार्टी अभी भुला भी नहीं पाई थी कि एक और बड़ी बगावत की आहट ने मातोश्री की नींद उड़ा दी है। इसी गुप्त बगावत के तनाव के बीच उद्धव ठाकरे का यह बयान सामने आया है।
भावुक दांव या आखिरी चेतावनी? 'चोरों के हाथ में कमान नहीं सौंपूंगा'
मुंबई में आयोजित सभा को संबोधित करते हुए उद्धव ठाकरे बेहद भावुक नजर आए, लेकिन उनके तेवरों में तीखापन कम नहीं हुआ था। उन्होंने सीधे शब्दों में अपने कार्यकर्ताओं से कहा, "अगर पार्टी को मुझ पर भरोसा नहीं है, तो मैं अभी इसी वक्त शीर्ष पद छोड़ने को तैयार हूं।" लेकिन इसके तुरंत बाद उन्होंने एक बड़ा सस्पेंस छोड़ते हुए कहा कि वे पार्टी की कमान किसी भी निष्ठावान शिवसैनिक को सौंपने के लिए तैयार हैं, मगर इसे 'चोरों' के हाथों में कभी नहीं जाने देंगे। ठाकरे ने साफ किया कि लगातार हो रहे हमलों के बावजूद उनका संकल्प कमजोर नहीं हुआ है।
कांग्रेस में विलय का रहस्य: क्या है बागी सांसदों के डर का सच?
बागी सांसदों द्वारा उठाए जा रहे इस सवाल पर कि 'शिवसेना (UBT) का भविष्य में कांग्रेस में विलय हो सकता है', उद्धव ठाकरे ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने इस थ्योरी को पूरी तरह खारिज करते हुए पूछा कि जो पार्टी 30 साल तक सहयोगी रहने के बाद भी बीजेपी में विलय नहीं हुई, वह कांग्रेस के साथ कैसे मिल सकती है? सस्पेंस को नया मोड़ देते हुए ठाकरे ने दावा किया कि असल में उन्हें डर है कि महाराष्ट्र बीजेपी ही कहीं शिंदे सेना के साथ अपना विलय न कर ले।
'एक पार्टी, कोई चुनाव नहीं'... क्या लोकतंत्र पर मंडरा रहा है बड़ा खतरा?
आलोचकों द्वारा 'वर्क फ्रॉम होम' और कार्यकर्ताओं से दूरी बनाए रखने के आरोपों का जवाब देते हुए उद्धव ने कहा कि अगर वे बाहर नहीं निकलते, तो पार्टी पिछले चुनाव कैसे जीतती? आर्टिकल के अंत में उन्होंने देश की लोकतांत्रिक व्यवस्था पर एक बड़ा सस्पेंसिव सवाल खड़ा करते हुए चेतावनी दी कि आज देश "एक पार्टी, कोई चुनाव नहीं" वाली खतरनाक राह पर बढ़ रहा है। अब देखना यह है कि उद्धव ठाकरे का यह 'इस्तीफा कार्ड' बागी सांसदों को रोकने में कामयाब होता है या महाराष्ट्र की राजनीति में किसी नए सियासी ड्रामे की शुरुआत करता है।


