US Green Card News: अमेरिका ने Cognizant, Infosys, TCS, Wipro और HCL समेत कई IT कंपनियों पर PERM कार्यक्रम को लेकर सख्ती की है। H-1B Visa और ग्रीन कार्ड नियमों में इस कदम का भारतीय IT पेशेवरों पर क्या असर पड़ेगा, जानें पूरी खबर।
US Green Card Rules: अमेरिकी प्रशासन ने भारतीय आईटी दिग्गजों समेत दुनिया की बड़ी तकनीकी कंपनियों को तगड़ा झटका दिया है। अमेरिकी लेबर सेक्रेटरी कीथ सोंडरलिंग ने वाइस प्रेसिडेंट जेडी वेंस के साथ मिलकर यह घोषणा की कि कॉग्निजेंट, इंफोसिस, टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज (TCS), विप्रो और HCL समेत कई बड़ी IT कंपनियों को 'परमानेंट लेबर सर्टिफिकेशन' (PERM) प्रोग्राम से सस्पेंड कर दिया गया है। इस फैसले के बाद अब सरकार इन कंपनियों की किसी भी नई ग्रीन कार्ड एप्लीकेशन को स्वीकार नहीं करेगी। इस फैसले का असर माइक्रोसॉफ्ट, एडोब और कैपजेमिनी जैसी कंपनियों पर भी पड़ने की बात कही गई है।
US Green Card News: क्यों हुई IT कंपनियों पर कार्रवाई?
- सोंडरलिंग के मुताबिक, सरकार इन कंपनियों के नए PERM आवेदनों को स्वीकार नहीं करेगी और लंबित आवेदनों पर भी फिलहाल कार्रवाई नहीं करेगी।
- उन्होंने दावा किया कि 2009 से इन कंपनियों ने करीब 30 लाख विदेशी कर्मचारियों के लिए अनुरोध किए।
- इस अवधि में 2.30 लाख से अधिक H-1B वीजा मंजूर हुए और एक लाख से ज्यादा PERM सर्टिफिकेशन जारी किए गए।
H-1B Visa: माइक्रोसॉफ्ट पर भी उठे सवाल
- अमेरिका का तर्क है कि ये कंपनियां स्थानीय अमेरिकी नागरिकों की नौकरियां छीनकर कम लागत वाले विदेशी कर्मचारियों को बढ़ावा दे रही हैं।
- जेडी वेंस ने माइक्रोसॉफ्ट की भर्ती प्रक्रिया पर सवाल उठाए और कहा, कंपनी ने 2025 में करीब 6,000 अमेरिकी कर्मचारियों को नौकरी से निकाला।
- कहा, लेकिन इसी दौरान उसे 6,000 से ज्यादा H-1B वीजा की मंजूरी मिली और उसने 3,682 PERM आवेदन दाखिल किए।
- वेंस ने आरोप लगाया कि इनमें से करीब 1,000 आवेदन उन पदों से जुड़े थे, जिन पर पहले अमेरिकी कर्मचारी काम करते थे।
- उन्होंने इस व्यवस्था को अमेरिकी कर्मचारियों के हितों के खिलाफ बताया। ये आंकड़े और आरोप अमेरिकी अधिकारियों के दावों पर आधारित हैं।
Trump Administration: H-1B Visa पर बढ़ी सख्ती
- ट्रंप प्रशासन का कहना है कि अमेरिकी नौकरियों की सुरक्षा उसकी प्राथमिकता है।
- पिछले महीने H-1B वीजा से जुड़े 1 लाख डॉलर के शुल्क वाले आदेश को एक और साल बढ़ाने की भी बात सामने आई थी।
- इससे भारतीय IT पेशेवरों और अमेरिका में कर्मचारियों को भेजने वाली कंपनियों के लिए लागत बढ़ने की आशंका है।
NASSCOM Reaction: भारतीय IT कंपनियों का क्या कहना है?
- इंडस्ट्री बॉडी NASSCOM ने कहा कि भारतीय टेक कंपनियां पिछले कुछ वर्षों में H-1B वीजा पर अपनी निर्भरता कम कर रही हैं।
- कंपनियां अमेरिका में स्थानीय लोगों को नौकरी देने और घरेलू वर्कफोर्स तैयार करने पर भी जोर दे रही हैं।
- NASSCOM के मुताबिक, H-1B वीजा अमेरिका में विशेष कौशल की कमी दूर करने में मदद करता है।
- संगठन ने यह भी कहा कि इमिग्रेशन और कुशल कर्मचारियों की आवाजाही को एक ही नजरिए से नहीं देखना चाहिए।


