क्या US-ईरान शांति समझौता सच में युद्ध का अंत है, या 60 दिन बाद फिर भड़क सकता है नया संकट? क्या होर्मुज खुलने से वैश्विक तेल संकट टल जाएगा? ईरान ने समझौते के बावजूद अमेरिका पर अविश्वास क्यों जताया, क्या 60 दिन का युद्धविराम खतरे में है? जब ट्रंप शांति की बात कर रहे हैं, तो नेतन्याहू ने गाज़ा, लेबनान और सीरिया से सेना न हटाने का ऐलान क्यों किया?
Donald Trump Iran Agreement: मध्य पूर्व (Middle East) में पिछले 107 दिनों से जारी भीषण तबाही और वैश्विक ऊर्जा संकट के बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक ऐसी घोषणा की है, जिसने पूरी दुनिया के बाजारों और कूटनीतिज्ञों को हैरान कर दिया है। रविवार को अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'ट्रुथ सोशल' पर लिखते हुए ट्रंप ने एलान किया कि संयुक्त राज्य अमेरिका और इस्लामिक रिपब्लिक ऑफ ईरान के बीच शांति समझौता पूरी तरह फाइनल हो चुका है। ट्रंप ने बिना समय गंवाए होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) को बिना किसी शुल्क के फिर से खोलने की मंजूरी दे दी है और अमेरिकी नौसैनिक नाकेबंदी को तुरंत हटाने का आदेश जारी कर दिया है। दुनिया भर के जहाजों को संदेश देते हुए उन्होंने लिखा, "अपने इंजन चालू करो। तेल का प्रवाह शुरू होने दो!"

JD Vance की स्विट्जरलैंड यात्रा क्यों बनी चर्चा का केंद्र?
इस ऐतिहासिक शांति समझौते को अमलीजामा पहनाने के लिए अब स्विट्जरलैंड की धरती को चुना गया है। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने साफ किया है कि अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस (JD Vance) आगामी शुक्रवार को स्विट्जरलैंड में इस समझौते पर आमने-सामने दस्तखत करने के लिए अमेरिकी प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व करेंगे। जेडी वेंस ने एक मीडिया इंटरव्यू में खुलासा किया है कि रविवार को इस समझौते पर डिजिटल रूप से हस्ताक्षर किए जा चुके हैं और इसका पूरा टेक्स्ट इस हफ्ते के आखिर तक दुनिया के सामने सार्वजनिक कर दिया जाएगा। हालांकि, इस समारोह में खुद ट्रंप शामिल होंगे या नहीं, इस पर सस्पेंस बरकरार है।

होर्मुज खुला, लेकिन क्या भरोसे की खाई भर पाएंगे अमेरिका और ईरान?
ट्रंप ने अपने बयान में होर्मुज जलडमरूमध्य को फिर से खोलने और अमेरिकी नौसैनिक नाकेबंदी हटाने का ऐलान किया। इसके साथ ही वैश्विक ऊर्जा बाजारों में राहत की लहर दौड़ गई। तेल आपूर्ति सामान्य होने की उम्मीदों ने अंतरराष्ट्रीय बाजारों को उत्साहित कर दिया है। हालांकि, तेहरान का रुख अभी भी पूरी तरह नरम नहीं दिख रहा। ईरान ने साफ कहा है कि समझौता ज्ञापन (MoU) के बाद लागू होने वाले 60 दिनों के युद्धविराम के दौरान अंतिम शर्तों पर बातचीत होगी। साथ ही उसने अमेरिका पर अपने "अविश्वास" को भी दोहराया है। यही वजह है कि इस समझौते को लेकर अनिश्चितता बनी हुई है।

ईरान का अविश्वास और 60 दिनों का अल्टीमेटम: क्या यह सिर्फ एक अस्थायी युद्धविराम है?
भले ही अमेरिका इस समझौते को अपनी बड़ी जीत मान रहा हो, लेकिन तेहरान के सुर अभी भी पूरी तरह बदले नहीं हैं। ईरान ने साफ कर दिया है कि यह केवल एक मेमोरेंडम ऑफ अंडरस्टैंडिंग (MoU) है, और इसके बाद मिलने वाले 60 दिनों के युद्धविराम (Ceasefire) के दौरान ही अंतिम समझौते की शर्तों पर असली बातचीत की जाएगी। ईरान ने वाशिंगटन पर अपना पुराना "अविश्वास" भी दोहराया है। यह युद्धविराम 4 जुलाई को ईरान के पूर्व सर्वोच्च नेता अयातुल्ला खामेनेई के अंतिम संस्कार के समय तक खिंच सकता है, जिनके विदाई समारोह और अंतिम संस्कार की प्रक्रिया 9 जुलाई को मशहद में संपन्न होगी। ऐसे में सवाल उठता है कि क्या 60 दिन बाद यह शांति समझौता टिक पाएगा?
नेतन्याहू की खुली बगावत: "हम गाजा, लेबनान और सीरिया से कदम पीछे नहीं हटाएंगे"
इस शांति समझौते के एलान के कुछ ही घंटों बाद इजराइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने एक ऐसा बयान दे दिया है, जिसने इस पूरी शांति प्रक्रिया पर एक बहुत बड़ा सवालिया निशान खड़ा कर दिया है। नेतन्याहू ने सोमवार को कड़े शब्दों में कहा कि इजराइली सैनिक गाजा, लेबनान और सीरिया में "जब तक जरूरी होगा" तब तक डटे रहेंगे। उधर ग्राउंड जीरो पर तनाव कम नहीं हुआ है; हिज्बुल्लाह ने दावा किया है कि उसने दक्षिणी लेबनान के नबातिह के पास रॉकेट और ड्रोन हमलों के जरिए दो इजराइली मर्कावा टैंकों को पीछे खदेड़ दिया है। सहयोगी देशों के इस रुख से साफ है कि ट्रंप की राह इतनी आसान नहीं होने वाली।

प्रतिबंधों पर सस्पेंस और ट्रंप की आखिरी धमकी: "शर्तें टूटीं, तो वापस वहीं पहुंच जाएंगे"
डोनाल्ड ट्रंप ने इस समझौते को पूर्व राष्ट्रपति ओबामा की डील से कहीं बेहतर और एक "दमदार दस्तावेज" बताया है। जब ट्रंप से पूछा गया कि क्या इसमें ईरान को प्रतिबंधों (Sanctions) में कोई ढील दी गई है, तो उन्होंने दो टूक जवाब दिया, "नहीं, ऐसा नहीं है। उन्हें अपने व्यवहार में बदलाव लाना होगा।" इसके साथ ही ट्रंप ने ईरान को चेतावनी भरे लहजे में धमकी भी दे डाली है कि अगर ईरान ने समझौते की शर्तों का पालन नहीं किया, तो अमेरिका "वहीं वापस चला जाएगा जहां से शुरुआत हुई थी।" उधर अमेरिका के भीतर भी राजनीति गरमा गई है, और डेमोक्रेटिक नेता चक शूमर ने इस गोपनीय समझौते पर कांग्रेस के सामने तुरंत पारदर्शिता बरतने की मांग की है।


