अमेरिका-ईरान वार्ता के बीच ट्रम्प ने ईरान को हिजबुल्लाह पर लगाम लगाने की चेतावनी दी। इजराइल ने भी लेबनान में फिर संघर्ष की आशंका जताई।

Donald Trump Warns Iran on Hezbollah: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने ईरान को चेतावनी देते हुए कहा है कि वह लेबनान में सक्रिय अपने प्रॉक्सी संगठन हिजबुल्लाह की गतिविधियों पर नियंत्रण रखे। ट्रम्प ने सोशल मीडिया पर जारी एक पोस्ट में कहा कि यदि ईरान हिजबुल्लाह को नहीं रोकता है, तो अमेरिका उस पर पिछले सप्ताह किए गए हमलों से भी ज्यादा बड़ा हमला कर सकता है। इसी बीच, अमेरिका और ईरान के मध्य स्विट्जरलैंड के बुर्गेनस्टॉक में महत्वपूर्ण बातचीत शुरू हो गई है। दोनों देशों के प्रतिनिधि क्षेत्रीय तनाव कम करने और संबंधों को बेहतर बनाने की संभावनाओं पर चर्चा कर रहे हैं।

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इजराइली सेना प्रमुख ने दी नई चेतावनी

उधर, इजराइली सेना प्रमुख इयाल जमीर ने कहा है कि लेबनान में लागू युद्धविराम बेहद नाजुक स्थिति में है और हिजबुल्लाह के साथ संघर्ष दोबारा शुरू हो सकता है। उन्होंने सैनिकों को किसी भी संभावित परिस्थिति के लिए पूरी तरह तैयार रहने का निर्देश दिया। जमीर ने कहा कि हिजबुल्लाह को हाल के संघर्षों में भारी नुकसान हुआ है और इजराइली सेना उसे फिर से मजबूत होने का मौका नहीं देना चाहती।

हिजबुल्लाह की स्थिति पर इजराइल का दावा

इयाल जमीर ने कहा कि हिजबुल्लाह इस समय कठिन दौर से गुजर रहा है। उनके मुताबिक संगठन को सैन्य और रणनीतिक स्तर पर बड़ा झटका लगा है। उन्होंने कहा कि इजराइल लगातार स्थिति पर नजर बनाए हुए है और किसी भी खतरे का जवाब देने के लिए तैयार है।

सर्वे में इजराइलियों ने समझौते को लेकर जताई राय

अमेरिका और ईरान के बीच हुए समझौते को लेकर इजराइल में कराए गए एक सर्वे में बड़ी संख्या में लोगों ने माना कि इस समझौते से ईरान को अधिक फायदा हुआ है। सर्वे के अनुसार, 92% इजराइली नागरिकों का मानना है कि युद्ध के बाद हुए इस समझौते से तेहरान को आर्थिक और कूटनीतिक लाभ मिला, जबकि इजराइल को अपेक्षित राजनीतिक बढ़त हासिल नहीं हो सकी।

ट्रम्प की भूमिका को अधिक प्रभावी मान रहे इजराइली

सर्वे में शामिल 78% लोगों ने यह भी माना कि इस पूरे मामले में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प की भूमिका इजराइली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू की तुलना में अधिक प्रभावशाली रही। प्रतिभागियों का मानना है कि अंतिम समझौते की दिशा तय करने और वार्ता को आगे बढ़ाने में वॉशिंगटन की भूमिका अधिक निर्णायक रही, जबकि इजराइल की अपेक्षाकृत सीमित भूमिका दिखाई दी।