America Iran War News: अमेरिका-ईरान तनाव के बीच अब डिसैलिनेशन प्लांट भी निशाने पर हैं। जानिए पानी की सप्लाई क्यों खतरे में है, इससे किन देशों पर सबसे ज्यादा असर पड़ेगा।

US-Iran Conflict: अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव ने अब एक नया और खतरनाक मोड़ ले लिया है। पहले हमले तेल ठिकानों और सैन्य ठिकानों तक सीमित थे, लेकिन अब पीने के पानी की सप्लाई भी जंग की चपेट में आती दिख रही है। शनिवार को ईरान ने दावा किया है कि अमेरिका ने होर्मोजगान प्रांत में स्थित बोंजी डिसैलिनेशन प्लांट पर हवाई हमला किया। इस हमले के बाद करीब 20 गांवों के लगभग 10 हजार लोगों तक पीने का पानी पहुंचना बंद हो गया। हालांकि, इस दावे की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।

कुवैत ने भी लगाया गंभीर आरोप

दूसरी तरफ, ईरान के पड़ोसी देश कुवैत ने दावा किया है कि ईरान ने लगातार दूसरे दिन उसके वॉटर प्लांट पर हमला किया। कुवैत के लिए यह बहुत बड़ी मुसीबत है, क्योंकि वहां की 90% आबादी पीने के पानी के लिए इन्हीं प्लांट्स पर निर्भर है। कुवैत सरकार का कहना है कि अगर ये हमले न रुके, तो उनके देश में लोगों का जीना मुश्किल हो जाएगा।

डिसैलिनेशन प्लांट क्या होता है?

डिसैलिनेशन प्लांट ऐसी जगह होती है जहां समुद्र के खारे पानी से नमक और दूसरी अशुद्धियां हटाकर उसे पीने लायक बनाया जाता है। खाड़ी के कई देशों में बारिश बेहद कम होती है। इसलिए वहां के लोग बड़ी मात्रा में इन्हीं प्लांट्स से मिलने वाले पानी पर निर्भर रहते हैं।

डिसैलिनेशन प्लांट पर किन देशों की सबसे ज्यादा निर्भरता है?

बहरीन- 100%

कतर- 99%

कुवैत- 90%

ओमान- 86%

सऊदी अरब- 70%

UAE- 42%

ईरान- 3%

शांति समझौता फेल, ट्रंप का बड़ा बयान

अभी पिछले महीने ही दोनों देशों के बीच जंग रोकने के लिए 'इस्लाबाद समझौता' हुआ था, लेकिन अब ईरान ने साफ कह दिया है कि अमेरिका ने शर्तों को तोड़ा है, इसलिए वे भी अब इस समझौते को नहीं मानेंगे। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भी कह दिया है कि उनके हिसाब से दोनों देशों के बीच हुआ युद्धविराम अब खत्म हो चुका है। खबरों की मानें तो ट्रंप ने अपने अधिकारियों के साथ एक सीक्रेट मीटिंग की है, जिसमें ईरान के बिजलीघरों, न्यूक्लियर ठिकानों और पहाड़ों के अंदर बने सैन्य अड्डों पर बड़े हमले करने की योजना बनाई जा रही है। इसके लिए अमेरिका दर्जनों लड़ाकू विमान भी इजराइल भेजने की तैयारी में है।