ईरान के साथ संघर्ष में अमेरिका ने अपनी लंबी दूरी की मिसाइलों का बड़ा हिस्सा इस्तेमाल कर लिया है। इससे हथियारों की भारी कमी हो गई है, जो चीन जैसे दुश्मन से भविष्य के युद्ध की तैयारी पर सवाल उठाती है। हालांकि, राष्ट्रपति ट्रंप ने इन चिंताओं को खारिज किया है।

वॉशिंगटन: ईरान के साथ महीनों से चल रही जंग में अमेरिका ने अपनी लंबी दूरी की हमलावर मिसाइलों का एक बड़ा हिस्सा इस्तेमाल कर लिया है। रॉयटर्स की एक रिपोर्ट के मुताबिक, अमेरिका अब हथियारों की भारी कमी का सामना कर रहा है। इस रिपोर्ट के बाद ये सवाल उठने लगे हैं कि अगर भविष्य में चीन जैसे ताकतवर दुश्मन से कोई जंग छिड़ती है, तो अमेरिकी सेना उसके लिए कितनी तैयार है।

रिपोर्ट में बताया गया है कि अमेरिका ने ईरान के खिलाफ खास तौर पर जमीन से दागी जाने वाली 'ATACMS' और नई पीढ़ी की 'प्रिसिजन स्ट्राइक मिसाइलों' का जमकर इस्तेमाल किया है। अब इनका ज्यादातर स्टॉक खत्म होने की कगार पर है। दरअसल, ट्रंप प्रशासन ने अपने सैनिकों को हताहत होने से बचाने के लिए एक खास रणनीति अपनाई थी। इसके तहत, ईरान की हवाई सीमा में लड़ाकू विमान भेजने के बजाय, लंबी दूरी की मिसाइलों से हमले किए गए।

रक्षा अध्ययन केंद्रों के अनुसार, इस जंग में अमेरिका अपने टॉमहॉक क्रूज मिसाइलों का आधा जखीरा इस्तेमाल कर चुका है। इसके अलावा, 65 फीसदी पेट्रियट इंटरसेप्टर और करीब 38 फीसदी 'थाड' (THAAD) जैसे आधुनिक एयर डिफेंस सिस्टम भी इस्तेमाल हो चुके हैं। हालात ये हैं कि मिडिल ईस्ट में तैनात यूएस सेंट्रल कमांड के पास मिसाइलों का स्टॉक लगभग खत्म हो गया है और अब दुनिया के दूसरे हिस्सों से यहां मिसाइलें मंगवाई जा रही हैं।

हालांकि, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने हथियारों की कमी से जुड़ी चिंताओं को सिरे से खारिज कर दिया है। उन्होंने कहा, "दुनिया में किसी भी देश से ज्यादा हथियार और गोला-बारूद अमेरिका के पास है। हमारे पास जरूरत से ज्यादा ताकत है।" ट्रंप ने यह भी जोड़ा कि अमेरिकी डिफेंस कंपनियां अब तक के सबसे तेज रफ्तार से नई मिसाइलें बना रही हैं। वहीं, रक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि उत्पादन बढ़ाने के बावजूद, अगर कोई लंबा और बड़ा युद्ध छिड़ता है तो खत्म हुए हथियारों के भंडार को फिर से भरने में कई साल लग जाएंगे।