Uttar Pradesh Jal Jeevan Mission: यूपी आर्थिक समीक्षा 2025-26 में जल जीवन मिशन की बड़ी सफलता सामने आई है। सौर ऊर्जा आधारित परियोजनाओं से 91% ग्रामीण घरों तक नल से शुद्ध पेयजल पहुंच चुका है, जिससे करोड़ों लोगों को राहत और पर्यावरण को संरक्षण मिला है।

उत्तर प्रदेश की ग्रामीण तस्वीर तेजी से बदल रही है। कभी हैंडपंप और टैंकर पर निर्भर रहने वाले गांव आज नल से शुद्ध पेयजल की ओर बढ़ चुके हैं। उत्तर प्रदेश आर्थिक समीक्षा 2025-26 की रिपोर्ट इस बदलाव की ठोस और भरोसेमंद तस्वीर पेश करती है, जिसमें जल जीवन मिशन और स्वच्छ पेयजल योजनाओं की अभूतपूर्व उपलब्धियों का विस्तृत विवरण सामने आया है। यह केवल बुनियादी सुविधा का विस्तार नहीं, बल्कि स्वास्थ्य, पर्यावरण और ग्रामीण अर्थव्यवस्था से जुड़ा एक बड़ा सामाजिक परिवर्तन है।

बसाहटों से आगे बढ़कर हर परिवार तक पानी

आर्थिक समीक्षा के अनुसार, जल जीवन मिशन के तहत अब पेयजल आपूर्ति केवल बस्तियों या चुनिंदा क्षेत्रों तक सीमित नहीं रही। सरकार का फोकस हर ग्रामीण परिवार तक नियमित और शुद्ध जल पहुंचाने पर है। मिशन के अंतर्गत ग्रामीण क्षेत्रों में प्रति व्यक्ति प्रतिदिन औसतन 55 लीटर शुद्ध पेयजल उपलब्ध कराने की दिशा में लगातार काम किया जा रहा है, जिससे जीवन स्तर और स्वास्थ्य सुरक्षा दोनों को मजबूती मिल रही है।

यह भी पढ़ें: Uttar Pradesh Education Growth: स्कूल से यूनिवर्सिटी तक शिक्षा सुधार, बजट वृद्धि और डिजिटल बदलाव की कहानी

बिजली की समस्या का समाधान बना सौर ऊर्जा

ग्रामीण पेयजल योजनाओं में सबसे बड़ी चुनौती निर्बाध बिजली आपूर्ति रही है। इस समस्या को देखते हुए दुर्गम और दूरस्थ इलाकों में सौर ऊर्जा आधारित पेयजल परियोजनाओं को प्राथमिकता दी गई। जनवरी 2026 तक प्रदेश में संचालित 40,955 परियोजनाओं में से 33,157 परियोजनाएं सौर ऊर्जा से चल रही हैं, जिनकी कुल क्षमता करीब 900 मेगावाट है।

इन परियोजनाओं के जरिए 67,013 गांवों को सीधा लाभ मिलेगा और लगभग 13.30 करोड़ ग्रामीण आबादी को सुरक्षित पेयजल उपलब्ध कराया जाएगा। सौर ऊर्जा के इस्तेमाल से न सिर्फ परियोजनाएं समय पर पूरी हो रही हैं, बल्कि संचालन लागत में भी भारी कमी आई है।

हजारों करोड़ की बचत, पर्यावरण को भी राहत

आर्थिक समीक्षा में अनुमान लगाया गया है कि सौर ऊर्जा आधारित व्यवस्था से अगले 30 वर्षों में संचालन लागत में करीब 37,395 करोड़ रुपये की बचत होगी। इसके साथ ही लगभग 13 लाख मीट्रिक टन कार्बन डाइऑक्साइड उत्सर्जन में कमी आएगी। पर्यावरण संरक्षण के लिहाज से यह उपलब्धि प्रदेश के लिए एक मजबूत उदाहरण मानी जा रही है।

91 प्रतिशत घरों तक पहुंचा नल से जल

जल जीवन मिशन के तहत दिसंबर तक 2.67 करोड़ घरों की 16.69 करोड़ ग्रामीण आबादी को शुद्ध पेयजल से जोड़ने का लक्ष्य तय किया गया था। इसके मुकाबले दिसंबर 2025 तक 2.43 करोड़ घरेलू नल कनेक्शन दिए जा चुके हैं, जिससे 15.12 करोड़ ग्रामीण लोगों को लाभ मिला है। यह लक्ष्य का करीब 91 प्रतिशत है।

वर्तमान में प्रदेश के 46,303 राजस्व ग्रामों में नियमित, गुणवत्तायुक्त और पर्याप्त मात्रा में पेयजल आपूर्ति सुनिश्चित की जा रही है, जो योजना के प्रभावी क्रियान्वयन को दर्शाता है।

युवा और महिलाएं बने जल मिशन की रीढ़

जल जीवन मिशन केवल अवसंरचना तक सीमित नहीं है, बल्कि इससे बड़े पैमाने पर रोजगार और कौशल विकास भी जुड़ा है। जनवरी 2026 तक 7.56 लाख युवाओं को इलेक्ट्रिशियन, पंप ऑपरेटर, प्लंबर, फिटर और मोटर मैकेनिक जैसे कार्यों का प्रशिक्षण दिया गया है। इसके साथ ही 5.51 लाख महिलाओं को फील्ड टेस्ट किट के माध्यम से जल गुणवत्ता परीक्षण के लिए प्रशिक्षित किया गया है, जिससे वे अपने गांवों में जल सुरक्षा की अहम जिम्मेदारी निभा रही हैं।

स्वच्छता और जागरूकता पर समान फोकस

राज्य पेयजल एवं स्वच्छता मिशन द्वारा स्वास्थ्य सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए ‘स्टॉप डायरिया कैंपेन’ जैसे अभियानों को गांव-गांव तक पहुंचाया गया है। ‘अपने पानी को जानो’, पानी के रिसाव की पहचान और समय पर मरम्मत जैसे कार्यक्रम जिला, ब्लॉक और ग्राम स्तर पर चलाए जा रहे हैं, ताकि जलजनित बीमारियों पर प्रभावी नियंत्रण किया जा सके।

समग्र विकास की दिशा में मजबूत कदम

आर्थिक समीक्षा 2025-26 के आंकड़े यह साफ संकेत देते हैं कि उत्तर प्रदेश में जल जीवन मिशन केवल एक सरकारी योजना नहीं, बल्कि ग्रामीण जीवन की बुनियादी जरूरतों को सुरक्षित करने का मजबूत आधार बन चुका है। शुद्ध जल, स्वच्छता, रोजगार और पर्यावरण—इन सभी मोर्चों पर यह मिशन प्रदेश को दीर्घकालिक विकास की ओर ले जाता दिख रहा है।

यह भी पढ़ें: UP Industrial Development: आर्थिक समीक्षा में यूपी की बड़ी उपलब्धियां, उद्योग-निर्यात-निवेश में तेजी