योगी सरकार के विजन के तहत फतेहपुर में एआई आधारित स्मार्ट वैक्सीनेशन ट्रैकिंग सिस्टम शुरू किया गया है। पायलट प्रोजेक्ट में टीकाकरण दर 95 प्रतिशत तक पहुंची है। यह यूपी का पहला जिला है जहां AI से टीकाकरण की निगरानी हो रही है।

लखनऊ। योगी सरकार प्रदेश में स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत और प्रभावी बनाने के लिए लगातार तकनीक का सहारा ले रही है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ स्वास्थ्य सेवाओं में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और आधुनिक तकनीक के अधिकतम उपयोग पर जोर दे रहे हैं, ताकि आमजन तक बेहतर और समयबद्ध स्वास्थ्य सुविधाएं पहुंच सकें। मुख्यमंत्री के इसी विजन को जमीन पर उतारते हुए फतेहपुर जिले ने एक नई मिसाल पेश की है।

फतेहपुर में एआई आधारित स्मार्ट वैक्सीनेशन ट्रैकिंग सिस्टम लागू

फतेहपुर जिले में बच्चों के टीकाकरण की निगरानी के लिए एआई आधारित एप ‘स्मार्ट वैक्सीनेशन ट्रैकिंग सिस्टम’ विकसित किया गया है। इसके साथ ही फतेहपुर उत्तर प्रदेश का पहला जिला बन गया है, जहां शत-प्रतिशत टीकाकरण लक्ष्य को हासिल करने के लिए आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस का उपयोग किया जा रहा है। फिलहाल इस सिस्टम को पायलट प्रोजेक्ट के तौर पर आकांक्षात्मक ब्लॉक हथगाम में शुरू किया गया है। सकारात्मक परिणाम मिलने के बाद अब इसे पूरे जिले में लागू करने की तैयारी की जा रही है।

पायलट प्रोजेक्ट से टीकाकरण दर 95 प्रतिशत तक पहुंची

एआई आधारित इस एप के उपयोग से हथगाम ब्लॉक में टीकाकरण की स्थिति में उल्लेखनीय सुधार देखने को मिला है। जहां पहले टीकाकरण की दर अपेक्षाकृत कम थी, वहीं अब यह बढ़कर लगभग 95 प्रतिशत तक पहुंच गई है। यह परिणाम दर्शाता है कि तकनीक के सही उपयोग से स्वास्थ्य सेवाओं में बड़ा बदलाव संभव है।

शत-प्रतिशत टीकाकरण सुनिश्चित करना एप का मुख्य उद्देश्य

फतेहपुर के जिलाधिकारी रविंद्र सिंह ने बताया कि मुख्यमंत्री के स्वास्थ्य सेवाओं को तकनीक से जोड़ने के विजन के तहत यह एआई आधारित एप विकसित किया गया है। इसे 1 सितंबर से आकांक्षात्मक ब्लॉक हथगाम में लागू किया गया।

इस एप के माध्यम से नवजात शिशुओं और बच्चों के टीकाकरण से जुड़ी सभी जरूरी जानकारी व्हाट्सएप संदेशों के जरिए अभिभावकों को समय पर भेजी जा रही है। साथ ही पास में होने वाले वीएचएनडी (Village Health and Nutrition Day) सत्रों की जानकारी भी दी जा रही है, जिससे अभिभावक समय पर बच्चों का टीकाकरण करा सकें। इस पहल का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि कोई भी बच्चा अपने पहले वर्ष में आवश्यक टीकों से वंचित न रहे।

एआई से टीकाकरण में पिछड़े क्षेत्रों की हो रही पहचान

डीएम रविंद्र सिंह ने बताया कि इस एप की सबसे बड़ी खासियत रियल टाइम मॉनिटरिंग और एआई आधारित डाटा एनालिसिस है। इसके जरिए उन क्षेत्रों की पहचान आसानी से की जा रही है, जहां टीकाकरण की दर कम है या बच्चे किसी कारण से टीकाकरण से छूट रहे हैं। एआई विश्लेषण के माध्यम से न सिर्फ समस्या वाले क्षेत्रों की पहचान होती है, बल्कि इसके पीछे के कारण भी सामने आते हैं। इसके आधार पर तुरंत सुधारात्मक कदम उठाए जा रहे हैं।

रिमाइंडर सिस्टम से छूटे टीकाकरण की समस्या का समाधान

एप के माध्यम से बच्चों की माताओं को टीकाकरण से पहले स्वचालित रिमाइंडर संदेश भेजे जाते हैं। इससे जानकारी के अभाव या भूलवश टीकाकरण छूटने की समस्या काफी हद तक दूर हो रही है। इसके साथ ही टीकों की मांग और आपूर्ति प्रबंधन भी इस सिस्टम से अधिक आसान, सटीक और मजबूत हुआ है।

ANM के लिए अलग मोबाइल एप, ओसीआर तकनीक का उपयोग

स्वास्थ्य कर्मियों की सुविधा को ध्यान में रखते हुए एएनएम (ANM) के लिए अलग से एक मोबाइल एप तैयार किया गया है। इसमें एएनएम को रियल टाइम ड्यू लिस्ट मिलती है, जिससे उन्हें स्पष्ट रूप से पता चलता है कि किस क्षेत्र में किन बच्चों का टीकाकरण बाकी है।

इसके अलावा ओसीआर (Optical Character Recognition) तकनीक का उपयोग करते हुए केवल एमसीपी कार्ड की फोटो अपलोड कर बच्चे का टीकाकरण स्टेटस अपडेट किया जा रहा है। इससे मैनुअल एंट्री की त्रुटियां कम हुई हैं और काम की गति भी तेज हुई है।

स्वास्थ्य विभाग, आमजन और WHO से संवाद के बाद एप का विकास

जिलाधिकारी रविंद्र सिंह ने बताया कि इस एआई आधारित एप को विकसित करने से पहले स्वास्थ्य विभाग, आमजन और विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) से विस्तृत संवाद किया गया। सभी के सुझावों को शामिल कर ऐसा सिस्टम तैयार किया गया है, जो व्यवहारिक भी है और प्रभावी भी। यह पहल उत्तर प्रदेश में डिजिटल हेल्थ और स्मार्ट गवर्नेंस की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।