वेनेज़ुएला, जापान और कैलिफोर्निया में कुछ घंटों के भीतर आए तीन बड़े भूकंपों से दुनिया में दहशत फैल गई। विशेषज्ञों ने कहा कि ये घटनाएं आपस में जुड़ी नहीं, बल्कि अलग-अलग टेक्टोनिक गतिविधियां थीं।
नई दिल्ली/काराकास: क्या हमारी धरती के भीतर कोई बहुत बड़ा और खौफनाक बदलाव हो रहा है? यह सवाल इस वक्त पूरी दुनिया के वैज्ञानिकों और आम लोगों के जेहन में तैर रहा है। गुरुवार का दिन इतिहास के पन्नों में एक अत्यंत डरावने भू-वैज्ञानिक घटनाक्रम के रूप में दर्ज हो गया है। महज कुछ ही घंटों के भीतर, दुनिया के अलग-अलग हिस्सों में तीन ज़बरदस्त और शक्तिशाली भूकंप आए। वेनेज़ुएला, जापान और यूनाइटेड स्टेट्स (कैलिफ़ोर्निया) जैसे तीन अलग-अलग महाद्वीपों में आई इस प्राकृतिक आपदा ने वैश्विक स्तर पर इमरजेंसी रिस्पॉन्स सिस्टम को एक्टिव कर दिया। इंटरनेट और सोशल मीडिया पर इस बात को लेकर सस्पेंस गहरा गया है कि क्या दुनिया के खात्मे की कोई अदृश्य चेन रिएक्शन शुरू हो चुकी है?

वेनेज़ुएला में 'सिस्मिक डबलट' का कहर: 1 लाख मौतों का खौफनाक साया!
इस त्रिकोणीय तबाही की शुरुआत और सबसे वीभत्स रूप दक्षिण अमेरिकी देश वेनेज़ुएला के उत्तरी तट पर देखने को मिला। यहाँ प्रकृति का एक ऐसा दुर्लभ और जानलेवा रूप सामने आया, जिसे वैज्ञानिक 'सिस्मिक डबलट' (Doublet Earthquake) कहते हैं। इसका मतलब है कि एक ही टेक्टोनिक प्लेट बाउंड्री पर लगभग एक साथ दो महा-भूकंपों का आना। इसकी भयावह क्रोनोलॉजी ने सबको स्तब्ध कर दिया:
- पहला प्रहार: रिक्टर स्केल पर 7.2 तीव्रता (फोरशॉक) के भूकंप ने गगनचुंबी इमारतों को हिलाकर रख दिया।
- 39 सेकंड का मौत का सस्पेंस: लोग अभी संभल भी नहीं पाए थे कि ठीक 39 सेकंड बाद 7.5 तीव्रता का दूसरा और मुख्य झटका (मेनशॉक) आया।
यूएस जियोलॉजिकल सर्वे (USGS) के शुरुआती अनुमानों ने पूरी दुनिया को हिलाकर रख दिया है। विशेषज्ञों के मुताबिक, इस दोहरे प्रहार के कारण मरने वालों की संख्या 10,000 से लेकर 100,000 (1 लाख) से भी ज़्यादा हो सकती है। काराकास के चाकाओ जिले के मेयर ने आधिकारिक तौर पर मौतों की पुष्टि की है। राजधानी का मुख्य 'साइमन बोलिवर इंटरनेशनल एयरपोर्ट' पूरी तरह मलबे में तब्दील हो चुका है, जहां पैसेंजर टर्मिनल की छत गिर गई है। धमाकों को रोकने के लिए कई इलाकों की गैस सप्लाई बंद कर दी गई है और मलबे के नीचे दबी जिंदगियों को ढूंढने के लिए 20 आफ्टरशॉक्स के बीच रेस्क्यू टीमें जंग लड़ रही हैं।
जापान में लेवल 6-प्लस का हिंसक झटका: खड़े रहना भी हुआ नामुमकिन!
वेनेज़ुएला अभी मलबे के ढेर में अपनी जिंदगियां तलाश ही रहा था कि कुछ ही घंटों बाद प्रशांत महासागर के दूसरी तरफ स्थित जापान का उत्तर-पूर्वी तट अचानक थर्रा उठा। जापान में 6.9 तीव्रता का एक बेहद शक्तिशाली भूकंप रिकॉर्ड किया गया। USGS के अनुसार, इसका केंद्र इवाते प्रीफेक्चर के पास जमीन से 50 किलोमीटर की गहराई पर था। इस भूकंप का सबसे खतरनाक रूप पड़ोसी आओमोरी प्रीफेक्चर में देखा गया, जहां झटके की तीव्रता जापान के सेवन-पॉइंट सिस्मिक स्केल पर लेवल 6-प्लस तक पहुंच गई। यह तीव्रता इतनी भीषण होती है कि इंसानों के लिए जमीन पर सीधा खड़ा रह पाना भी नामुमकिन हो जाता है।
गनीमत यह रही कि इस बार सुनामी की चेतावनी की ज़रूरत नहीं पड़ी। एहतियात के तौर पर तोहोकू शिंकानसेन (बुलेट ट्रेन) को रोक दिया गया और एक्सप्रेसवे बंद कर दिए गए। न्यूक्लियर रेगुलेशन अथॉरिटी के मुताबिक, ओनागावा और हिगाशिदोरी न्यूक्लियर पावर प्लांट पूरी तरह सुरक्षित हैं।
कैलिफोर्निया में भी महसूस हुए तेज झटके
इसी दौरान अमेरिका के कैलिफोर्निया में 5.6 तीव्रता का भूकंप आया। इसका केंद्र रेडवुड वैली के पास बताया गया। राज्य की आपातकालीन एजेंसियों ने नुकसान का आकलन शुरू किया, लेकिन किसी बड़े नुकसान या मौत की तत्काल खबर सामने नहीं आई। उत्तरी कैलिफ़ोर्निया के गवर्नर गेविन न्यूज़ॉम के ऑफिस को तुरंत इमरजेंसी अलर्ट जारी करना पड़ा।
क्या आपस में जुड़ी हैं कड़ियां? मशहूर सीस्मोलॉजिस्ट ने खोला रहस्य
एक ही दिन में तीन महाद्वीपों का इस तरह दहल जाना किसी बड़े वैश्विक खतरे का संकेत लग रहा था। इंटरनेट पर यह थ्योरी तेज़ी से फैलने लगी कि क्या ये भूकंप किसी अदृश्य चेन रिएक्शन का हिस्सा हैं? डॉ. लूसी जोन्स (मशहूर कैलटेक सीस्मोलॉजिस्ट) का बड़ा बयान: "भूकंपों के समय का एक ही दिन होना महज एक इत्तेफाक है। घड़ी की सुइयों के साथ ही इनका संबंध खत्म हो जाता है। हज़ारों किलोमीटर दूर आने वाले बड़े भूकंप कभी भी एक-दूसरे को ट्रिगर नहीं करते।"
डॉ. जोन्स ने सीएनएन से बातचीत में इस रहस्य पर से पर्दा उठाते हुए साफ किया कि ये तीनों भूकंप पूरी तरह से अलग-अलग फॉल्ट सिस्टम और टेक्टोनिक प्लेट बाउंड्री पर आए हैं, इसलिए इनका आपस में जुड़ा होना भू-वैज्ञानिक रूप से नामुमकिन है। दरअसल, जापान दुनिया के सबसे संवेदनशील सीस्मिक ज़ोन में आता है, वेनेज़ुएला सक्रिय कैरिबियन-दक्षिण अमेरिकी प्लेट बाउंड्री पर है, और कैलिफ़ोर्निया खतरनाक सैन एंड्रियास फॉल्ट सिस्टम पर बसा है।
दुनिया के लिए बढ़ता भूकंप जोखिम
जापान, वेनेजुएला और कैलिफोर्निया तीनों ही भूकंपीय रूप से सक्रिय क्षेत्र हैं। जापान पैसिफिक रिंग ऑफ फायर में स्थित होने के कारण दुनिया के सबसे ज्यादा भूकंप प्रभावित देशों में शामिल है। वहीं वेनेजुएला कैरेबियन और दक्षिण अमेरिकी प्लेटों की सीमा के पास स्थित है, जबकि कैलिफोर्निया सैन एंड्रियास फॉल्ट सिस्टम के लिए जाना जाता है। हालांकि एक ही दिन में तीन बड़े भूकंपों ने दुनिया का ध्यान जरूर खींचा, लेकिन वैज्ञानिकों का कहना है कि यह किसी वैश्विक भूकंप श्रृंखला का संकेत नहीं है, बल्कि पृथ्वी की प्राकृतिक भूगर्भीय गतिविधियों का हिस्सा है।


