5 दिनों की राजनीतिक उठापटक, DMK-AIADMK की गुप्त हलचल, गवर्नर से 4 मुलाकातें और आखिरी मिनट में मिले समर्थन के बाद आखिरकार TVK प्रमुख विजय तमिलनाडु के नए मुख्यमंत्री बनने जा रहे हैं। VCK, कांग्रेस, CPI(M) और IUML के साथ 121 विधायकों का आंकड़ा जुटाकर विजय ने 70 साल पुरानी द्रविड़ राजनीति की पकड़ को चुनौती दी। अब सबकी नजर 13 मई के फ्लोर टेस्ट पर है।
Vijay Tamil Nadu CM: तमिलनाडु की सियासत में पिछले 70 सालों से चला आ रहा DMK और AIADMK का एकाधिकार आज इतिहास के पन्नों में दर्ज होने जा रहा है। तमिलगा वेट्री कज़गम (TVK) के प्रमुख और सुपरस्टार चंद्रशेखर जोसेफ विजय आज सुबह 10 बजे जवाहरलाल नेहरू इंडोर स्टेडियम में तमिलनाडु के अगले मुख्यमंत्री के रूप में शपथ लेंगे। 4 मई को आए चुनावी नतीजों के बाद शुरू हुआ 5 दिनों का सस्पेंस, रिजॉर्ट पॉलिटिक्स की सुगबुगाहट और गठबंधन का गणित आखिरकार 'थलापति' विजय के पक्ष में आकर थमा है। इस दौरान कांग्रेस सांसद राहुल गांधी भी मौजूद रहेंगे।

बहुमत का जादुई आंकड़ा: जब 'अंकगणित' ने विजय को छकाया
चुनावी नतीजों में TVK 108 सीटों के साथ सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी थी, लेकिन बहुमत के लिए ज़रूरी 118 के आंकड़े से वह 10 कदम दूर थी। पिछले 5 दिनों में विजय ने राजभवन के तीन चक्कर लगाए, लेकिन हर बार खाली हाथ लौटना पड़ा। कभी उनके पास 113 विधायकों का समर्थन था, तो कभी 116। सस्पेंस तब और गहरा गया जब गठबंधन की छोटी पार्टियां-VCK और IUML-अपनी मांगों को लेकर अड़ी रहीं। एक समय ऐसा भी आया जब गलियारों में चर्चा शुरू हो गई कि धुर विरोधी DMK और AIADMK हाथ मिला सकते हैं, जिससे TVK खेमे में घबराहट फैल गई थी।
मौजूदा सीट गणित
- TVK-108
- कांग्रेस-5
- CPI-2
- CPI(M)-2
- VCK-2
- IUML-2
- कुल-121 विधायक
राजभवन का 'क्लाइमेक्स': गवर्नर की यात्रा और आखिरी मिनट का यू-टर्न
शनिवार की शाम किसी सस्पेंस थ्रिलर फिल्म के क्लाइमेक्स जैसी थी। जब VCK और IUML का समर्थन पत्र लेकर विजय राजभवन पहुंचने वाले थे, तभी खबर आई कि गवर्नर राजेंद्र अर्लेकर केरल के लिए रवाना हो रहे हैं और उन्होंने मिलने का समय नहीं दिया है। समर्थकों की धड़कनें थम गईं, लेकिन कुछ ही मिनटों में गवर्नर ने अपना केरल दौरा रद्द कर दिया। विजय ने कांग्रेस, वामपंथी दलों और क्षेत्रीय सहयोगियों के साथ चौथी बार दावा पेश किया और आखिरकार उन्हें सरकार बनाने का न्योता मिल गया।
द्रविड़ वर्चस्व का अंत: 1967 के बाद पहली 'तीसरी राह'
विजय का मुख्यमंत्री बनना तमिलनाडु के राजनीतिक भूगोल को बदल देगा। 1967 के बाद यह पहली बार है जब कोई ऐसी सरकार सत्ता में आ रही है जो न तो DMK का हिस्सा है और न ही AIADMK का। यह मतदाताओं की सोच में आए उस बुनियादी बदलाव का संकेत है, जहाँ वे अब पारंपरिक द्रविड़ राजनीति से इतर एक 'धर्मनिरपेक्ष और लोकतांत्रिक' विकल्प की तलाश कर रहे थे। राहुल गांधी जैसे दिग्गज नेताओं की शपथ ग्रहण में मौजूदगी इस नई सरकार की राष्ट्रीय महत्ता को भी दर्शाती है।
विजय कैबिनेट में कौन-कौन?
सूत्रों के मुताबिक, विजय अपनी कैबिनेट में अनुभवी चेहरों और युवाओं का संतुलन बनाना चाहते हैं।
- विजय: स्वयं गृह मंत्रालय अपने पास रख सकते हैं।
- सेंगोत्तैयान: लोक निर्माण विभाग (PWD) की जिम्मेदारी संभाल सकते हैं।
- आधव अर्जुन: राज्य के नए खेल मंत्री हो सकते हैं।
- बुस्सी आनंद: नगर प्रशासन का प्रभार संभाल सकते हैं।
चुनौती अभी बाकी: 13 मई को होगा 'अग्निपरीक्षा' का सामना
भले ही आज विजय शपथ लेकर मुख्यमंत्री की कुर्सी पर काबिज हो जाएंगे, लेकिन असली चुनौती 13 मई को विधानसभा में होगी। गवर्नर ने उन्हें फ्लोर टेस्ट पास करने का निर्देश दिया है। विजय ने दो सीटों से जीत हासिल की है, और नियमानुसार उन्हें एक सीट छोड़नी होगी। ऐसे में विधानसभा की प्रभावी संख्या और गठबंधन के सहयोगियों को एकजुट रखना विजय के लिए किसी बड़ी परीक्षा से कम नहीं होगा। आज का दिन न केवल विजय के प्रशंसकों के लिए उत्सव का है, बल्कि यह तमिलनाडु के लोकतंत्र के लिए एक नए अध्याय की शुरुआत है। क्या यह 'विजय' स्थायी बदलाव लाएगी? इसका जवाब आने वाला वक्त और 13 मई का फ्लोर टेस्ट देगा।


