Raymond Chairman Death: कभी ब्रिटेन से अकेले प्लेन उड़ाकर भारत आए थे विजयपत सिंघानिया!
रेमंड के पूर्व चेयरमैन विजयपत सिंघानिया का 87 की उम्र में निधन कई सवाल छोड़ गया-क्या यह सिर्फ एक उद्योगपति का अंत है या पिता-पुत्र विवाद की अनकही कहानी? आसमान छूने वाले इस लीडर की जिंदगी में आखिर कौन सा सच छिपा रह गया? क्या अधूरी रह गई उनकी कहानी?

Raymond Chairman Death: भारत के मशहूर उद्योगपति और विजयपत सिंघानिया अब इस दुनिया में नहीं रहे। 87 साल की उम्र में उनका निधन हो गया। यह खबर उनके बेटे गौतम सिंघानिया ने सोशल मीडिया के जरिए दी। आज मुंबई के चंदनवाड़ी श्मशान घाट में उनका अंतिम संस्कार किया जाएगा। विजयपत सिंघानिया का निधन सिर्फ एक उद्योगपति के जाने की खबर नहीं, बल्कि सवालों का एक सिलसिला भी है। आसमान छूने वाले इस शख्स ने बिजनेस और एडवेंचर दोनों में इतिहास रचा, लेकिन उनके निजी जीवन में चल रहा विवाद हमेशा सुर्खियों में रहा। क्या यह सिर्फ एक सफल जीवन का अंत है, या फिर उन रहस्यों का पर्दा जो अब कभी पूरी तरह सामने नहीं आएंगे? क्या एक महान उद्योगपति की कहानी सिर्फ सफलता थी… या अधूरी लड़ाई भी?
क्या रेमंड को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाने वाले लीडर का अंत इतना शांत होगा?
Raymond Group का नाम आज भारत ही नहीं, दुनिया भर में जाना जाता है। लेकिन इसे इस मुकाम तक पहुंचाने में सबसे बड़ा योगदान विजयपत सिंघानिया का रहा। उन्होंने 1980 में कंपनी की कमान संभाली और इसे एक मॉडर्न इंडस्ट्रियल ब्रांड बना दिया। उनके समय में कंपनी ने टेक्सटाइल के साथ-साथ इंजीनियरिंग और एविएशन जैसे सेक्टर में भी कदम रखा। “पार्क एवेन्यू” जैसे प्रीमियम ब्रांड लॉन्च कर उन्होंने भारतीय पुरुषों की फैशन सोच ही बदल दी।
रेमंड ग्रुप के पूर्व चीफ और पद्म भूषण से सम्मानित विजयपत सिंघानिया का 87 वर्ष की आयु में निधन हो गया। उनके बेटे, रेमंड ग्रुप के CMD, गौतम सिंघानिया ने X पर शोक संदेश और अंतिम संस्कार की घोषणा की। pic.twitter.com/zORvkmOvbG
— ANI_HindiNews (@AHindinews) March 28, 2026
क्या सच में आसमान ही उनकी असली पहचान था?
विजयपत सिर्फ बिजनेसमैन नहीं थे, बल्कि एक एडवेंचर लवर भी थे। उन्होंने कई ऐसे कारनामे किए, जो आज भी लोगों को हैरान कर देते हैं।
- 1988 में उन्होंने लंदन से दिल्ली तक अकेले माइक्रोलाइट विमान उड़ाया
- 2005 में 69,000 फीट की ऊंचाई तक हॉट एयर बैलून से पहुंचे
- 5000+ घंटे उड़ान का अनुभव, एयरफोर्स ने बनाया मानद एयर कमोडोर
- उनकी इसी बहादुरी के लिए उन्हें “पद्म भूषण” और “तेनजिंग नोर्गे अवॉर्ड” भी मिला।
क्या एक पिता और बेटे के रिश्ते की कहानी सबसे ज्यादा चर्चा में रही?
जहां एक तरफ उनकी सफलता की कहानियां थीं, वहीं दूसरी तरफ उनके जीवन का एक विवादित पहलू भी रहा। 2015 में उन्होंने कंपनी की जिम्मेदारी बेटे गौतम को सौंप दी, लेकिन इसके बाद दोनों के बीच संपत्ति को लेकर विवाद शुरू हो गया। 2017 में विजयपत ने दावा किया था कि उन्हें अपने ही घर से निकाल दिया गया। यह मामला लंबे समय तक मीडिया में छाया रहा। हालांकि 2024 में सुलह की खबरें आईं, लेकिन बाद में खुद विजयपत ने इन दावों को खारिज कर दिया।
क्या रेमंड आज भी उनकी विरासत को आगे बढ़ा रहा है?
आज रेमंड एक मजबूत ब्रांड बन चुका है:
- 1 लाख से ज्यादा टेलर जुड़े
- 1500+ शोरूम भारत में
- 60+ देशों में मौजूदगी
- 3 करोड़ मीटर से ज्यादा कपड़े का उत्पादन
यह सब उनकी बनाई नींव का ही परिणाम है।
विजयपत सिंघानिया क्या छोड़ गए पीछे?
1925 में शुरू हुआ रेमंड आज भारत का बड़ा मेंसवियर ब्रांड है। विजयपत के नेतृत्व में कंपनी ने ग्लोबल पहचान बनाई। आज 60+ देशों में इसका विस्तार है। गौतम सिंघानिया अब इस विरासत को आगे बढ़ा रहे हैं। विजयपत सिंघानिया का जाना सिर्फ एक व्यक्ति का अंत नहीं, बल्कि एक दौर का अंत है। लेकिन उनके जीवन से जुड़े सवाल और कहानियां अभी भी लोगों के मन में जिंदा हैं।
क्या विजयपत सिंघानिया की कहानी सिर्फ सफलता नहीं, एक सीख भी है?
विजयपत सिंघानिया का जीवन हमें यह सिखाता है कि सफलता के साथ चुनौतियां भी आती हैं। उन्होंने बिजनेस, एडवेंचर और जीवन-तीनों में अपनी अलग पहचान बनाई। उनकी कहानी सिर्फ एक उद्योगपति की नहीं, बल्कि एक ऐसे इंसान की है जिसने आसमान को छूने का सपना देखा… और उसे सच भी किया, लेकिन निजी जिंदगी में कुछ सवाल अधूरे ही रह गए।
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