क्या आपका वीज़ा डेटा सुरक्षित है, जब VFS Global यूरोप में जांच के घेरे में है? क्या निजी कंपनियों को संवेदनशील बायोमेट्रिक और पासपोर्ट डेटा संभालना चाहिए? क्या वीज़ा प्रक्रिया अब पारदर्शिता से ज्यादा कमाई का कारोबार बन चुकी है? क्या सरकारें सीमाओं का नियंत्रण धीरे-धीरे निजी हाथों में खो रही हैं?

VFS Global Investigation: लाखों भारतीयों के लिए, जो हर साल छुट्टियों, उच्च शिक्षा या विदेश में करियर बनाने का सपना देखते हैं, उनका वीज़ा का सफर अब किसी दूतावास के गेट से शुरू नहीं होता। इसके बजाय, यह सफर शुरू होता है VFS Global नाम की एक आउटसोर्सिंग कंपनी के आलीशान और कड़े सुरक्षा वाले दफ्तरों से। लेकिन क्या आपको पता है कि जिस कंपनी को आप अपना पासपोर्ट, बैंक स्टेटमेंट, और अपनी उंगलियों के निशान (बायोमेट्रिक्स) सौंप रहे हैं, वह इस वक्त यूरोपीय संघ (EU) के रडार पर है?

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एक सनसनीखेज खुलासे में, Politico और The Indian Express की रिपोर्टों ने यूरोपीय संघ की उन अंदरूनी और गोपनीय रिपोर्टों को उजागर किया है, जिन्होंने अंतरराष्ट्रीय यात्रा के इस पूरे सिस्टम को हिलाकर रख दिया है। डेटा हैंडलिंग में लापरवाही, छुपी हुई फीस, और सीमाओं के प्रबंधन का यह 'निजीकरण' अब एक बड़े अंतरराष्ट्रीय विवाद का रूप ले चुका है।

 क्या निजी हाथों में महफूज है आपकी गोपनीय जानकारी?

वीज़ा आवेदन प्रक्रिया महज एक कागज़ी कार्रवाई नहीं है। यह किसी भी नागरिक की सबसे गोपनीय जानकारियों-जैसे बैंक खाते की बारीकियां, सैलरी स्लिप, परिवार का विवरण, पासपोर्ट नंबर और सबसे संवेदनशील बायोमेट्रिक डेटा (उंगलियों के निशान और चेहरे का स्कैन) का खजाना है।

यूरोपीय संघ की आंतरिक जांच में सबसे बड़ा सवाल इसी बात पर उठाया गया है कि क्या यह निजी ठेकेदार इतने बड़े स्तर पर आव्रजन (Immigration) डेटा को सुरक्षित रखने में सक्षम है? यह चिंता तब और गहरी हो गई जब साल 2023 में खुद VFS के अहमदाबाद कार्यालय में एक बड़ा 'ब्रिच' (उल्लंघन) स्वीकार किया गया, जहां कुछ कर्मचारियों और बाहरी एजेंटों पर कनाडा जाने वाले आवेदकों के फर्जी बायोमेट्रिक नामांकन में मदद करने का गंभीर आरोप लगा था। हालांकि VFS का कहना है कि उनकी धोखाधड़ी के खिलाफ 'ज़ीरो टॉलरेंस' की नीति है, लेकिन इस घटना ने सुरक्षा तंत्र की कमियों को सरेआम उजागर कर दिया।

'वैकल्पिक' सेवाओं के नाम पर मजबूरी का फायदा?

इस विवाद का दूसरा सबसे कड़वा पहलू है-वीज़ा आवेदनों का अंधाधुंध कारोबार। तकनीकी रूप से वीज़ा की आधिकारिक फीस सरकारें तय करती हैं, लेकिन आम आवेदक को इसके अलावा VFS को अतिरिक्त सर्विस चार्ज देना पड़ता है। खेल यहीं खत्म नहीं होता; असल सस्पेंस शुरू होता है इन तथाकथित 'वैकल्पिक' (Optional) सेवाओं के चक्रव्यूह से:

  • कूरियर रिटर्न और SMS अलर्ट के नाम पर वसूली।
  • फॉर्म भरने में मदद और प्राइम-टाइम अपॉइंटमेंट के लिए भारी-भरकम प्रीमियम फीस।
  • आक्रामक मार्केटिंग, जिससे आवेदकों के मन में डर बैठ जाता है कि अगर उन्होंने 'प्रीमियम लाउंज' या अतिरिक्त सेवाएं नहीं लीं, तो कहीं उनका वीज़ा रिजेक्ट न हो जाए।
  • सोशल मीडिया पर उपभोक्ताओं की शिकायतों की बाढ़ आई हुई है कि कैसे शेंगेन (Schengen) वीज़ा की आड़ में भारतीय यात्रियों की जेबें ढीली की जा रही हैं।
  • हालांकि, VFS का दावा है कि ये सभी प्रीमियम सेवाएं पूरी तरह स्वैच्छिक हैं और इनका वीज़ा मिलने या न मिलने के फैसले से कोई संबंध नहीं होता।

एकाधिकार का आतंक: जब आपके पास कोई दूसरा रास्ता ही न बचे!

इस पूरे मामले का सबसे हैरान करने वाला सच यह है कि एक आम यात्री के पास कोई दूसरा विकल्प ही नहीं है। यदि किसी देश के दूतावास ने VFS Global को अपना आधिकारिक पार्टनर नियुक्त कर दिया है, तो आपको न चाहते हुए भी अपने सारे दस्तावेज उन्हीं को सौंपने होंगे। विश्लेषकों का मानना है कि VFS जैसी फर्में अब उन संप्रभु (Sovereign) कार्यों को संभाल रही हैं जो कभी सीधे तौर पर सरकारों के अधीन होते थे। इस 'मोनोपॉली' (एकाधिकार) के कारण वेबसाइटों का ठप होना, अपॉइंटमेंट की भारी किल्लत और कस्टमर केयर की लापरवाही जैसी समस्याओं पर कोई ठोस कार्रवाई नहीं हो पाती।

आखिर देश की सीमाओं पर किसका नियंत्रण है?

VFS Global आज 141 देशों में 3,500 से ज्यादा केंद्र चलाती है और 71 सरकारों को अपनी सेवाएं देती है। कंपनी का बार-बार यही बचाव होता है कि वह केवल "प्रशासनिक और गैर-निर्णायक काम" संभालती है और वीज़ा देने का अंतिम अधिकार सरकारों के पास ही है। लेकिन बड़ा सस्पेंस और वैचारिक युद्ध इसी बात को लेकर है: क्या सरकारों ने अपनी सीमाओं की सुरक्षा और प्रवासन (Migration) के शुरुआती प्रवेश द्वार को पूरी तरह एक कमर्शियल कंपनी के हवाले कर दिया है? जैसे-जैसे वैश्विक स्तर पर यात्रा की मांग बढ़ रही है, यूरोपीय संघ की यह जांच दुनिया भर के यात्रियों के लिए एक चेतावनी है कि अंतरराष्ट्रीय आवाजाही के इस खेल में परदे के पीछे बहुत कुछ ऐसा चल रहा है, जो सामान्य नजरों से ओझल है!