Land For Job Case : लालू परिवार पर आरोप तय, जेल जाएंगे फैमिली के 6 लोग? आगे क्या ऑप्शन
Land For Job Case : बिहार के चर्चित मामले 'लैंड फॉर जॉब केस' को लेकर आज दिल्ली कोर्ट में सुनवाई हुई। कोर्ट ने लालू यादव परिवार को लेकर बड़ा फैसला सुनाया। अदालत ने लालू प्रसाद यादव, राबड़ी देवी और तेजस्वी यादव समेत परिवार के छह लोगों पर आरोपी माना है।

'लैंड फॉर जॉब केस में सभी आरोप तय
बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री और राजद सुप्रीमों लाल प्रसाद यादव समेत उनके परिवार की मुश्किलें बढ़ गई हैं। चर्चित लैंड फॉर जॉब केस में कोर्ट ने लालू फैमिली समेत 41 पर आरोप तय कर दिए हैं। मामले पर सुनवाई करते हुए राउज एवेन्यू कोर्ट के विशेष न्यायाधीश विशाल गोग्ने ने कहा कि लालू यादव और उनका परिवार एक आपराधिक गिरोह की तरह काम कर रहे थे और उन्होंने पूरी प्लानिंग के तहत गहरी साजिश रची थी।
लालू यादव परिवार के ये 6 लोग आरोपी
दरअसल, कोर्ट ने लैंड फॉर जॉब केस को लेकर शुक्रवार को दिल्ली के राउज एवेन्यू कोर्ट में सुनवाई हुई। जिसमें लालू प्रसाद यादव उनकी पत्नी राबड़ी देवी, बेटे तेजप्रताप, तेजस्वी यादव और बेटी मीसा, हेमा पर आरोप तय किए गए। इस दौरान मीसा भारती और बेटे तेजप्रताप-तेजस्वी कोर्ट में मौजूद थे। बता दें कि यह मामला केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (CBI) द्वारा दर्ज किया गया है।
लैंड फॉर जॉब केस में अब आगे क्या
राउज एवेन्यू कोर्ट ने सबूत के आधार पर मान लिया है कि लाल परिवार के ख़िलाफ लगाए गए आरोप सही हैं। अब आरोप तय होने के बाद सवाल यह है कि अब आगे क्या हो। कोर्ट के फैसले के मुतबिक, लालू परिवार ख़िलाफ इस केस का ट्रायल चलेगा। ट्रायल में बहस होने के बाद अंतिम फैसला सुनाया जाएगा। यानि अभी लालू यादव फैमिली के पास विकल्प है।
लालू यादव फैमिली के पास क्या विकल्प
आरोप तय होने के बाद अब लालू परिवार उन विकल्प में जुट गया है, जो उनके पास हैं। जानकारों के मुताबिक, लालू यादव लोअर कोर्ट के इस फैसले के खिलाफ हायर कोर्ट में अपील कर सकते हैं। उनके लिए अभी यह ऑप्शन खुला है।
क्या है लैंड फॉर जॉब केस?
लैंड फॉर जॉब से ही पता चलता है कि यह मामला जमीन के बदले नौकरी घोटाला (Land for Job Scam) का है। जिसमें लालू यादव परिवार पर रेलवे में नौकरी देने के बदले जमीन लेने के आरोप हैं। सीबीआई का आरोप है कि यह स्कैम लालू यादव के रेल मंत्री रहने के दौरान साल 2024 से 2009 के बीच हुआ था। इस दौरान मध्यप्रदेश के जबलपुर स्थित इंडियन रेलवे के वेस्ट सेंट्रल जोन में ग्रुप डी कैटेगरी में भर्तियां हुईं थीं। भर्तियां नियमों को दरकिनार करके की गईं और इसके पीछे निजी फायदे के लिए घोटाला किया गया। जिसमें 2020 के बाद सीबीआई और ईडी ने बिहार और दिल्ली के कई ठिकानों पर छापेमारी की और 2022 को सीबीआई ने इस मामले में केस दर्ज किया