चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार का इस्तीफे की मांग को लेकर कांग्रेस से लेकर सीजेपी और तमाम राजनीतिक दल देशभर में विरोध-प्रदर्शन कर रहे हैं। क्योंकि उन पर गलत तरीके से वोटर लिस्ट से नाम हटाने यानि वोट चोरी करने का आरोप है। इसी बीच पूर्व चुनाव आयुक्त अशोक लवासा ने ऐसा बयान दिया है जिससे सियासत और गरमा गई है।

नई दिल्ली: देश में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी SIR को लेकर एक बार फिर सवाल उठे हैं। सभी विपक्षी दल और सीजेपी चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग कर रहा है। उन पर केंद्र सरकार के साथ मिलभगत करने के आरोप लग रहे हैं। इसी बीच पूर्व चुनाव आयुक्त अशोक लवासा ने मंगलवार को आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान वोटर लिस्ट से नाम हटाने की प्रक्रिया पर अपनी बात रखी। उन्होंने कहा कि कुछ लोगों के नाम केवल इस संदेह के आधार पर मतदाता सूची से हटा दिए गए कि वे भारत के नागरिक नहीं हैं। लवासा के मुताबिक, ऐसे मामलों में पर्याप्त सबूतों के आधार पर फैसला लिया जाना चाहिए। उनके इस बयान ने मतदाता सूची की पारदर्शिता, नागरिकता के प्रमाण और वोट देने के अधिकार को लेकर बहस को फिर चर्चा में ला दिया है।

कौन हैं पूर्व चुनाव आयुक्त अशोक लवासा?

  • अशोक लवासा भारतीय प्रशासनिक सेवा (IAS) के पूर्व अधिकारी हैं। वह हरियाणा कैडर के 1980 बैच के आईएएस अधिकारी रहे हैं। प्रशासनिक सेवा में लंबे समय तक काम करने के बाद उन्होंने कई अहम पदों पर जिम्मेदारी संभाली।
  • लवासा ने अक्टूबर 2018 में भारत के चुनाव आयुक्त के रूप में पदभार संभाला था। इस दौरान वह चुनाव से जुड़े कई महत्वपूर्ण मामलों को लेकर चर्चा में रहे। साल 2019 के लोकसभा चुनाव के समय भी वह सुर्खियों में आए थे। उस समय चुनाव आचार संहिता से जुड़े कुछ मामलों में उनके विचार चुनाव आयोग के बहुमत के फैसले से अलग थे।
  • अशोक लवासा अगस्त 2020 में चुनाव आयुक्त के पद से इस्तीफा देकर एशियाई विकास बैंक (ADB) में उपाध्यक्ष की जिम्मेदारी संभालने चले गए थे। वह चुनाव आयोग में मुख्य चुनाव आयुक्त बनने की संभावित वरिष्ठता क्रम में भी थे।

SIR पर क्या बोले अशोक लवासा?

  • नागरिक सम्मेलन में अशोक लवासा ने मतदाता सूची से नाम हटाने की प्रक्रिया पर सवाल उठाते हुए कहा कि किसी व्यक्ति को केवल संदेह के आधार पर मतदान के अधिकार से वंचित नहीं किया जाना चाहिए। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि किसी व्यक्ति की नागरिकता पर सवाल उठाने और उसे मतदाता सूची से हटाने के लिए उचित आधार और प्रमाण जरूरी हैं।
  • उनके बयान का मुख्य संदेश यह है कि मतदाता सूची को सही बनाने की प्रक्रिया में किसी भी पात्र नागरिक का नाम गलत तरीके से नहीं हटना चाहिए। इसके लिए प्रक्रिया पारदर्शी होनी चाहिए और प्रभावित लोगों को अपनी बात रखने का उचित अवसर मिलना चाहिए।

क्यों अहम है यह बयान?

  • SIR का उद्देश्य मतदाता सूची की जांच करके उसमें मौजूद गलतियों को दूर करना और पात्र मतदाताओं के नाम सुनिश्चित करना है। हालांकि, इस प्रक्रिया में नाम हटाने को लेकर उठने वाली शिकायतें लोकतांत्रिक अधिकारों से जुड़ा महत्वपूर्ण मुद्दा हैं।
  • अशोक लवासा का बयान इसी सवाल पर ध्यान दिलाता है कि मतदाता सूची की शुद्धता सुनिश्चित करते समय किसी भी योग्य मतदाता का अधिकार प्रभावित नहीं होना चाहिए।