Rajasthan Sarpanch Election 2026 : राजस्थान पंचायत चुनाव में जो रिजल्ट सामने आ रहे हैं, वह काफी चौंकाने वाले हैं। कुछ ऐसी की कहानी है, सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर पवन साहू की, जिनके करोड़ों फॉलोवर हैं। लेकिन पत्नी की करारी हार हुई है, उन्हें महज 277 वोट मिले।

कौन हैं पवन साहू? सोशल मीडिया पर 2.7 करोड़ से ज्यादा फॉलोअर्स, लेकिन पत्नी को सरपंच चुनाव में मिले सिर्फ 277 वोट

भीलवाड़ा/जयपुर. सोशल मीडिया पर करोड़ों लोगों के बीच लोकप्रिय होना और चुनाव में जनता का समर्थन हासिल करना, दोनों अलग-अलग बातें हैं। इसका उदाहरण राजस्थान के सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर पवन साहू के परिवार में देखने को मिला है। इंस्टाग्राम और यूट्यूब पर करोड़ों फॉलोअर्स रखने वाले पवन साहू की पत्नी कोमल साहू सरपंच का चुनाव हार गईं। फूलिया खुर्द ग्राम पंचायत में उन्हें महज 277 वोट मिले और वे तीसरे नंबर पर रहीं।

सरपंच चुनाव में पत्नी की करारी हार

  • राजस्थान की शाहपुरा पंचायत समिति की ग्राम पंचायत फूलिया खुर्द में सरपंच चुनाव के नतीजे सामने आए तो हर कोई हैरान रह गया। सोशल मीडिया पर पवन साहू की लोकप्रियता को देखते हुए उनकी पत्नी कोमल साहू की उम्मीदवारी काफी चर्चा में थी।
  • हालांकि, चुनाव के नतीजों में कोमल साहू को जनता का खास समर्थन नहीं मिला। उन्हें सिर्फ 277 वोट मिले। इस चुनाव में भगवतीलाल सोनी ने जीत दर्ज की। उन्हें कुल 1203 वोट मिले। वहीं, पूर्व सरपंच कालूराम जाट 797 वोट हासिल कर दूसरे नंबर पर रहे।
  • कोमल साहू इन दोनों उम्मीदवारों से काफी पीछे रह गईं। सोशल मीडिया पर लाखों-करोड़ों लोगों तक पहुंच रखने वाले परिवार के लिए यह नतीजा चर्चा का विषय बन गया है।

कौन हैं पवन साहू, जिनके करोड़ों फॉलोअर्स?

  • पवन साहू सोशल मीडिया के जाने-माने इन्फ्लुएंसर हैं। उनकी पहचान उनके बड़े सोशल मीडिया नेटवर्क से है। इंस्टाग्राम पर उनके करीब 70 लाख फॉलोअर्स हैं। वहीं, यूट्यूब पर उनके 2.7 करोड़ से ज्यादा सब्सक्राइबर्स बताए जाते हैं। फेसबुक पर भी उनके 30 लाख से ज्यादा फॉलोअर्स हैं।
  • सोशल मीडिया पर उनकी लोकप्रियता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि उनके वीडियो को बड़ी संख्या में लोग देखते हैं। चुनाव प्रचार के दौरान भी उनकी फैन फॉलोइंग को लेकर काफी चर्चा हुई थी।

वोटिंग के दौरान पुलिस से हुई थी बहस

  • चुनाव के दौरान पवन साहू उस समय भी चर्चा में आए, जब उन्होंने फर्जी वोटिंग को लेकर पुलिसकर्मियों से बहस की। बताया गया कि इसके बाद पुलिस ने उन्हें मतदान केंद्र से बाहर कर दिया था।
  • इस पूरे मामले ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा कर दिया है कि क्या सोशल मीडिया पर करोड़ों लोगों की पसंद होना चुनाव में जीत की गारंटी है? फूलिया खुर्द के नतीजे बताते हैं कि सोशल मीडिया की लोकप्रियता और स्थानीय स्तर पर जनता का भरोसा दो अलग-अलग चीजें हैं।