हरिद्वार के गंगा घाट पर एक महिला द्वारा अपने कुत्ते को नहलाने पर विवाद हुआ। स्थानीय लोगों ने धार्मिक आस्था का हवाला देकर इसका विरोध किया, जिससे निजी पसंद और सार्वजनिक पवित्रता पर बहस छिड़ गई।

भारत में गंगा नदी को सिर्फ एक नदी नहीं, बल्कि मां का दर्जा दिया गया है। उत्तराखंड का हरिद्वार शहर इसी नदी के किनारे बसा एक बेहद पवित्र तीर्थ स्थल है, जहां हर घाट और पानी की हर बूंद करोड़ों भक्तों की आस्था से जुड़ी है। यहां के हर की पौड़ी जैसे घाटों पर हर दिन हजारों लोग अपने पाप धोने के लिए पुण्य की डुबकी लगाते हैं। लेकिन हाल ही में यहां एक ऐसी घटना हुई, जिसने धार्मिक पवित्रता और निजी पसंद के बीच एक बड़ी बहस छेड़ दी है।

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क्या है पूरा मामला?

अपने परिवार के साथ हरिद्वार घूमने आई एक महिला गंगा घाट पर पहुंची। वह अपने साथ अपना पालतू कुत्ता भी लाई थी। जानवरों से प्यार करना अच्छी बात है, लेकिन जिस तरह महिला ने पवित्र घाट पर अपना प्यार दिखाया, उससे विवाद खड़ा हो गया। जिस जगह भक्त मंत्रों का जाप करते हुए पूरी श्रद्धा से डुबकी लगा रहे थे, वहीं महिला अपने कुत्ते को बार-बार पानी में डुबोकर नहलाने लगी।

स्थानीय लोगों ने जताया गुस्सा

कुत्ते को नदी में नहाते देख वहां मौजूद पुजारी, स्थानीय लोग और दूसरे श्रद्धालु भड़क गए। उन्होंने महिला को रोकते हुए कहा, "यह करोड़ों लोगों की आस्था का केंद्र है, यहां जानवरों को नहलाना धार्मिक परंपराओं के खिलाफ है।" लेकिन महिला अपनी गलती मानने की बजाय, उल्टा लोगों से ही बहस करने लगी। उसने चिल्लाते हुए कहा कि उसे और उसके जानवर को पवित्र नदी में नहाने का बराबर का हक है। इस दौरान महिला ने खुद को मंत्रालय का स्टाफ बताकर भी धौंस जमाने की कोशिश की। जब भक्तों का गुस्सा बढ़ने लगा, तो महिला के परिवार वालों ने बीच-बचाव किया और उसे वहां से ले गए, तब जाकर मामला शांत हुआ। इस घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होते ही लोगों ने मिली-जुली प्रतिक्रियाएं दी हैं।

परंपरा को मानने वालों की दलील

कई लोगों का कहना है कि हर धार्मिक जगह की अपनी एक मर्यादा और नियम होते हैं। जानवरों को घर पर प्यार करना अलग बात है, लेकिन आपका निजी प्रेम किसी भी तरह से सार्वजनिक आस्था या किसी जगह की पवित्रता को ठेस नहीं पहुंचाना चाहिए।

पशु प्रेमियों का पक्ष

वहीं, कुछ पशु प्रेमियों का मानना है कि जानवर भी भगवान की ही देन हैं। उन्हें पवित्र नदी में नहलाने से नदी की पवित्रता भंग नहीं होती। यह विवाद सिर्फ एक कुत्ते को नहलाने का नहीं है, बल्कि यह इस बात पर रोशनी डालता है कि हमें सार्वजनिक और धार्मिक जगहों पर दूसरों की आस्था का सम्मान कैसे करना चाहिए। भविष्य में ऐसी शर्मनाक और विवादित घटनाएं न हों, इसके लिए प्रशासन को गंगा घाटों पर जानवरों के आने-जाने को लेकर साफ नियम और बोर्ड लगाने की जरूरत है। कुल मिलाकर, यह घटना सिखाती है कि हमारी निजी आजादी कभी भी दूसरों की धार्मिक भावनाओं से ऊपर नहीं हो सकती।

यहां देखिए वीडियो 

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