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कौन है भारत की पहली ओलंपिक विजेता महिला खिलाड़ी कर्णम मल्लेश्वरी, जानें उनकी उपलब्धि

कर्णम मल्लेश्वरी एक रिटायर्ड भारतीय वेटलिफ्टर हैं। वह 2000 में ओलंपिक में पदक जीतने वाली पहली भारतीय महिला हैं। आइए आज आपको बताते हैं इनके बारे में...

75 Years of Independence: know about 1st indian woman olympic medalist Karnam Malleswari dva
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mumbai, First Published Aug 6, 2022, 7:00 AM IST

स्पोर्ट्स डेस्क : इस साल भारत अपनी आजादी का अमृत महोत्सव (Aazadi Ka Amrit Mahotsav) मना रहा है। 15 अगस्त 2022 को भारत की स्वतंत्रता के 75 साल (75 Years of Independence) पूरे हो जाएंगे। इन 75 सालों में देश में हर क्षेत्र में सर्वश्रेष्ठ मुकाम हासिल किया और अपने आप को दुनिया में साबित करके दिखाया। चाहे खेल हो या स्पेस साइंस, हर जगह भारतीयों ने अपनी जीत का परचम लहराया। कुछ इसी तरह से ओलंपिक में सबसे पहला पदक जीतने वाली महिला खिलाड़ी की आज हम बात करने वाले हैं, जिन्होंने 2000 में सिडनी ओलंपिक में पदक जीतकर भारत की पहली पदक वीर महिला एथलीट का खिताब हासिल किया। तो चलिए आपको बताते हैं कर्णम मल्लेश्वरी (Karnam Malleswari) के बारे में...

कौन है कर्णम मल्लेश्वरी 
बता दें कि कर्णम मल्लेश्वरी का जन्म 1 जून 1975 को आंध्र प्रदेश में हुआ था। वो एक भारतीय महिला वेटलिफ्टर है। जिन्होंने ओलंपिक में पदक जीतकर पहली भारतीय महिला एथलीट होने का गौरव हासिल किया। उन्होंने साल 2000 में सिडनी ओलंपिक में कुल 240 किलोग्राम, स्नेच श्रेणी में 110 किलोग्राम और क्लीन एंड जर्क में 130 किलोग्राम भार उठाया था और कांस्य पदक जीता था। उन्हें भारत की द आयरन लेडी कहा जाता था, क्योंकि वह ओलंपिक में पदक जीतने वाली पहली भारतीय महिला वेटलिफ्टर बनीं।

कर्णम मल्लेश्वरी के रिकॉर्ड
कर्णम मल्लेश्वरी के वेटलिफ्टिंग करियर की बात की जाए तो 1992 के एशियन चैंपियनशिप में उन्होंने तीन रजत पदक जीते थे। इतना ही नहीं विश्व चैंपियनशिप में वह तीन कांस्य पदक भी अपने नाम कर चुकी है। लेकिन उनकी जिंदगी की सबसे बड़ी कामयाबी उन्हें साल 2000 में मिली जहां उन्होंने सिडनी ओलिंपिक में ब्रॉन्ज मेडल जीता। उनके शानदार खेल को देखते हुए 1994 में उन्हें अर्जुन पुरस्कार, 1995 में राजीव गांधी खेल रत्न और 1999 में पद्मश्री से भी नवाजा गया।

2001 के बाद आया टर्निंग प्वाइंट
कर्णम महेश्वरी ने 2001 में प्रेगनेंसी के दौरान वेटलिफ्टिंग से ब्रेक लिया। हालांकि, 1 साल के अंदर ही 2002 के राष्ट्रमंडल खेलों के लिए उन्होंने कड़ी मेहनत की। लेकिन उनके पिता के आकस्मिक निधन के कारण वह इसका हिस्सा नहीं बन पाई। इसके बाद एथेंस में 2004 के ओलंपिक में उन्होंने भाग लिया। लेकिन पीठ में गंभीर चोट के कारण वह अपना सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन नहीं दे पाई। इसके बाद उन्होंने वेटलिफ्टिंग से संन्यास ले लिया। लेकिन कर्णम महेश्वरी को सिडनी ओलंपिक में उनकी खास परफॉर्मेंस के लिए हमेशा याद रखा जाता है और उन्होंने भारत की हर एक महिला को गर्व महसूस करवाया।

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