पाकिस्तानी के वेटलिफ्टर (Pakistan weighlifter) नूह बट भारतीय वेट लिफ्टर मीराबाई चानू (Mirabai chanu) के बड़े प्रशंसक हैं। बट ने कॉमनवेल्थ गेम्स (Commonwealth Games) में पाकिस्तान के लिए पहला गोल्ड मेडल भी जीता है। 

Commonwealth Games. कॉमनवेल्थ गेम्स में पाकिस्तानी वेटलिफ्टर नूह दस्तगीर बट ने पाकिस्तान को पहला स्वर्ण पदक दिलाया है। उन्हें बधाई देने वालों में सबसे पहले भारतीय सुपरस्टार मीराबाई चानू शामिल थीं। ओलंपिक पदक विजेता चानू ने खुद को सुपरस्टारडम तक पहुंचा दिया है और न केवल भारत में बल्कि पड़ोसी देश के भारोत्तोलकों के लिए भी आइकन से कम नहीं हैं। जीत के बाद मीराबाई चानू से मिली बधाई पर बट ने कहा कि यह मेरे लिए गर्व का क्षण है क्योंकि मैं जिसका प्रशंसक हूं, उन्होंने खुद ही मुझे बधाई दी है।

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क्या कहते हैं नूह बट
पाकिस्तान के लिए गोल्ड मेडल जीतने वाले बट ने कहा कि हम प्रेरणा के लिए मीराबाई की ओर देखते हैं। उन्होंने हमें दिखाया है कि हम दक्षिण एशियाई देशों के लोग भी ओलंपिक में पदक जीत सकते हैं। हमें उन पर बहुत गर्व हुआ, जब उन्होंने टोक्यो ओलंपिक में रजत पदक जीता। उन्हीं की कैटेगरी में ब्रान्ज मेडल जीतने वाले गुरदीप सिंह भी बट के करीबी दोस्तों में एक हैं। बट ने कहा कि हम पिछले 7-8 वर्षों से बहुत अच्छे दोस्त रहे हैं। हमने कई बार विदेश में एक साथ प्रशिक्षण लिया है। हम हमेशा संपर्क में रहे हैं। बट ने कहा कि सभी भारतीयों के साथ हमारे मिलनसार संबंध हैं। बट ने जीत के बाद कहा कि यह कभी भी भारत-पाक लड़ाई नहीं थी बल्कि हम दोनों अपना सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करना चाहते थे। गुरदीप के बारे में उन्होंने कहा कि ऐसा नहीं था कि मैं भारत के वेटलिफ्टर के साथ प्रतिस्पर्धा कर रहा था। मैं सिर्फ अपना सर्वश्रेष्ठ देना चाहता था और गोल्ड जीतना चाहता था। 

भारत की दो यादगार यात्राएं
इंटरनेशनल इवेंट्स के लिए बट दो बार भारत की यात्रा कर चुके हैं। पुणे में यूथ कॉमनवेल्थ चैंपियनशिप 2015 में और अगले साल गुवाहाटी में दक्षिण एशियाई खेलों के लिए वे भारत आ चुके हैं। बट ने कहा कि मैं दो बार भारत आ चुका हूं और हर बार मुझे जो प्यार मिलता है, वह अविस्मरणीय है। मैं फिर से भारत वापस जाने के लिए तरस रहा हूं। बट ने कहा कि मुझे लगता है कि पाकिस्तान से ज्यादा के प्रशंसक भारत में हैं। उन्होंने मजाक में कहा कि मुझे लगता है कि मेरे घर से ज्यादा मेरे प्रशंसक भारत में हैं। 2016 में दोनों देशों के बीच तनाव चल रहा था तभी पाकिस्तानी दल गुवाहाटी पहुंचा था। बट ने कहा कि जब मैं गुवाहाटी में था तो होटल के कर्मचारी मेरे परिवार की तरह हो गए थे और मेरे जाने पर रोने लगे थे। उन 10-15 दिनों में ऐसा संबंध बना जिससे यह महसूस हुआ कि भारत-पाकिस्तान कभी दुश्मन नहीं हो सकते।

पिता हैं बट के कोच
कॉमनवेल्थ गेम्स की बात करें तो यह मात्र दूसरा गोल्ड है पाकिस्तान को मिला है। इससे पहले 2006 में शुजाउद्दीन मलिक ने वेटलिफ्टिंग में गोल्ड जीता था। इसके अलावा जूडो के शाह हुसैन शाह कांस्य पदक जीतने वाले एकमात्रन अन्य पाकिस्तानी हैं। बट के पिता और कोच गुलाम दस्तगीर पूर्व नेशनल चैंपियन हैं। उन्होंने अपने बेटे के लिए गुजरांवाला के घर में ही व्यायामशाला बनाई है, जहां वह घंटों ट्रेनिंग करते हैं। बट ने कहा कि मुझसे बहुत उम्मीदें थीं क्योंकि हमारे कई साथी एथलीट जीत नहीं सके। मेरे कंधों पर मेरे देश को राष्ट्रमंडल खेलों में पहला स्वर्ण दिलाने की जिम्मेदारी थी। मेरे पिताजी मेरी प्रेरणा हैं।

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