दरअसल, दीपा को भारतीय पैरालिंपिर समिति यानी PCI का अध्यक्ष चुना गया था। लेकिन खेल मंत्रालय ने पीसीआई को मान्यता देने से इंकार कर दिया है। उनका मानना है कि कोई भी सक्रिय एथलीट किसी भी फेडरेशन में आधिकारिक रूप से पद पर नहीं रह सकता है। इसके बाद उन्होंने आज खुलासा करते हुए कहा कि 'मैंने चुनाव से पहले ही यानी पिछले साल सितंबर में ही संन्यास ले लिया है।

स्पोर्ट्स डेस्क. सोमवार को पैरा-एथलीट दीपा मलिक ने अपने संन्यास को लेकर एक खुलासा किया है। भारत के लिए पैरालिंपिक खेलों में एक मात्र पदक जीतने वाली महिला खिलाड़ी दीपा ने सोमवार को ट्वीट कर बताया कि उन्होंने सक्रिय खेलों से संन्यास ले लिया है। लेकिन हैरान करने वाली बात यह है कि उन्होंने ये फैसला जनवरी में ही लिया और किसी को इस बारे में अब तक पता भी नहीं चला। 

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पहले ही ले चुकी हैं संन्यास
दरअसल, दीपा को भारतीय पैरालिंपिर समिति यानी PCI का अध्यक्ष चुना गया था। लेकिन खेल मंत्रालय ने पीसीआई को मान्यता देने से इंकार कर दिया है। उनका मानना है कि कोई भी सक्रिय एथलीट किसी भी फेडरेशन में आधिकारिक रूप से पद पर नहीं रह सकता है। इसके बाद उन्होंने आज खुलासा करते हुए कहा कि 'मैंने चुनाव से पहले ही यानी पिछले साल सितंबर में ही संन्यास ले लिया है। मैं PCI को पहले ही पत्र सौंप चुकी हूं। 

सार्वजनिक तौर पर की संन्यास की घोषणा
दीपा ने रियो पैरालिंपिक 2016 में गोला फेंक में भारत के लिए रजत पदक जीता था। उन्हें पिछले साल देश के सर्वोच्च खेल सम्मान राजीव गांधी खेल रत्न से भी सम्मानित किया जा चुका है। उन्होंने ट्वीट कर बताया कि अब हाई कोर्ट के फैसले का इंतजार है। मैं खेल मंत्रालय से मान्यता के लिए सक्रिय खेलों से संन्यास की सार्वजनिक तौर पर अब घोषणा करती हूं। यह समय पैरा-स्पोर्ट्स को समर्थन देने का है।