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...तो दुती चंद ने जानबूझकर खड़ा किया था विवाद, फेसबुक पोस्ट पर अभी तक जारी हैं चर्चाएं

भारत की मशहूर एथलीट दुती चंद ने कुछ समय पहले सोशल मीडिया पर एक पोस्ट डाल कर विवाद पैदा कर दिया था। उन्होंने फेसबुक पर लिखा था कि उनके पास ट्रेनिंग के लिए भी पैसे नहीं हैं, इसलिए वह अपनी बीएमडब्ल्यू कार बेचना चाहती हैं। इस पर ओडिशा सरकार के सूत्रों का कहना है कि विवाद खड़ा करना दुती चंद की पुरानी आदत है।

Dutee Chand created controversies, she got more money than other Asian Games Gold medalists, says Odisha Government sources MJA
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New Delhi, First Published Jul 19, 2020, 5:41 PM IST
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स्पोर्ट्स डेस्क। भारत की मशहूर एथलीट दुती चंद ने कुछ समय पहले सोशल मीडिया पर एक पोस्ट डाल कर विवाद पैदा कर दिया था। उन्होंने फेसबुक पर लिखा था कि उनके पास ट्रेनिंग के लिए भी पैसे नहीं हैं, इसलिए वह अपनी बीएमडब्ल्यू कार बेचना चाहती हैं। इस पर ओडिशा सरकार के सूत्रों का कहना है कि विवाद खड़ा करना दुती चंद की पुरानी आदत है। सरकारी सूत्र ने दुती चंद की इस हरकत पर यहां तक कहा कि आखिर बदतमीजी की भी कोई हद होती है। अब दुती चंद ने फेसबुक से उस पोस्ट को हटा दिया है, लेकिन ओडिशा सरकार का कहना है कि दुती चंद को एशियन गेम्स में गोल्ड मेडल जीतने वाले खिलाड़ियों से भी ज्यादा पैसा दिया गया है।

क्या कहा ओडिशा सरकार के विभाग ने
ओडिशा सरकार के खेल एवं युवा मामलों के विभाग ने बयान जारी कर के कहा है कि दुती चंद को 2015 के बाद राज्य सरकार की ओर से 4.09 करोड़ रुपए की मदद दी गई है। राज्य सरकार के मुताबिक, दुती चंद को 3 करोड़ एशियाई गेम्स, 2018 में जीते गए पदकों के लिए वित्तीय अनुदान के रूप में दिए गए, 2015-19 के बीच 30 लाख रुपए ट्रेनिंग के लिए और टोक्यो ओलिंपिक की तैयारियों के लिए दो किस्तों में 50 लाख रुपए दिए गए। टाइम्स ऑफ इंडिया के एक सूत्र के मुताबिक, एशियन गेम्स में हीमा दास (फर्राटा धावक) और स्वप्ना बर्मन (हेप्टाथलीट) को उनकी राज्य सरकारों ने जो रकम दी है, दुतीचंद को उससे कहीं ज्यादा रकम मिली है। 

दुती चंद ने क्या दिया जवाब
सरकार के बयान पर दुती चंद ने कहा कि मैं इतने साल तक सहयोग करने के लिए ओडिशा सरकार की ऋणी हूं, लेकिन यह 4 करोड़ रुपए वाली बात सही नहीं है। दुती चंद ने कहा, "3 करोड़ वह पुरस्कार राशि है जो ओडिशा सरकार ने मुझे 2018 एशियाई खेलों में दो रजत पदक जीतने के लिए दी थी। यह उसी तरह है जैसे पीवी सिंधु या किसी दूसरे पदक विजेता को राज्य सरकारों से मिलती है। इसे ट्रेनिंग के लिए वित्तीय सहायता के तौर पर नहीं देखा जाना चाहिए।"

अलग है ओडिशा के अधिकारियों का तर्क
ओडिशा के ज्यादातर खेल अधिकारियों का तर्क अलग है। उनका कहना है कि आखिर दुती उस रकम में कुछ पैसा अपनी ट्रेनिंग पर खर्च क्यों नहीं कर सकतीं, बजाय अपनी लग्जरी पर खर्च करने के। एक सूत्र ने कहा, "एक ओर आप एहसानमंद हैं। फिर गैरजरूरी विवाद क्यों खड़ा किया जा रहा है? आपको 3 करोड़ रुपए मिले, आप उसे अपनी ट्रेनिंग मे खर्च कर सकती थीं। किसने आपको बीएमडब्ल्यू कार खरीदने के लिए कहा था? इसके अलावा आप खुद को KIIT यूनिवर्सिटी का स्टूडेंट बताती हैं, उसने भी आपको अच्छी-खासी रकम दी है।"

ओएमसी की अधिकारी हैं दुती
ओडिशा सरकार ने यह भी कहा कि उसने दुती को ओडिशा खनन कॉरपोरेशन (ओएमसी) में ग्रुप ए स्तर का अधिकारी नियुक्त किया है, जिससे उन्हें अपनी ट्रेनिंग और वित्तीय प्रोत्साहन के लिए 29 लाख रुपए की राशि मिली। हालांकि, दुती ने सरकार के इस दावे पर आपत्ति जताते हुए कहा कि इस राशि में उसका वेतन भी शामिल है। उन्होंने कहा, "इस 29 लाख रुपए में मेरा वेतन भी शामिल है और मुझे नहीं पता कि यह ट्रेनिंग में सहयोग के लिए कैसे है। मैं ओएमसी की कर्मचारी हूं और मुझे मेरा वेतन मिलेगा।"

पहले भी खड़ा कर चुकी हैं विवाद
एक सरकारी सूत्र ने कहा कि कुछ साल पहले दुती ने बयान दिया था कि मेरे पास जूते खरीदने के लिए भी पैसे नहीं हैं, और ऐसा तब था जब सीएम ने हाल ही में किसी आयोजन में उन्हें 5 लाख रुपए दिए थे। सूत्र ने बताया, "मुझे लगता है कि अब चीजों को सही तरीके से रखे जाने की जरूरत है। इसलिए ओडिशा सरकार ने मदद के लिए जारी रकम की लिस्ट जारी की है। हर चीज की एक हद होती है। आप कब तक बदतमीजी बर्दाश्त करोगे?"

विवाद खड़ा करने के लिए डाला पोस्ट
सूत्र ने कहा, "दुती कहती हैं मैंने फेसबुक पर पोस्ट इसलिए डाला था, ताकि मुझे कार के लिए और खरीददार मिल जाएं। क्या फेसबुक कार बेचने की जगह है? आदत वही है, ध्यान आकर्षित करना और विवाद पैदा करना।" दुती ने अभी टोक्यो ओलिंपिक में भाग लेने किए 100 मीटर और 200 मीटर की दौड़ को क्वॉलिफाइ नहीं किया है।  

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