इंटरनेट के बढ़ते यूज के कारण इसका उपयोग अब बड़ों के साथ बच्चे भी अपनी सुविधा के लिए भी उपयोग करने लगे है। लेकिन इसके कारण वो डार्क वेब का शिकार हो रहे है। ताजा मामला गुजरात का है जहां शिकार हुआ बच्चा राजस्थान में मिला जहां उसने खुद को किडनेप होना बताया। 

अजमेर (ajmer).राजस्थान के अजमेर जिले के दरगाह एरिया के पास एक युवक मिला। जिसने वहां कि पुलिस को खुद का किडनेप होकर यहां लेकर आना बताया। दरअसल गुजरात के भरूच शहर का रहने वाला एक दिन नाबालिग इंटरनेट की काली दुनिया यानी डार्क वेब का शिकार हो गया। यहां वह हैकर्स के चंगुल में फंस गया। हैकर्स ने नाबालिग की मां के अकाउंट को हैक कर उसमें से 5 लाख निकाल लिए। अगले ही दिन नाबालिग अपने घर से गायब हो गया जो अजमेर में दरगाह के पास मिला। पूछताछ में उसने बताया कि उसका किडनैप हो गया। फिलहाल सीडब्ल्यूसी ने नाबालिग को परिजनों को सौंप दिया है। लेकिन पुलिस को नाबालिग के शरीर पर चोट का एक भी निशान नहीं मिला है। फिलहाल घरवालों ने मामले में किसी भी प्रकार की रिपोर्ट दर्ज नहीं करवाई है। वहीं बच्चे को भी अपने साथ ले गए। दरअसल 17 साल का नाबालिग गुरुवार को अपने शहर से लापता हुआ। अगले ही दिन में अजमेर की दरगाह इलाके में मिला। विशेष शनिवार को परिजन वापस लेकर चले गए। 

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काउंसलिंग के समय लिए डीप वेब और डार्क वेब के नाम
 राजस्थान में बच्चे की सीडब्ल्यूसी की काउंसलिंग हुई तो सामने आया कि वह बुरी तरीके से डरा और सहमा हुआ था। काउंसलिंग कर रही सीडब्ल्यूसी की मेंबर अंजली शर्मा ने बताया कि जब बच्चे की काउंसलिंग की जा रही तो पहले तो उसने अपनी बात कही लेकिन इसी दौरान उसके मुंह से डार्क वेब और डीप वेब जैसे शब्द भी सुनने को मिले। जिससे यह पता लग गया कि बच्चा डार्क वेब के जरिए किसी ना किसी के संपर्क में आकर कोई अपराध कर चुका है। या किसी अपराध का शिकार हुआ है।

खाते से निकले लाखों रूपए
जब भी सीडब्ल्यूसी मेंबर ने बच्चे की काउंसलिंग करने के बाद परिजनों से पूछताछ की तो सामने आया कि जो राशि नाबालिग के मां के अकाउंट से गायब हुई है, वह उसके बड़े भाई को कनाडा भेजने के लिए हुए लोन की थी। जो डार्क वेब के जरिए हैकर्स ने निकाल ली। मां के अकाउंट से जब पैसे निकल गए तो घबराकर बच्चा घर छोड़कर निकल गया। फिलहाल बच्चे के घरवाले इस मामले में कुछ भी नहीं कह रहे है।

अपराध का दूसरा नाम है डार्क वेब
आमतौर पर हम इंटरनेट चलाते समय यही देखते हैं कि इंटरनेट पर अनंत जानकारियां है। लेकिन हमें गूगल क्रोम ओपेरा के जरिए जो चीजें देखते हैं वह पूरे इंटरनेट का केवल 5 परसेंट हिस्सा होती है जो हम गूगल ओपेरा पर देखते हैं। इसे सरफेस वेब भी कहा जाता है। लेकिन उसके बाद जो इंटरनेट का हिस्सा शेष बचता है उसे डीप वेब और डार्क वेब कहते हैं। टीट्वेब में हमारे ईमेल इनबॉक्स नेट बैंकिंग शामिल होते हैं जबकि डार्क वेब पर अवैध काम होते हैं जहां ब्लैक मार्केट, सिल्क रोड ,हथियारों की तस्करी, मानव तस्करी जैसी वारदातों की जानकारियों को एक दूसरे तक पहुंचा कर वारदात को अंजाम दिया जाता है। डार्क वेब को चलाने के लिए TOR ब्राउज़र की जरूरत है। डार्क वेब चलाने वाले शख्स की पहचान किसी के पास भी नहीं होती है। हालांकि यह इंस्टॉल करने के बाद कंप्यूटर के हैक होने के खतरा भी बना रहता है।

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