22 की उम्र में अपराध कर फरार हुए 76 साल के आरोपी को 54 साल बाद किया गया गिरफ्तार, तब तक बदले 21 एस पी। रिकार्ड में दर्ज फोटो का मिलान कराने में पुलिस के छूटे पसीने। परिजनों और रिश्तेदारों से कराई गई पहचान, तब जाकर हुआ अरेस्ट। अब होना है कोर्ट में पेसीा 

बूंदी (bundi).राजस्थान में किसी भी बदमाश को पकड़ने के लिए जिले के पुलिस एसपी की अहम भूमिका रहती है। लंबे समय तक गायब रहने वाले बदमाशों के लिए एसपी अलग से प्लानिंग करते हैं और इस प्लानिंग को पुलिस वाले फॉलो करते हैं। लेकिन राजस्थान के बूंदी जिले से एक ऐसा केस आया है जिसकी प्लानिंग करते करते 21 एसपी बदल गए , लेकिन वह बदमाश पकड़ में नहीं आ सका। अब जाकर उस बदमाश को 54 साल के बाद पकड़ा गया है । जिस समय उसने अपराध किया था उस समय उसके सही से दाढ़ी-मूछ भी नहीं हुई थी, अब हालात यह है कि शरीर पर एक भी काला बाल नहीं बचा है । 22 साल की उम्र में अपराध कर फरार हुए 76 साल के आरोपी को 54 साल के बाद राजस्थान पुलिस ने गिरफ्तार किया है। संभवतः यह प्रदेश का सबसे पुराना गिरफ्तार आरोपी बताया गया है। 

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पिछले दिनों में ₹3000 का इनाम किया था घोषित
दरअसल बूंदी जिले के कोतवाली थाना में 1967 में अमानत में खयानत करने और धोखाधड़ी के आरोप में मुंशी राम के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया गया था। एक साल तक वह नहीं मिला तो 1968 में उसके खिलाफ वारंट जारी कर दिया गया था। उसके बावजूद भी लगातार उसे तलाशा गया और बाद में उसके केस की फाइल अन्य केसों के नीचे दबती चली गई। लेकिन पिछले दिनों पुराने बदमाशों को तलाश करने की एक योजना के तहत उसकी फाइल पर फिर से धूल हटा दी गई। उस पर करीब ₹3000 का इनाम रखा गया और इस इनाम के बाद उसकी तलाश को प्राथमिकता पर लिया गया। सात पुलिस वालों की टीम को उसकी तलाश में ही लगाया गया था ताकि इतने पुराने केस की फाइल उसकी गिरफ्तारी के बाद बंद की जा सके । 

आखिर पुलिस को क्लू मिला और किया अरेस्ट
बूंदी में कई दिनों की तलाश के बाद भी जब आरोपी मुंशीराम नहीं मिला तो कुछ दिनों पहले उसके परिवार के एक सदस्य से सख्ती से पूछताछ की गई। जिसमें पता चला कि मुंशी राम को जिला छोड़े हुए कई साल हो गए। उसके बाद से परिवार ने भी उसे नहीं देखा। फिर भी पुलिस ने हार नहीं मानी और सूचनाएं और जानकारियां जमा करते हुए पुलिस उसके पीछे-पीछे गंगानगर जिले तक जा पहुंची। जहां जिले के मुकलावा क्षेत्र से आखिर मुंशी राम को गिरफ्तार कर लिया गया । 

रिकार्ड में दर्ज फोटो से चेहरा मिलाने में पुलिस के छूटे पसीने
जब आरोपी को गिरफ्तार किया गया तो वह चलने फिरने की हालत में भी नहीं था। उसकी उम्र वर्तमान में 76 साल के करीब है। उसकी फोटो को मिलान करने के लिए पुलिस को काफी मशक्कत करनी पड़ी है। जो पुरानी फोटो पुलिस के पास थी उससे 54 साल बाद की फोटो मिलान करने के लिए कई रिश्तेदारों और परिचितों की मदद ली गई। आखिर सरकारी दस्तावेज और अन्य जानकारियों में जब दोनों की पहचान मिल गई, तब जाकर पुलिस ने मुंशीराम को गिरफ्तार किया। हालात यह है कि अब मुंशीराम सही तरह से बयान देने की हालत में भी नहीं है। कोतवाली पुलिस ने बताया कि मुंशीराम को फिलहाल डॉक्टरों की देखरेख में रखा है। उसका यही कहना है कि वह करीब 15 साल से गंगानगर के मुकलावा क्षेत्र में रह रहा है। 

अब कोर्ट में जल्द होगी पेशी
इस पूरे घटनाक्रम में राजस्थान हाईकोर्ट के अधिवक्ता जितेंद्र मिश्रा का कहना है कि सरकारी सिस्टम में कोई चीज चढ़ती है तो उसे पूरे अंजाम तक पहुंचाया जाता है। मुंशीराम की गिरफ्तारी से अब उसके केस की फाइल बंद की जा सकेगी। यह भी बहुत हद तक संभव है कि इतने बुजुर्ग आरोपी से न्यायालय भी बेहद शालीन तरीके से पेश आएगी। संभव है कि उसे पहली ही तारीख पर जमानत भी मिल जाए।