राजस्थान के सवाई माधोपुर का अनोखा मामला सामने आया। जहां भारी बारिश के कारण रास्ते बंद थे, गर्भवती महिला ने बीच नदी नांव में टॉर्च की रोशनी में बच्चे को दिया जन्म। प्रदेश में शायद पहला ऐसा मामला जहां बीच नदी में नाव पर किसी महिला ने बच्चे को जन्म दिया हो।

सवाई माधोपुर. राजस्थान में भारी बारिश के चलते नदियां नाले कई जिलों में उफान पर हैं, और इतने उफान पर हैं कि कई गावों के तो रास्ते ही नदियों में उफान के कारण बंद हो गए हैं। ऐसे में अब वह बीमार और गर्भवती महिलाओं को बेहद परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। ऐसा ही एक मामला राजस्थान के सवाई माधोपुर जिले से सामने आया है। यह संभवतः राजस्थान का ही पहला मामला है जब एक मां ने पानी के बीच नाव में टॉर्च की रोशनी में बच्चे को जन्म दिया है और अच्छी बात ये है कि नवजात और मां दोनो ही स्वस्थ है। 

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बारिश में इसलिए बच्चे पैदा करना टालते हैं इस गांव के लोग 
बाघों के लिए मशहूर सवाई माधोपुर के खंडार क्षेत्र में स्थित खिदरपुरा जादौन गांव का यह पूरा मामला है। गांव पहाड़ी पर बसा हुआ है। पहाड़ी से नीचे सड़क है और सड़क से छूती हई ही बनास बहती है। गांव दो तरफ से बनास नदी से घिरा हुआ है और दो ओर से रणथम्भौर राष्ट्रीय अभ्यारण हैं। बरसात में जंगल बंद कर दिया जाता है तो ऐसे में नदी से ही जाने का एक मात्र रास्ता बचता है। यही कारण है कि गांव के लोग बच्चे पैदा करने के लिए बारिश का मौसम टालते हैं। या फिर गर्भवती महिलाओं को नदी पार उनके रिश्तेदारों या अन्य जगहों पर रखा जाता है ताकि प्रसव पीडा के दौरान उन्हें परेशानी नही हो।

रात दो बजे हुई प्रसव पीडा, नाव में लेकर गए परिवार के लोग 
मंगलवार रात गांव में रहने वाली भारती देवी के प्रसव पीडा हुई। उनके पति प्रभु बैरवा गांव के सरपंच से मदद मांगी। सरपंच पति अमरसिंह ने भारती देवी को अपनी गाड़ी में बिठाया और गांव के कच्चे रास्ते से होते हुए नदी एरिया तक ले आया। नदी पार करने के लिए वहां पहले से ही नाव तैयार कर ली गई थी। अमरसिंह ने नाव वाले के साथ भारती और उसके परिजनों को रवाना किया तो पता चला कि नदी के बीच तक जाते जाते भारती को प्रसव पीडा तेजी से हुई और उसने नाव में ही बच्चे को जन्म दे दिया। बाद में नवजात और उसकी मां दोनो को कुंडेरा पीएचसी में भर्ती कराया गया। 

स्थानीय सरपंच रामकन्या ने बताया कि गांव में बारिश के दौरान हालात बेहद खराब हो जाते हैं। पांच गांव के करीब चार हजार से भी ज्यादा लोग हैं। कई बार प्रशासन से पुलिया बनाने की मांग की है लेकिन कोई सुनने को ही तैयार नहीं है। जुगाड़ के सहारे काम निकालने पडते हैं।

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